रक्षा मंत्रालय

सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सेला सुरंग की एस्केप ट्यूब का अंतिम विस्फोट

Posted On: 22 JUL 2021 7:50PM by PIB Delhi

· सेला सुरंग को तेजी से पूरा करने की दिशा में मिली सफलता

· सेला सुरंग 13,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी बाइलेन सड़क सुरंग होगी

· तवांग, अरुणाचल प्रदेश के लिए हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करना उद्देश्य

· पूर्वोत्तर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद मिलेगी

निर्माणाधीन सेला सुरंग के एस्केप ट्यूब का अंतिम विस्फोट दिनांक 22 जुलाई, 2021 को महानिदेशक सीमा सड़क (डीजीबीआर) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी द्वारा नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस आयोजन को एडीजीबीआर (पूर्व) श्री पीकेएच सिंह की अध्यक्षता वाली सीमा सड़क संगठन की टीम के इस निर्माण में लगे विभिन्न नुमाइंदों- प्रोजेक्ट वर्तक के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर हरीश कुमार और 42 टास्क फोर्स तथा पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रतिनिधियों- द्वारा देखा गया। इस सफलता से दो ट्यूबों- यानी 1,555 मीटर की एक टू-वे ट्यूब और 980 मीटर की एस्केप ट्यूब, और इसके अलावा 8.8 किलोमीटर का एप्रोच रोड- में एक साथ गतिविधियों को शुरू करके सेला सुरंग को तेजी से पूरा करने में सुविधा होगी।

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डीजीबीआर ने जनवरी 2021 में सेना दिवस पर अपनी यात्रा के दौरान एस्केप ट्यूब का पहला विस्फोट शुरू किया था। यह ट्यूब पहले ही 425 मीटर खुदाई को पार कर चुकी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिनांक 09 फरवरी, 2019 को बालीपारा- चारदुआर-तवांग रोड के माध्यम से तवांग, अरुणाचल प्रदेश को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए सेला सुरंग की आधारशिला रखी थी। सुरंग का निर्माण दिनांक 01 अप्रैल, 2019 को शुरू हुआ था, जिसमें पहला विस्फोट 31 अक्टूबर, 2019 को किया गया था। सेला सुरंग की खुदाई का कामकाज तेजी से हुआ है, इसके परिणामस्वरूप निर्धारित समय से 20 महीने पहले दिनांक 22 जुलाई को 15,55 मीटर सुरंग की एस्केप ट्यूब तोड़ पाने में सफलता मिली है। कोविड-19 प्रतिबंधों और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बावजूद, पिछले 6-10 महीनों में कामकाज की गति में बढ़ोतरी हुई है।

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पूरा होने पर, सेला सुरंग 13,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी बाइलेन सड़क सुरंग होगी। नवीनतम न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके निर्मित यह अनूठी सुरंग स्नो लाइन से बहुत नीचे है, जिससे बर्फ की निकासी के बग़ैर हर मौसम में यात्रा की सुगमता प्राप्त होती है। सेला सुरंग तवांग के लोगों के लिए वरदान साबित होगी क्योंकि यह यात्रा के समय को कम करेगी और सेला दर्रे के पार तेजी से आवाजाही सुनिश्चित करेगी। यह न केवल अरुणाचल प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम की स्थितियों में, यह कार्मिकों को निकालने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

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