आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय

जल आपूर्ति की सार्वभौमिक कवरेज के लिए जल जीवन मिशन (शहरी)

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 अगले पांच वर्षों के लिए घोषित

हरित और स्वच्छ शहरी परिवर्तनीयता को बढ़ावा

कई शहरों में मेट्रोलाइट और मेट्रोनियो प्रणाली की तैयारी

वहनीय सस्ते किराये की आवासीय परियोजनाओं पर 100 फीसदी की आयकर छूट

Posted On: 02 FEB 2021 3:48PM by PIB Delhi

केंद्रीय बजट 2021-22 – आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय

अपने बजट के दौरान माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने जल जीवन  मिशन (शहरी) की घोषणा की। इसे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी)-6 के साथ सभी 4,378 वैधानिक शहरों में क्रियाशील नलों के माध्यम से सभी घरों में जल आपूर्ति का सार्वभौमिक कवरेज प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा 500 अमृत (अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन) शहरों में सीवरेज/सेप्टेज प्रबंधन के कवरेज प्रदान करने पर भी यह केंद्रित है।  वहीं वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 को “स्वास्थ्य एवं सेहत” के तहत शुरू किया जाएगा। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि शहरी गतिशीलता में सुधार और जीने में आसानी को लेकर संगठित शहरी बस सेवा को मजबूत करने के लिए पहाड़ी/यूटी/उत्तर पूर्वी राज्य की राजधानियों (कुल – 111) सहित पांच लाख से अधिक शहरों में 20,000 से ज्यादा सिटी बसों को लगाने की एक योजना है। 

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय से संबंधित घोषणाओं का विवरण निम्नलिखित हैं :-

जल जीवन मिशन (शहरी)

  • जेजेएम (यू) के तहत प्रस्तावित शहरी घरेलू नल कनेक्शनों में 2.68 करोड़ का अनुमानित अंतर है। इसी तरह 500 अमृत शहरों में जेजेएम (यू) के तहत प्रस्तावित सीवर कनेक्शनों/सेप्टेज में 2.64 करोड़ का अनुमानित अंतर है।  
  • सतत ताजे जल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए जल निकायों का नवीकरण और बाढ़ों के कम करके एवं एक शहरी जलभर प्रबंधन योजना के माध्यम से सुविधा मूल्य बढाने के लिए हरित स्थानों एवं स्पंज शहरों का निर्माण इस मिशन के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं।
  • जेजेएम(यू) जल निकायों एवं जल संरक्षण संबंधित उपचारित सीवेज के पुनर्चक्रण/पुन: उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने वाले प्रत्येक शहर के लिए शहर जल संतुलन योजना के विकास के माध्यम से जल की चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। वहीं संस्थागत तंत्र के विकास के साथ फिर से उपयोग किए जाने वाले पानी से जल की 20 फीसदी मांग को पूरा करेगा।
  • जल के क्षेत्र में नवीनतम वैश्विक प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने को लेकर जल के लिए एक प्रौद्योगिकी उप-मिशन का प्रस्तावित है। 
  • जल संरक्षण को लेकर आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान प्रस्तावित है।
  • शहरों में पेय जल सर्वेक्षण का संचालन किया जाएगा। इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के माध्यम से शहरों में जल के समान वितरण, अपशिष्ट जल का फिर से उपयोग और मात्रा एवं गुणवत्ता के साथ जल निकायों के मानचित्रण को सुनिश्चित किया जाएगा।
  • शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत बनाने और शहरों की जल सुरक्षा पर ध्यान देना इस मिशन का एक सुधार एजेंडा है। इन प्रमुख सुधारों में गैर-राजस्व जल को 20 फीसदी से कम करना, उपचारित उपयोग किए जल के पुनर्चक्रण से शहर की कुल जल मांग का कम से कम 20 फीसदी और राज्य स्तर पर औद्योगिक जल की मांग का 40 फीसदी पूरा करना शामिल हैं। इसके अलावा दोहरी पाइपलाइन प्रणाली, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग प्वाइंट्स, नई इमारतों में वाई-फाई संबंधी बुनियादी ढांचा, पर्याप्त शहरी नियोजन के माध्यम से भूमि मूल्य एवं उपयोग दक्षता में सुधार, शहरों में जीआईएस आधारित मास्टर प्लान, नगरपालिका बॉन्ड जारी कर धन जुटाना और जल निकायों के नवीकरण भी शामिल हैं।         

मिशन की प्रमुख विशेषताएं

  • जेजेएम(यू) के लिए प्रस्तावित कुल परिव्यय 2,87,000 करोड़ रुपये है। इसमें अमृत मिशन को वित्तीय सहायता जारी रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये शामिल है।
  • सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने कुल परियोजना निधि आवंटन में न्यूनतम 10 फीसदी पीपीपी परियोजनों को शामिल करें
  • केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह 100 फीसदी और उत्तर-पूर्वी एवं पहाड़ी राज्यों की परियोजनाओं के लिए यह 90 फीसदी केंद्रीय वित्त पोषित होगा। वहीं एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 50 फीसदी और जिनकी आबादी एक लाख से 10 लाख के बीच है, उनके लिए एक-तिहाई केंद्रीय वित्त पोषण होगा। इनके अलावा 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की परियोजनाओं के लिए केंद्रीय निधि से 25 फीसदी आवंटित होगा।
  • मिशन की निगरानी एक प्रौद्योगिकी आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी, जिस पर प्रगति और आउटपुट-आउटकम के साथ लाभार्थी प्रतिक्रिया की निगरानी की जाएगी।
  • सरकार की ओर से परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण तीन किस्तों- 20:40:40 में होगी। इनमें तीसरी किस्त परिणाम प्राप्त करने के बाद होगी। वहीं वित्त पोषण के दौरान विश्वसनीय अपवर्जन का उपयोग किया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0

अपने बजट भाषण के दौरान माननीय वित्त मंत्री ने घोषणा की कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 को “स्वास्थ्य एवं सेहत” के तहत शुरू किया जाएगा। अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा, “...शहरी भारत की और अधिक स्वच्छता के लिए, हम पूर्ण मल अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट जल उपचार, कचरे के स्रोत के अलगाव, एकल उपयोग वाले प्लास्टिक को कम करना, निर्माण और ढहाने की गतिविधियों से उत्पन्न कचरे को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करके वायु प्रदूषण में कमी और सभी पुराने कचरे के स्थानों का जैव-उपचार पर ध्यान केंद्रित करने का संकल्प रखते हैं।”   

एसबीएम (यू) 2.0 को लेकर अगले पांच वर्षों के लिए कुल परिव्यय 1,41,678 करोड़ रुपये की घोषणा की गई। यह सभी वैधानिक शहरों में वित्त पोषण और कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित घटकों के साथ स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की निरंतरता होगी.     

  • सतत स्वच्छता (शौचालय का निर्माण)
  • एक लाख से कम आबादी वाले सभी यूएलबी में मल कीचड़ प्रबंधन सहित अपशिष्ट जल उपचार (यह एसबीएम-यू 2.0 में जोड़े गए नए घटक हैं)
  • ठोस कचरा प्रबंधन
  • सूचना, शिक्षा एवं संचार, और
  • क्षमता निर्माण

मिशन के अंत में, निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होने की उम्मीद है :

  • सभी वैधानिक शहर ओडीएफ+ प्रमाणित हो जाएंगे
  • एक लाख से कम आबादी वाले सभी वैधानिक शहर ओडीएफ++ प्रमाणित हो जाएंगे
  • एक लाख से कम आबादी वाले सभी वैधानिक शहरों के 50 फीसदी हिस्से जल+ प्रमाणित हो जाएंगे
  • सभी वैधानिक शहर कम से कम 3-स्टार कचरा मुक्त होंगे और कचरा मुक्त शहरों के लिए मंत्रालय के स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल के अनुसार मूल्यांकन किया जाएगा।
  • सभी कचरे के स्थानों का जैव-उपचार किया जाएगा

सिटी बसों और शहरी हरित गतिशीलता को बढ़ाने की योजना

सिटी बसों की संख्या में वृद्धि

शहरी गतिशीलता में सुधार और जीने में आसानी को लेकर संगठित शहरी बस सेवा को मजबूत करने के लिए पहाड़ी/यूटी/उत्तर पूर्वी राज्य की राजधानियों (कुल – 111) सहित पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 20,000 से ज्यादा सिटी बसों को लगाने की एक योजना है। योजना के घटकों में शहर में संचालन के लिए स्वच्छ ईंधन के साथ सभी प्रकार की नई बसों (भारी उद्योग विभाग की फेम योजना के तहत पहले से शामिल हाइब्रिड/बैटरी इलेक्ट्रिक बसों को छोड़कर) की खरीद, संबंधित बुनियादी ढांचा और खरीद के बाद पांच साल तक की अवधि के लिए समर्थन शामिल हैं। इस योजना के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है। यह ऑटोमोबाइल उद्योगों को बढ़ावा देगा, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा और कोविड-19 दिशानिर्देशों के बीच शहरों को शहरी परिवहन में सामाजिक दूरी के पालन करने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा यह योजना सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देगी और भीड़, प्रदूषण एवं दुर्घटनाओं को कम करने के साथ इन शहरों में स्वच्छ हवा की बढ़ोतरी होगी।

 

हरित शहरी गतिशीलता

यह योजना हरित और स्वच्छ शहरी गतिशीलता परियोजनाओं का गति प्रदान करने का संकल्प रखती है। यह जलवायु परिवर्तन को कम करने और टिकाऊ लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। इस योजना का ध्यान नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट (एनएमटी) संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार, शहरी परिवहन के प्रकारों में नवाचार को बढ़ावा देना, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) की सुविधा को मजबूती देना, ऊर्जा दक्षता/स्वच्छ ईंधन के लिए रेट्रोफिटिंग बसें एवं अन्य प्रकार और हरित शहरी परिवहन के लिए दूसरी तकनीकी एवं नवाचार उपायों के लिए है। इस योजना के तहत परियोजनाओं के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है। इन परियोजनाओं को हरित शहरी गतिशीलता प्रतिस्पर्धा के जरिए चुना जाएगा। यह योजना यात्रा करने के तरीकों में परिवर्तन लाकर, शहरी गतिशीलता संबंधित बुनियादी ढांचे और पैदल यात्री/साइकिल मार्गों जैसी सेवाओं में सुधार, अंतिम स्थान तक कनेक्टिविटी, सूचना प्रौद्योगिकी एप्लीकेशनों को बढ़ावा और शहरी गतिशीलता परियोजनाओं के कार्यान्वयन एवं वित्त पोषण में नवाचारों को अपनाने में सहायता करेगा।

मेट्रो परियोजनाएं

परियोजना का नाम

गलियारों की संख्या

मार्ग की लंबाई

स्वीकृत लागत (करोड़ रुपये में)

चेन्नई चरण-2

3

118.9

63,246

बेंगलुरू 2ए और 2बी

2

58.19

14,788

नागपुर चरण-2

4

43.80

6,707

नासिक मेट्रोनियो

2

33

2,092

कोच्चि चरण-2

1

11.2

1,957

 

स्तर 2/3 के शहरों के लिए कम लागत वाली मेट्रो समाधान

मेट्रोलाइट

  • पारंपरिक मेट्रो प्रणाली की 40 फीसदी लागत।
  • 15,000 तक पीक ऑवर पीक डायरेक्शन ट्रैफिक

मेट्रो नियो

      • रबड़ की टायर वाली मेट्रो
      • 8,000 तक पीक ऑवर पीक डायरेक्शन ट्रैफिक और
      • पारंपरिक मेट्रो प्रणाली की 25 फीसदी लागत।

जिन शहरों को मेट्रोलाइट और मेट्रोनियो प्रणाली प्रदान किया जाना है

स्तर-2 के कुछ शहरों जैसे; गोरखपुर, इलाहाबाद, जम्मू, श्रीनगर, राजकोट, बड़ौदा, देहरादून, कोयम्बटूर और भिवंडी-धारूहेड़ा आदि मेट्रोलाइट/मेट्रोनियो के तहत प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। वहीं नासिक ने पहले ही मेट्रोनियो के लिए अपना प्रस्ताव भेज दिया है, जो विचाराधीन है।

 

रियल एस्टेट क्षेत्र

  1. वहनीय आवास परियोजना के लिए आयकर छूट का विस्तार : माननीय प्रधानमंत्री की “सभी के लिए आवास” की विजन के अनुरूप, आयकर अधिनियम की धारा 80-आईबीए के तहत वहनीय आवास परियोजनाओं से प्राप्त लाभ पर आयकर से 100 फीसदी छूट का लाभ एक और वर्ष यानी 31 मार्च, 2022 तक बढ़ाया जाना प्रस्तावित है।
  2. गृह ऋण ब्याज पर 1.5 लाख रूपये की अतिरिक्त छूट में विस्तार :  

वहनीय आवास प्रदान करने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 80ईईए के तहत गृह ऋण पर ब्याज भुगतान करने वाले घर के खरीदारों को 1.5 लाख रूपये की अतिरिक्त छूट (आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत दो लाख रूपये से अधिक) को एक और साल के लिए यानी 31 मार्च, 2022 तक बढ़ाया जाना प्रस्तावित है। 

  1. रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (आरईआईटी) को बढ़ावा देने के लिए आरईआईटी धारकों को लाभांश भुगतानों के लिए स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) को छूट देने का प्रस्ताव किया गया है।

 

सभी के लिए आवास

सरकार ने वहनीय किराये की आवास परियोजनाओं के लिए आयकर में 100 फीसदी छूट को प्रस्तावित किया है।

केंद्रीय बजट भाषण 2021-22 का अंश :

 

वहनीय किराये की आवासीय परियोजना के विकास और निर्माण के व्यवसाय से प्राप्त लाभ और लाभ की कटौती में 100 फीसदी छूट देने के लिए उक्त धारा में उप-धारा (1ए) जोड़ना प्रस्तावित है।

सार्वजनिक और निजी संस्थाओं से सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार के माध्यम से निम्नलिखित प्रोत्साहन दिए गए हैं :

क्रम संख्या

प्रोत्साहन

स्थिति

1

आयकर अधिनियम-1961 की धारा- 80 आईबीए के तहत ‘वहनीय आवास’ के समान एआरएचसी के संचालन से प्राप्त किसी भी लाभ और लाभांश पर आयकर छूट

बजट 2021-22 में घोषित

2

28 जून, 2017 को जारी केंद्रीय कर (दर) 2017 की अधिसूचना संख्या – 12 के माध्यम से आवासीय परिसर की किराये की सेवाओं एआरएचसी के संचालन से प्राप्त किसी भी लाभ और लाभांश पर जीएसटी की छूट

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा पूर्व में स्वीकृत (5 जून, 2020 को इस बारे में पत्र जारी किया गया था)

3

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) द्वारा वहनीय आवास कोष (एएचएफ) के तहत रियायती खिड़की के माध्यम से और ‘वहनीय आवास’ की इसी दिशा में हार्मोनाइज्ड मास्टर लिस्ट (एचएमएल) में शामिल करने पर व्यावसायिक बैंकों द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) पर   कम ब्याज दर पर परियोजना वित्त ऋण

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा पूर्व में स्वीकृत (24 अगस्त, 2020 को इस बारे में अधिसूचना जारी की गई)

 

पृष्ठभूमि:

कोविड-19 महामारी की वजह से देश में श्रमिकों/शहरी गरीबों के विपरीत प्रवास हुआ है। इसने आवास के मुद्दों को सबसे आगे कर दिया। माननीय प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के स्पष्ट आह्वाहन के अनुरूप, आठ जुलाई, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएमएवाई-यू के तहत एक उप-योजना के रूप में वहनीय किराये की आवासीय परिसरों (एआरएचसी) को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य शहरी प्रवासियों/गरीबों को वहनीय किराये में उनके कार्यस्थल के नजदीक जरूरी नागरिक सुविधाओं सहित आसानी से गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है। 

यह योजना निम्नलिखित दो मॉडलों के माध्यम से कार्यान्वित की गई है :

  • मॉडल-1 : शहर में मौजूदा सरकारी वित्त पोषित खाली घरों को सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत या सार्वजनिक एजेंसियों द्वारा इन्हें एआरएचसी में परिवर्तित कर उपयोग करना।
  • मॉडल-2 : निजी/सार्वजनिक संस्थाओं को अपनी स्वयं की उपलब्ध खाली भूमि पर इनके निर्माण, संचालन और देख-भाल के लिए प्रोत्साहन देना।

बजट की मुख्य बातें

[वित्त शाखा]

1.) वर्ष 2021-22 के लिए कुल 54,581 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। यह बजट वर्ष 2020-21 में आवंटित 50,039 करोड़ रूपये से 9 फीसदी अधिक है।

2.) वर्ष 2021-22 के लिए आवंटित बजट 2020-21 के संशोधित अनुमानों 46,790 करोड़ रुपये से 16.52 फीसदी अधिक है।

3.) वर्ष 2021-22 के लिए कुल बजट आवंटन 54,581 रुपये में कुल पूंजीगत परिव्यय 25,759 करोड़ रुपये है, जो 2020-21 में आवंटित 21,149 करोड़ रुपये से 21.8 फीसदी अधिक है।

4.) इसके अलावा वर्ष 2021-22 के दौरान अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (ईबीआर) तंत्र के माध्यम से पीएमएवाई(यू) के तहत बकाया 7,000 करोड़ रूपये भी आवंटित किए जाने हैं। इस तरह 2021-22 के दौरान कुल बजट उपलब्धता 61581 करोड़ रुपये (54,581 करोड़ रुपये + 7,000 करोड़ रुपये) है। 

 

शहरी स्थानीय निकायों को अनुदान के लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें (वित्तीय वर्ष 2021-22 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक)

मुख्य बातें :

1. निधियों में 1,55,628 करोड़ रुपये की मूल वृद्धि (14 वें वित्त आयोग की अवधि में यह आंकड़ा 87,143 करोड़ रुपये था, 78 फीसदी की वृद्धि)

  • यूएलबी कुल अनुदान 1,55,628 करोड़ रुपये के पात्र होंगे
  • इनमें से 1,21,055 करोड़ रुपये सीधे यूएलबी को आवंटित किए गए हैं
    • 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों/शहरी समुदायों के लिए प्रदर्शन आधारित अनुदान (मिलियन प्लस सिटीज चैलेंज फंड) के तहत 38,196 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें से 12,139 करोड़ रुपये वायु गुणवत्ता में व्यापक सुधार के लिए और 26,057 करोड़ रुपये पेय जल, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आवंटित है। यह प्रदर्शन आधारित अनुदान है और संबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन की उपलब्धि के आधार पर इसे जारी किया जाएगा।
    • 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों/यूएलबी के लिए बुनियादी अनुदान 82,859 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं (बंधा हुआ अनुदान 30 फीसदी यानी 24,858 करोड़ रुपये पेय जल, वर्षा जल संवर्धन और जल पुनर्चक्रण के लिए एवं 30 फीसदी यानी 24,858 करोड़ रुपये ठोस कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए है। बाकी 33,143 करोड़ रुपये खुला अनुदान है)  
  • उपरोक्त के अतिरिक्त, निम्नलिखित अनुदानों की भी सिफारिश की गई है :
  • आठ नए शहरों के उद्भवन के लिए 8,000 करोड़ रुपये आवंटित (प्रतियोगिता के माध्यम से शहरों का चयन किया जाएगा। आठ राज्यों को योग्यता प्राप्त करने के लिए, मंत्रालय विस्तृत दिशानिर्देश के साथ आने की तैयारी में, प्रत्येक शहर के लिए 1,000 करोड़ रुपये)
    • साझा नगरपालिक सेवा केंद्रों के लिए 450 करोड़ रुपये आवंटित (शहरी क्षेत्रों में नागरिको को दी जाने वाली सेवाओं में सुधार के लिए)
    • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए 26,123 करोड़ रुपये आवंटित (यह अनुदान स्थानीय सरकारों के माध्यम से प्रदान किया जाएगा।)

2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम (सीएए) 1992 के बाद पहली बार महानगर प्रशासन को मुख्यधारा में लाने के प्रयास

  • 15 करोड़ की आबादी के साथ 50 मिलियन प्लस यूए के लिए 38,196 करोड़ रुपये आवंटित (भारत की कुल शहरी आबादी का 40 फीसदी), वायु गुणवत्ता और स्वच्छता पर केंद्रित

3. किसी भी अनुदान का लाभ उठाने को लेकर प्रत्येक नगरपालिका के लिए दो बड़ी प्रवेश शर्तें लागू हैं

  • ऑनलाइन उपलब्ध लेखा परीक्षित और लेखा परीक्षित नहीं किए गए वार्षिक खाते
  • संपत्ति कर के लिए फ्लोर रेट को अधिसूचित करना, राज्य जीएसडीपी के अनुरूप संग्रह में लगातार सुधार करना

4 अनुदान प्राप्त करने की शर्तें:

  • 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर : प्रदर्शन आधारित अनुदान। जल आपूर्ति, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन में सेवा स्तर संकेतकों के समुच्चय पर शहरों के प्रदर्शन के अनुरूप अनुरूप अनुदान जारी किया जाएगा। यह अंतरिम रिपोर्ट से अपरिवर्तित है।
  • 10 लाख से कम आबादी वाले शहर : केवल बुनियादी अनुदान। प्रवेश की दो शर्तें हैं। शहरें/यूएलबी को ऑडिट किए गए खातों को प्रकाशित करना होगा, संपत्ति कर के लिए फ्लोर रेट निर्धारित करना होगा और यह प्रदर्शित करना होगा कि संपत्ति कर संग्रह में सुधार जीएसडीपी के अनुरूप है। हालांकि पहले दो वर्षों के लिए इनमें ढील दी गई है। इसके बावजूद अगर 25 फीसदी यूएलबी भी वार्षिक खाते प्रकाशित करते हों तो राज्य में सभी यूएलबी को अनुदान प्राप्त होंगे। वर्ष 2022-23 में अनुदान प्राप्त करने के लिए राज्य को संपत्ति कर फ्लोर रेट निर्धारित करना है।   

5. राज्य वित्त आयोगों (एसएफसी) को मजबूत करने के लिए राज्यों को मार्च, 2024 तक की समय सीमा

  • अगर एसएफसी का गठन नहीं किया जाता है तो आगे कोई और अनुदान जारी नहीं किया जाएगा और मार्च, 2024 तक राज्यों की विधानसभा में उनकी सिफारिशों एवं कार्रवाई की रिपोर्ट पेश रखी जाएगी। (यह भविष्य में स्थानीय सरकारों को मजबूत करेगी)

6. सभी 28 सेवा स्तर के मानकों एवं वार्षिक खातों को www.cityfinance.in पर प्रकाशित किया जाएगा (यह सेवा वितरण और प्रदर्शन प्रबंधन को आगे बढ़ाएगा)

15वें वित्त आयोग द्वारा मंत्रालय की स्वीकृत सिफारिशें :

  • कोविड-19 के खिलाफ उपाय : सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे के लिए यूएलबी को अलग से अनुदान आवंटित किया जा सकता है- अनौपचारिक बसावटों एवं कम आय वाले इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल क्लिनिक
  • शहरी सुधारों की निरंतरता : नियोजित शहरीकरण, खातों की ऑडिटिंग, सेवा स्तर के मानकों और वित्तीय स्थिरता को जारी रखा जाएगा।
  • 86 शहर समूहों (3,331 शहरों) में वित्तीय स्थिरता के लिए नगर निगम की साझा सेवाओं द्वारा उत्प्रेरक हस्तक्षेप
  • शहरी नगर निकायों के आवंटन में 87,143 करोड़ रुपये से 3,48,575 करोड़ रुपये तक की वृद्धि (15वे वित्त आयोग ने 1,55,623 करोड़ रुपये आवंटित किए)

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एमजी/एएम/एचकेपी



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