पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय

डॉ. हर्ष वर्धन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लेह में मौसम विज्ञान केन्द्र का उद्घाटन किया

3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लेह मौसम विज्ञान केन्द्र भारत में सबसे ऊँचाई पर स्थित मौसम विज्ञान केन्द्र होगा

डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा 'इस केन्द्र में अधिक ऊँचाई वाले मौसम की जानकारी देने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी और लेह प्रशासन तथा वहां के लोगों की मौसम और जलवायु संबंधी विभिन्न ज़रूरतों को पूरा करेगा

ये केन्द्र नुब्रा, चांगथांग, पैंगोंग झील, झंस्कार, करगिल, द्रास, धा-बैमा (आर्यन घाटी), खलसी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के मौसम के पूर्वानुमान की सुविधा प्रदान करेगा

Posted On: 29 DEC 2020 6:25PM by PIB Delhi

केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज नई दिल्ली में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लेह (लद्दाख) स्थित मौसम विज्ञान केन्द्र का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में आभासी माध्यम से लद्दाख के उपराज्यपाल श्री राधा कृष्ण माथुर और लद्दाख के सांसद श्री जामयांग सिरिंग नामग्याल भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम राजीवन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. विपिन चन्द्र, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिक-एफ श्री गोपाल अय्यंगर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्रीय मंत्री ने लेह में मौसम संबंधी सुविधाओं को स्थापित करने में पूरा सहयोग और सक्रिय भागीदारी निभाने के किए लद्दाख प्रशासन का आभार जताया। साथ ही लद्दाख के उपराज्यपाल श्री राधा कृष्ण माथुर और लद्दाख के सांसद श्री जामयांग सिरिंग नामग्याल ने लेह में मौसम विज्ञान केन्द्र स्थापित करने के लिए केन्द्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

लेह में मौसम विज्ञान केन्द्र की आवश्यकता के बारे में अपने विचार रखते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा लद्दाख क्षेत्र में ऊंचे ढलान वाले पहाड़ हैं। यहां कोई वनस्पति नहीं है। ढीली मिट्टी तथा मलबा इस क्षेत्र को बादल फटने (2010 में यहां बादल फटा था), बाढ़, हिमस्खलन और ग्लेशियर पिघलने से नदी एवं झीलों में अनियंत्रित पानी आ जाना जैसे विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक खतरों के लिहाज़ से काफी असुरक्षित और ख़तरनाक बनाते हैं। भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले को नुकसान को रोकने के लिए सरकार को वर्ष 2020 में लेह में एक मौसम विज्ञान केन्द्र स्थापित करने की ज़रूरत महसूस हुई। इस केन्द्र की स्थापना लद्दाख क्षेत्र में मौसम संबंधी कोई भी सूचना अथवा चेतावनी को समय से पूर्व लोगों तक पहुंचाने की प्रणाली को मज़बूत करने के उद्देश्य से की गई। उन्होंने कहा कि 3500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित लेह का ये मौसम विज्ञान केन्द्र, भारत के सबसे ऊँचाई पर स्थित मौसम विज्ञान केन्द्र के रूप में एक नया इतिहास रच रहा है।

उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों और वहां के प्रशासन की मदद करने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग लद्दाख के दोनों ज़िलों (लेह और करगिल) के सभी हितधारकों के लिए दैनिक आधार पर मौसम का पूर्वानुमान बताएगा। मौसम का पूर्वानुमान लघु अवधि (3 दिन) और मध्यम अवधि (12 दिन) से लेकर एक महीने तक कि अवधि के आधार पर बताया जाएगा। डॉ. हर्ष वर्धन ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग जिलास्तरीय पूर्वानुमान के अलावा नुब्रा, चांगथांग, पैंगोंग झील, झंस्कार, करगिल, द्रास, धा-बैमा (आर्यन घाटी), खलसी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थालों के मौसम का पूर्वानुमान भी बताएगा। इस केन्द्र में उपलब्ध कराई जाने वाली कुछ प्रमुख सेवाओं में राजमार्ग पूर्वानुमान, पर्वतारोहण पूर्वानुमान, ट्रेकिंग, कृषि, अचानक से आने वाली बाढ़ की चेतावनी, न्यूनतम और अधिकतम तापमान जैसी सेवाएं शामिल हैं।

डॉ. हर्ष वर्धन ने आश्वासन दिया कि सरकार लद्दाख के लोगों और वहां के प्रशासन को उच्चतम स्तर की संभावित मौसम सेवाएं प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और लद्दाख को मौसम के प्रकोप से बचाने और सुरक्षित रखने का काम करेगी। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि "इस केन्द्र में अधिक ऊंचाई वाले क्षत्रों के मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी और यह केन्द्र लद्दाख प्रशासन और वहां के लोगों की मौसम और जलवायु संबंधी विभिन्न ज़रूरतों को पूरा करेगा।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा कि रैंकिंग के मामले में भारत का पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय विशेषरूप से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग दुनियाभर के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में सबसे ऊपर है। ये सुनामी जैसे तूफान की समय से पूर्व चेतावनी और सटीक मौसम पूर्वानुमान जैसे विभिन्न मोर्चे पर श्रेष्ठ है। करीब 4 करोड़ किसानों को मोबाइल पर संदेश के जरिये मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी दी जाती है, जिससे किसानों को अपनी खेती से जुड़ी योजनाएं बनाने में मदद मिलती है।

इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल श्री राधा कृष्ण माथुर ने लद्दाख क्षेत्र में जलवायु विविधता को ध्यान में रखते हुए सूक्ष्म-जलवायु पूर्वानुमान की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी के महत्व और सभी हितधारकों के लिए एक मौसम संबंधी एप को विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम राजीवन ने कहा कि लद्दाख क्षेत्र अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, खान-पान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने कूटनीतिक महत्व जैसी कई वजहों से हमारे लिए काफी प्रिय है। उन्होंने आश्वासन दिया की पृथ्वी एवं विज्ञान मंत्रालय भारतीय मौसम विज्ञान विभाग को लद्दाख में विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के किए सभी ज़रूरी तकनीकी तथा प्रशासनिक सहयोग देगा।

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