शिक्षा मंत्रालय
शिक्षा मंत्रालय ने 'बहुविषयक और समग्र शिक्षा पर राष्ट्रीय वेबिनार' का आयोजन किया
प्रविष्टि तिथि:
02 AUG 2021 4:58PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (एनईपी) के तहत शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधारों के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के विभिन्न पहलुओं पर विषय-आधारित वेबिनार की एक श्रृंखला का आयोजन भारत सरकार कर रही है। एनईपी के सबसे अहम क्षेत्रों में बहु-विषयक और समग्र शिक्षा शामिल होने के कारण, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आज बहु-विषयक और समग्र शिक्षा पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने इस वेबिनार की शुरुआत में अपने विचार रखे। शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस वेबिनार में भाग लिया।
समग्र और बहुविषयक शिक्षा पर राष्ट्रीय वेबिनार 02.08.21 को दोपहर 12:30 बजे से https://t.co/9xsRiYjYmw
- यूजीसी इंडिया (@ugc_india) 2 अगस्त, 2021
वेबिनार में उद्घाटन भाषण देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार ने तक्षशिला और नालंदा के समय से समग्र और बहु-विषयक शिक्षा की लंबी परंपरा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में समग्र व्यक्तित्व के विकास पर ध्यान दिया जाता था। मंत्री ने शिक्षा के उस मॉडल को फिर से बनाने की आवश्यकता पर बल दिया जहां जीवन के हर पहलू को सशक्त किया जाता है। बहुविषयक शिक्षा पर आगे बोलते हुए डा. सरकार ने कहा, अब छात्र विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में लीक से हटकर सोचने की क्षमता,आलोचनावादी सोच, प्रभावी संचार, सहयोग, तकनीकी कौशल और जीवन कौशल जैसे गुण हमारे छात्रों में विकसित किए जाने चाहिए। डॉ. सुभाष सरकार ने छात्रों को नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को पंख देने की उनकी जिम्मेदारी के बारे में भी याद दिलाया।
अपने उद्घाटन भाषण में श्री अमित खरे, सचिव, उच्च शिक्षा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के निर्माण और बुनियादी बातों पर प्रकाश डाला। श्री खरे ने आत्मनिर्भर भारत को साकार करने में एनईपी, 2020 की भूमिका पर बल दिया और बहुविषयक शिक्षा को साकार करने में संस्थानों, अनुदान और एक-दूसरे के बीच सहयोग की भूमिका पर जोर दिया।
यूजीसी के अध्यक्ष, प्रोफेसर डी.पी. सिंह ने मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। उन्होंने शिक्षा के समग्र परिप्रेक्ष्य की कल्पना करने में स्वामी विवेकानंद की दृष्टि पर बल देते हुए और शिक्षार्थियों को मूल्य आधारित शिक्षा पर बल दिया। प्रोफेसर सिंह ने अपनी बात मल्टी एंट्री-एक्जिट प्रणाली के माध्यम से समग्र शिक्षा और लचीलेपन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए खत्म किया।
बहुविषयक और समग्र शिक्षा पर वेबिनार ने एनईपी के मसौदे पर समिति के सदस्यों, शिक्षाविद्, वैज्ञानिकों और शैक्षिक प्रशासकों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान किया। वेबिनार का पहला सत्र "समग्र शिक्षा" विषय पर था और इसे गुजरात के केंद्रीय विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रोफेसर रमा शंकर दुबे ने संबोधित किया। प्रो. दुबे ने सामाजिक और भावनात्मक साक्षरता पर बल दिया। उन्होंने छात्रों के मूल्यांकन में सीखने की ललक, विश्लेषण करने की क्षमता, आलोचनावादी सोच और वैचारिक स्पष्टता जैसे कौशल पर भी ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
प्रोफेसर एम.के. श्रीधर, सदस्य, मसौदा एनईपी समिति और सदस्य, यूजीसी ने दूसरे सत्र में "बहुविषयक शिक्षा" विषय पर वेबिनार को संबोधित किया। प्रो. श्रीधर ने बहुविषयकता की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में एक विस्तृत ज्ञान से सभी को अवगत कराया। उन्होंने बहुविषयक शिक्षा पर पर जोर देते हुए कहा कि इससे छात्रों की क्षमता में विकाश होगा औैर वे लीक से हटकर सोच पाएंगे।
अंतिम सत्र में चर्चा का विषय 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के जरिए मल्टीपल एंट्री एग्जिट' था। इस पर प्रोफेसर वी.के. जैन, उपकुलपति, तेजपुर विश्वविद्यालय ने विचार रखे। प्रो. जैन ने 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम के लिए यूजीसी नियमों के अहर्ता का स्तर, क्रेडिट की जरूरत और अन्य पहलुओं के दिशानिर्देश के बारे में बताया।
प्रो. नागेश्वर राव, उपकुलपति, इग्नू, प्रो. सुनैना सिंह, कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय, प्रो. बद्री नारायण, निदेशक, जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रो. अनूप कुमार सिंह, महानिदेशक, निरमा विश्वविद्यालय, प्रो. भीमारया मेत्री, निदेशक, आईआईएम, नागपुर और प्रो. अविनाश चंद्र पांडे, निदेशक, आईयूएसी ने विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे।
वेबिनार में देश भर के अकादमिक, उद्योग और उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हुए। वेबिनार में विभिन्न मंत्रालयों, यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के अधिकारी भी मौजूद रहे।
वेबिनार से अनुशासन से परे दक्षता, समग्र शिक्षा के अभिनव व्यवधान और हितधारकों के बीच मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की विशेषताओं के जरिये समग्र और बहु-विषयक शिक्षा प्रदान कारना एनईपी, 2020 का लक्ष्य की जानकारी मिली, साथ ही उच्च शिक्षा प्रणाली में बहुत आवश्यक लचीलापन लाना है।
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एमजी/एएम/एके
(रिलीज़ आईडी: 1742138)
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