वित्‍त मंत्रालय
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जून, 2021 में समाप्त तिमाही के लिए सार्वजनिक ऋण प्रबंधन पर तिमाही रिपोर्ट

Posted On: 28 SEP 2021 5:40PM by PIB Delhi

वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के अंतर्गत बजट प्रभाग में लोक ऋण प्रबंधन प्रकोष्ठ (पीडीएमसी) अप्रैल-जून (पहली तिमाही), 2010-11 से नियमित रूप से ऋण प्रबंधन पर एक त्रैमासिक रिपोर्ट जारी कर रहा है। वर्तमान रिपोर्ट अप्रैल-जून, 2021 (वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही) से संबंधित है।

वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के दौरान, केन्द्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जारी की गई 3,46,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों के मुकाबले 3,18,493 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी कीं, जबकि पुनर्भुगतान 1,05,186 करोड़ रुपये का हुआ। वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में प्राथमिक निर्गमों की भारित औसत प्राप्ति बढ़कर 6.11 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में 5.80 प्रतिशत रही थी। वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों के नए निर्गमों की भारित औसत परिपक्वता 16.92 वर्ष अधिक थी, जबकि वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में यह 13.36 वर्ष रही थी।

अप्रैल-जून, 2021 के दौरान, केंद्र सरकार ने नकद प्रबंधन बिलों के जरिए कोई राशि नहीं जुटाई। रिजर्व बैंक ने तिमाही के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री को शामिल करते हुए एक विशेष ओएमओ के अलावा जी एसएपी 1.0 के अंतर्गत तीन मुक्त बाजार खरीद आयोजित कीं। तिमाही के दौरान मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और स्पेशल लिक्विडिटी फैसिलिटी सहित लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) के अंतर्गत आरबीआई द्वारा दैनिक औसत तरलता अवशोषण 4,94,351 करोड़ रुपये रहा।

अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, जून, 2021 के अंत में सरकार की कुल देनदारियां ('लोक/सार्वजनिक खाते' के तहत देनदारियों सहित), बढ़कर 1,20,91,193 करोड़ रुपये हो गईं, जो मार्च, 2021 के अंत में 1,16,21,781 करोड़ रुपये थीं। इससे वित्तवर्ष-22 की पहली तिमाही में तिमाही-दर-तिमाही 4.04 प्रतिशत की बढ़ोतरी का पता चलता है। जून, 2021 के अंत में कुल बकाया देनदारियों का 91.60 प्रतिशत सार्वजनिक ऋण था। बकाया दिनांकित प्रतिभूतियों का लगभग 28.72 प्रतिशत की शेष परिपक्वता 5 वर्ष से कम थी। जून, 2021 के अंत में स्वामित्व पैटर्न में वाणिज्यिक बैंकों की हिस्सेदारी 35.99 प्रतिशत और बीमा कंपनियों की 25.83 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के संकेत मिलते हैं।

वित्त वर्ष 21 की समान तिमाही के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों की आपूर्ति में वृद्धि के कारण द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल में कमी आई। तिमाही के दौरान द्वितीयक बाजार में कारोबारी गतिविधियां 3-7 साल की परिपक्वता अवधि वाली बकेट में सीमित हो गईं, क्योंकि कम निर्गम के कारण 10 साल के बेंचमार्क वाली प्रतिभूतियों में कम कारोबार देखने को मिला। हालांकि, उदार रुख के साथ एमपीसी के प्रमुख नीतिगत दर को 4 प्रतिशत के स्तर पर अपरिवर्तित रखने और वित्त वर्ष, 2022 की पहली तिमाही में जी एसएपी 1.0 के तहत मुक्त बाजार खरीद के आयोजन के फैसले से प्राप्तियों को समर्थन मिला।

 

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