विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

डॉ. हर्ष वर्धन ने आईआईटी दिल्ली, उन्नत भारत अभियान, विजनन भारती और सीएसआईआर के संयुक्त पहल के तहत ग्रामीण विकास के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों का उद्घाटन किया

सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस ने अपना 40वां स्थापना दिवस मनाया

"विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उचित हस्तक्षेप विकास की प्रक्रिया में स्वाभाविक न्याय और समानता लाने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकता है" : डॉ. हर्षवर्धन

"हम जिन विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उसके लिए कई स्तरों पर काम करने की जरूरत है, हमें अभियानों के लिए विभिन्न भागीदारों से नए दृष्टिकोण की तलाश और उन्हें नए सिरे से गढ़ने की ज़रूरत है": डॉ. हर्षवर्धन

इस मौके पर सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस ई-कंपेंडियम और ई-कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया

Posted On: 30 SEP 2020 7:36PM by PIB Delhi

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), उन्नत भारत अभियान (यूबीए), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली(आईआईटीडी) और विजनन भारती (विभा) की संयुक्त पहल के तहत ग्रामीण विकास के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों का उद्घाटन किया।

यह कार्यक्रम सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस के 40वें स्थापना दिवस के मौके पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित किया गया। इस मौके पर इन प्रौद्योगिकियों को जारी किया गया:

  1. गुणवत्ता और स्वच्छ तरीके से शहद निकालने के लिए मधुमक्खी के उन्नत छत्ते, सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर
  2. अदरक पेस्ट (अवलेह) बनाने की तकनीकी, सीएसआईआर-सीएफटीआरआई, मैसूर
  3. खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए डीह्यूमीफ़ाइड ड्रायर, सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम और
  4. कृषि अपशिष्ट (गेहूं का चोकर, गन्ना बैगास और फलों के छिलके) आधारित जैव-अपक्षरणीय (बायोडिग्रेडेबल) प्लेट, कप और कटलरीज बनाने की तकनीकी, सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम

इस अवसर पर मंत्री ने सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस ई-कंपेंडियम और ई-कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया।

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डॉ. शेखर सी मांडे (डीजी-सीएसआईआर, सचिव, डीएसआईआर, भारत सरकार), पद्म भूषण श्री विजय पी. भाटकर (अध्यक्ष-राष्ट्रीय संचालन समिति, यूबीए), प्रो. राम गोपाल राव (निदेशक, आआईआई दिल्ली, प्रो. वीरेंद्र के. विजय (राष्ट्रीय संयोजक, यूबीए) और डॉ. रंजना अग्रवाल (निदेशक, सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस) वक्ताओं में शामिल रहीं, जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों और ग्रामीण विकास के बीच बेहतर साझेदारी लाने पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में सीएसआईआर की ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को समाज तक पहुंचाने के मकसद से सुप्रसिद्ध गणमान्य व्यक्तियों, विज्ञान विशेषज्ञों, क्षेत्र विशेषज्ञों, सभी क्षेत्रीय समन्वय संस्थानों, यूबीए के सहभागी संस्थानों, गैर-लाभकारी संगठनों, यूबीए के स्वयंसेवकों, गोद लिए गए गांवों के ग्रामीणों और किसानों समेत विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया।

कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में, खास तौर पर उन लोगों के लिए जो लॉकडाउन में अपने पैतृक गांव लौट आए थे, आजीविका के अवसर पैदा करने की त्वरित कार्ययोजना को बनाने पर संयुक्त रूप से काम करने के लिए 28 जुलाई, 2020 को सीएसआईआर में इससे जुड़े एक त्रिपक्षीय समझौता-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

सीएसआईआर ने बीते वर्षों में कई उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को विकसित किया है, जिन्हें विकास और आजीविका पैदा करने और सतत विकास लक्ष्यों को पाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया जा सकता है। अब इन प्रौद्योगिकियों को अब यूबीए के हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशनल नेटवर्क और विभा के स्थानीय चैप्टर्स के जरिए समाज के बीच पहुंचाया जाएगा। सीएसआईआर- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज (सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस) अभी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, यूबीए, विभा और साझेदारों को संबद्ध करने वाले एक नोडल सीएसआईआर लैब की तरह काम कर रहा है।

अपने मुख्य भाषण में डॉ. हर्ष वर्धन ने सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस को उसके 40वें स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा, “वे (सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस) विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के बीच इंटरफेस (जुड़ाव) की खोज में लगातार लगे हुए हैं और सीएसआईआर व राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान नीति शोध में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे कहा, “विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उचित हस्तक्षेप विकास की प्रक्रिया में स्वाभाविक न्याय और बराबरी लाने में महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकता है।

डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि "कॉरपोरेट्स, रिसर्च एजेंसियों, लघु मध्यम और कुटीर स्तर के उद्यमियों के साथ काम करने वाले संगठनों, स्वैच्छिक सामाजिक संगठनों, एनजीओ और सामाजिक रूप से सजग नागरिकों को लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए एक साझा मंच पर आने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, हमें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उनमें कई स्तर पर कदम उठाने की जरूरत होगी, और हमें विभिन्न साझेदारों से अभियानों (एक्शंस) के लिए नवाचारयुक्त दृष्टिकोणों की तलाश और उन्हें नए सिरे से खोजने की ज़रूरत है, जिनमें न केवल सरकारी एजेंसियां, बल्कि स्वयंसेवी सामाजिक संगठन, एनजीओ, कॉरपोरेट्, उद्यमी, शिक्षाविद और वैज्ञानिक भी शामिल हैं और रचनात्मक रूप से इन प्रयासों के पूरक हैं।

उन्होंने बताया कि "उन्नत भारत अभियान" शिक्षा मंत्रालय का एक प्लैगशिप (प्रमुख) कार्यक्रम है, जिसे एक समावेशी भारत का ढांचा बनाने में मदद करने के लिए ज्ञान आधारित संस्थाओं को शामिल करते हुए ग्रामीण विकास प्रक्रियाओं में परिवर्तनकारी बदलाव लाने की परिकल्पना के साथ आईआईटी दिल्ली में संकल्पित करने के साथ शुरू किया गया था। उन्होंने आगे कहा, उन्नत भारत अभियान ने अब तक 45 क्षेत्रीय समन्वय संस्थानों (आरसीआई) और 2,614 प्रतिभागी संस्थानों (पीआई) बनाए जा चुके हैं। उन्नत भारत अभियान के तहत अब तक कुल 13,760 गांवों को गोद लिया गया है।

डॉ. हर्ष वर्धन ने भरोसा व्यक्त किया कि ज्ञान, जमीनी स्तर पर मौजूदगी और तकनीकी तौर पर सक्षम एजेंसियां जैसे आईआईटी दिल्ली, विभा और उनकी सीएसआईआर के साथ साझेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआईआर द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को पहुंचाने में बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने नवीन वैज्ञानिक समाधानों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के बीच ज्यादा से ज्यादा तालमेल लाने की अपील की ताकि इस संयोजन का लाभ सभी व्यक्तियों, सभी गांवों तक उनके जीवन को बेहतर बनाने और देश के विकास के लिए पहुंचे।

एस एंड टी संगठनों (सीएसआईआर/डीएसटी/डीबीटी/डीआरडीओ इत्यादि), विभा और यूबीए की साझा प्रयास के तहत सीएसआईआर, यूबीए, विजनन भारती ने वैज्ञानिक हस्तक्षेप से ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए एक रूपरेखा पर मिलकर काम करने की योजना बनाई है। यह संबंधों (नेटवर्क) को मजबूत बनाने के साथ शुरू हुआ, जहां पर आर एंड डी संगठनों और संस्थानों को नोडल एजेंसियों की भूमिका निभानी है जो देश में विभिन्न समुदायों की बुनियादी जरूरतों का समाधान उपलब्ध कराते हैं।

यूबीए नोडल सेंटर्स- आरसीआई समाधान उपलब्ध कराने वाले केंद्र हैं और निर्मित क्षमता, समाधान की तलाश करने वालों (समुदाय, किसान आदि) और समाधान प्रसारकों जैसे विकास एजेंसियों, संस्थानों, एनजीओ और पंचायती राज संस्थानों को आपस में जोड़ते हैं।

सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज (एनआईएसटीएडीएस), नई दिल्ली सीएसआईआर की एक प्रमुख प्रयोगशाला है। यह विज्ञान, समाज और राज्य के अंतर संबंधों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के बीच सहसंबंध (इंटरफ़ेस) की निरंतर खोज के लिए समर्पित है।

वर्तमान में इसके संकाय में विभिन्न विषयों के उच्च योग्यता वाले संकाय सदस्य मौजूद हैं। यह बौद्धिक विविधता ही इस संस्थान का मुख्य आधार है। यह संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति अनुसंधान, खास तौर पर विकासशील देशों की चिंताओं और समस्याओं का समाधान करने, में सशक्त क्षमता रखता है। इस संस्थान की ताकत, मुख्य रूप से अंतरविषयी शोध टीम, बहुविषयी संकाय और क्षेत्र अनुसंधान (फील्ड रिसर्च) के लंबे अनुभव पर आधारित है।

विजनन भारती (विभा): स्वदेशी भावना के साथ एक विज्ञान आंदोलन खड़ा करने में विभा की प्रभावी भूमिका रही है। स्वदेशी विज्ञान आंदोलन को भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में प्रो. के. आई. वासु के मार्गदर्शन में कुछ प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने शुरू किया था। राष्ट्रीय जरूरतों के अनुकूल आधुनिक विज्ञान के साथ स्वदेशी आंदोलन –विभा के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है।

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