उप राष्ट्रपति सचिवालय

 उपराष्ट्रपति ने अलग-अलग भाषाओं की उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों का जितना संभव हो सके उतनी भाषाओं में अनुवाद का आह्वान किया;


राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में अनुवाद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगाः उपराष्ट्रपति;

भारतीय भाषाओं के विभिन्न साहित्यिक कार्यों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए कदम उठाने को कहा;

सभी राज्यों से प्राथमिक शिक्षा तक मातृभाषा को अनिवार्य बनाने का आग्रह किया;

महाकाव्य तेलुगु उपन्यास ‘वेईपादडालु’के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन किया;

विश्वनाथ साहित्य पुरस्कार एवं वेलचेला केशव राव पुरस्कार प्रदान किए

प्रविष्टि तिथि: 02 OCT 2019 6:57PM by PIB Delhi

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने अलग-अलग भाषाओं की उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों का जितना संभव हो सके उतनी भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारे जैसे देश में  राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में अनुवाद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हैदराबाद में आज कवि सम्राटविश्वनाथन सत्यनारायण द्वारा लिखित महाकाव्य तेलुगू उपन्यास वेईपादडालु के अंग्रेजी अनुवाद के विमोचन के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम दुनिया भर के पाठकों को न केवल अच्छे रचनात्मक साहित्य का आनंद लेने में सक्षम बनाएंगे बल्कि उन्हें विभिन्न संस्कृतियों और जीवन के तौर-तरीकों से भी अवगत कराएंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय भाषाओं के विभिन्न साहित्यिक कार्यों के डिजिटलीकरण एवं संरक्षण और उनके अनुवादों को बढ़ावा देने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यों के अनुवाद से पाठकों को लेखक और उसकी तत्कालीन दुनिया की परंपराओं, संस्कृति, रीति-रिवाजों, मूल्यों एवं विचारों के बारे में पता चल सकेगा।

उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में अनुवाद को बढ़ावा देने के लिए अलग विभाग स्थापित करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने सभी राज्यों से प्राथमिक शिक्षा तक मातृभाषा को अनिवार्य बनाने का भी आग्रह किया।

विश्वनाथन सत्यनारायण की प्रतिभा के बारे में बात करते हुए श्री नायडू ने कहा कि महान लेखक ने शिक्षा, परिवार, समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, संस्कृति, गरीबी और अन्य दूसरी समस्याओं को स्पष्ट दूरदर्शिता के साथ अपनी लेखनी में उजागर किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लेखक ने पढ़ने एवं शिक्षा के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर देखा और कहा कि शिक्षा के जरिये व्यक्तियों को सशक्त बनाना चाहिए और छात्रों में अच्छा व्यवहार, अनुशासन तथा क्षमता पैदा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वेईपडागालुजैसी अच्छी पुस्तकें पाठक को एक नई दुनिया में ले जाती हैं और लेखक के कथन के मुताबिक, जीवन के कई पहलुओं के बारे में उसकी समझ को समृद्ध करती हैं। श्री नायडू ने कहा कि महान कार्यों में हमेशा पाठकों के मन में अमिट छाप छोड़ने की शक्ति होती है।

समीक्षकों द्वारा सराहे गए इस उपन्यास का पूर्व प्रधानमंत्री श्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने सहस्त्र चरणके रूप में हिंदी में अनुवाद किया था।

उपराष्ट्रपति ने साहित्यिक आलोचना के लिए डॉ. सी. मृणालिनी को विश्वनाथ साहित्य पुरस्कार और द्विभाषी कविता के लिए डॉ. वैदेही शशिधर को वेलचेला केशव राव पुरस्कार भी प्रदान किया।

इस अवसर पर विश्वनाथ साहित्य पीतम के अध्यक्ष डा. वेलचेला कोंडल राव, शांता बॉयोटेक्नीक प्रा. लि. के चेयरमैन डा. के. आई. वरप्रसादा रेड्डी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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