सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए एसआरआई फंड पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की
एमएसएमई मंत्रालय ने यशस्विनी अभियान के तहत महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए विकास पूंजी जुटाने में एसआरआई फंड की भूमिका पर जोर दिया
एसआरआई फंड के माध्यम से लगभग 48,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाया गया तथा 824 एमएसएमई को सहायता प्रदान की गई
प्रविष्टि तिथि:
05 NOV 2026 1:37PM by PIB Delhi
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित यशस्विनी अभियान के अंतर्गत 4 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-3 में ‘महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) फंड पर जागरूकता कार्यशाला’ का आयोजन किया। कार्यशाला की अध्यक्षता एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री भरत खेड़ा ने की।
इस कार्यशाला में देशभर से 60 से अधिक महिला उद्यमियों ने भाग लिया। इनके अलावा, एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संघों के प्रतिनिधि, एनएसआईसी वेंचर कैपिटल फंड लिमिटेड (एनवीसीएफएल), एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड (एसवीएल), एसआरआई फंड के अंतर्गत डॉटर फंड्स, नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) तथा अटल इन्क्यूबेशन सेंटर-एलीप वुमेन एंटरप्रेन्योर्स हब के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
एमएसएमई मंत्रालय के अपर सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने एसआरआई फंड की अब तक की यात्रा और उसकी प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस फंड की परिकल्पना एमएसएमई को पारंपरिक ऋण व्यवस्था से आगे बढ़कर इक्विटी के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इसके लिए भारत सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए यह अपेक्षा की गई थी कि निजी निवेशक इससे चार गुना अधिक राशि का योगदान देंगे।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में एसआरआई फंड से निवेश प्राप्त करने वाले उद्यमों ने दो से तीन वर्षों के भीतर अपना कारोबार तीन से चार गुना तक बढ़ाया है। इन उद्यमों ने आगे चलकर निजी स्रोतों से भी अतिरिक्त पूंजी जुटाई है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित उद्योग संघों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने सदस्यों के बीच एसआरआई फंड के बारे में जागरूकता बढ़ाएं और इसकी जानकारी अधिकाधिक उद्यमियों तक पहुंचाएं।

अपने उद्घाटन संबोधन में श्री भरत खेड़ा ने बताया कि 30 अक्टूबर, 2026 को उद्यम और उद्यम सहायता पोर्टल पर पंजीकरण की संख्या 10 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है, जिससे उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था के दायरे में लाने से जुड़ी कमी को दूर करने में मदद मिली है। इनमें से 37.6 प्रतिशत उद्यम महिलाओं के स्वामित्व वाले हैं। उन्होंने कहा कि अब हमारा लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यमों के औपचारिकीकरण के साथ ही एमएसएमई को विस्तार देने में सहायता करने की मंत्रालय की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है, जिसके लिए विकास पूंजी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री खेड़ा ने बताया कि 10,000 करोड़ रुपये के कुल कोष वाले एसआरआई फंड के अंतर्गत 8,305 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं की जा चुकी हैं और निजी वेंचर कैपिटल तथा प्राइवेट इक्विटी फंडों के माध्यम से लगभग 48,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी जुटाई गई है। इस फंड के अंतर्गत 72 डॉटर फंड को सूचीबद्ध किया गया है और अब तक 824 एमएसएमई में 21,330 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। इनमें लगभग 74 प्रतिशत सूक्ष्म उद्यम हैं। सहायता प्राप्त उद्यमों में से 77 उच्च श्रेणी में पहुंच चुके हैं, छह शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हो चुके हैं और 32 उद्यमों से लाभ के साथ निवेश निकासी की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि डॉटर फंड व्यावसायिक आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेते हैं। इसके लिए वे उद्यम की व्यवहार्यता, पिछले तीन वर्षों के दौरान उसकी विकास यात्रा और सकारात्मक नकदी प्रवाह वाली व्यावसायिक योजना का आकलन करते हैं। सरकार उनके दैनिक कामकाज में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं करती और न ही डॉटर फंड के निवेश संबंधी निर्णयों में कोई भूमिका निभाती है।
एमएसएमई सचिव ने इस बात पर भी जोर देकर कहा कि ऋण और इक्विटी पूंजी एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। उन्होंने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र में बकाया ऋण की राशि वर्ष 2014 के लगभग 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जबकि इस क्षेत्र की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) घटकर लगभग 3.5 प्रतिशत रह गई हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में सूक्ष्म उद्यमों के लिए एसआरआई फंड को अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने हाल ही में शुरू किए गए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड के बारे में भी चर्चा की, जो लघु एवं मध्यम उद्यमों में सीधे निवेश करेगा। उन्होंने उद्यमियों को समुचित वित्तीय रिकॉर्ड बनाए रखने और उपयुक्त कानूनी ढांचा अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इक्विटी पूंजी जुटाने से किसी उद्यम की ऋण प्राप्त करने की क्षमता भी बेहतर होती है।
‘महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई की विकास यात्रा – विकास पूंजी क्यों महत्वपूर्ण है’ विषय पर आयोजित प्रथम सत्र में उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने महिला उद्यमियों के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में काम कर रहे अनेक महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को छोटी राशि के निवेश के माध्यम से सहायता की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश के लिए उद्यमों को तैयार करने वाले कार्यक्रमों, लेखांकन एवं व्यावसायिक मूल्यांकन में सहयोग तथा उन महिला उद्यमियों के लिए लचीली वित्तीय व्यवस्थाओं की जरूरत है, जिनके पास पर्याप्त संपार्श्विक (कोलैटरल) या लंबा वित्तीय इतिहास उपलब्ध नहीं है।
प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूंजी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उद्यमों को बाजार तक पहुंच भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), ओएनडीसी और निर्यात जैसे माध्यमों को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने ऐसी जागरूकता कार्यशालाओं का नियमित रूप से आयोजन किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

‘एसआरआई फंड का परिचय और डॉटर फंड की भूमिका’ विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में एमएसएमई मंत्रालय के अपर विकास आयुक्त श्री प्रवीण कुमार ने फंड की संरचना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत मदर फंड केवल डॉटर फंड के माध्यम से निवेश करता है, जबकि डॉटर फंड एमएसएमई में निवेश करते हैं।
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री सुभ्रांशु शेखर आचार्य ने एमएसएमई इकोसिस्टम में मौजूद कमियों पर प्रकाश डाला और उद्यमियों को इक्विटी फंडिंग के लाभों के बारे में बताया। एसआरआई फंड के निवेश प्रबंधक एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रेम प्रभाकर ने कहा कि विकास की राह पर अग्रसर उद्यमों के लिए इक्विटी पूंजी का रणनीतिक महत्व है। इसके लिए किसी कोलैटरल की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही, निवेशक क्षेत्र-विशिष्ट मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग भी प्रदान करते हैं।
डॉटर फंड के प्रतिनिधियों ने निवेश के प्रमुख मानदंडों की जानकारी दी। इनमें मजबूत बाजार, सक्षम टीम, विस्तार योग्य व्यावसायिक मॉडल, लेखा-परीक्षित वित्तीय विवरण, सुशासन के लिए आवश्यक तैयारी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकरण और पूंजी के उपयोग की स्पष्ट योजना शामिल हैं। उन्होंने उद्यमियों को इक्विटी फंडिंग प्राप्त करने की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बारे में भी बताया। इसमें प्रारंभिक छंटनी से लेकर समुचित उद्यम और आवश्यक दस्तावेजीकरण तक की प्रक्रिया शामिल है।
तीसरे सत्र में इकोसिस्टम के सहयोगी संगठनों के माध्यम से उपलब्ध सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया। अटल इन्क्यूबेशन सेंटर-एलीप वुमेन एंटरप्रेन्योर्स हब और नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) के प्रतिनिधियों ने महिला उद्यमियों के लिए उपलब्ध विभिन्न प्रकार की सहायता के बारे में जानकारी दी। इसमें इन्क्यूबेशन, मार्गदर्शन, बाजार तक पहुंच, सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा अनुपालन संबंधी सहायता शामिल हैं।
इस कार्यशाला की अवधारणा तैयार करने, योजना बनाने और आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए इकोसिस्टम के सहयोगी संगठन माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

अंतिम सत्र में प्रश्नोत्तर और संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने डॉटर फंड से संपर्क करने, एकल स्वामित्व वाले उद्यमों को निवेश के लिए तैयार करने, क्षेत्र-विशिष्ट फंड तथा प्रौद्योगिकी एवं इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सहायता जैसे विषयों पर चर्चा की। इस दौरान बताया गया कि एसआरआई फंड के लिए विशेष प्रयोजन माध्यम (एसपीवी) के रूप में कार्यरत एनएसआईसी वेंचर कैपिटल फंड लिमिटेड की वेबसाइट पर सभी 72 डॉटर फंड का विवरण उपलब्ध है। इसमें उनके कार्यक्षेत्र और संपर्क संबंधी जानकारी भी शामिल है। कार्यशाला का समापन करते हुए एमएसएमई मंत्रालय ने भविष्य में भी यशस्विनी अभियान के माध्यम से महिला उद्यमिता को निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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पीके/केसी/आरटी/एसकेएस/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2333033)
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