सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज शाम राष्ट्रीय राजधानी के ‘दिल्ली हाट’ में ‘शिल्प समागम मेला 2026’ का उद्घाटन किया
वर्ष 2022 से अब तक शिल्प समागम मेलों से 1,000 से अधिक कारीगर लाभान्वित हुए हैं: डॉ. वीरेंद्र कुमार
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित पहले संयुक्त ‘शिल्प उत्सव’ में पारंपरिक कारीगरों और दिव्यांगजनों को एक समावेशी मंच पर एक साथ लाया गया
‘भारत ट्यूलिप’ और ‘पर्पल फेस्ट’ के तहत लगभग 150 स्टॉलों पर पारंपरिक शिल्पों, हथकरघा उत्पादों और रचनात्मक प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया गया
प्रविष्टि तिथि:
02 NOV 2026 8:04PM by PIB Delhi
केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज शाम राष्ट्रीय राजधानी के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में 15-दिवसीय ‘शिल्प समागम मेला 2026’ का उद्घाटन किया। यह मेला 15 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह मेला, अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों और दिव्यांगजनों से जुड़े कारीगरों एवं लाभार्थियों को विपणन का एक विशेष मंच प्रदान करेगा ताकि वे अपने उत्पादों को एक व्यापक दर्शक वर्ग के सामने प्रदर्शित व उनकी बिक्री कर सकें।

केन्द्रीय मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और स्टॉल प्रबंधकों तथा मेले में आए लोगों से बातचीत की।

उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री प्रभात त्यागी; राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (एनडीएफडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री आशुतोष जैन; सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मोनाली पी. ढकाते; दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की उप-महानिदेशक सुश्री ऋचा शंकर; कई विदेशी मेहमानों के साथ-साथ मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस वर्ष का मेला भारत के पारंपरिक शिल्प, त्योहारी रोशनी और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाते हुए ‘प्रकाश और परंपरा - ज्योति से ज्योति जलाएँ’ विषय पर आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन पारंपरिक शिल्प कौशल, हथकरघा उत्पादों, शिल्प के जीवंत प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को एक साथ लाता है। साथ ही यह उद्यमिता, आजीविका सृजन और समावेशी भागीदारी को भी बढ़ावा देता है।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) पहली बार मिलकर ‘शिल्प उत्सव’ का आयोजन कर रहे हैं।

डॉ. कुमार ने बताया कि ‘भारत ट्यूलिप’ और ‘पर्पल फेस्ट’ के तहत, भाग लेने वाले पुरुष और महिला कारीगरों के लिए लगभग 150 स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों पर वे अपने हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन कर सकते हैं। यह पहल पारंपरिक कारीगरों, रचनात्मक प्रतिभाओं और दिव्यांगजनों को एक साझा मंच पर लाती है, जिससे उन्हें व्यापक बाजार तक पहुंचने और भागीदारी के समान अवसर पाने में मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि इस मेले में भाग लेने वाले लाभार्थियों को मुफ्त स्टॉल दिए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें यात्रा खर्च, दैनिक भत्ता और सामान लाने-ले जाने की सुविधा भी प्रदान की जा रही है ताकि वे मेले में आसानी से हिस्सा ले सकें।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह मेला मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत तीन राष्ट्रीय निगमों - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) - द्वारा समर्थित लाभार्थियों को एक साथ लाता है।

उन्होंने आगे कहा कि इसमें दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत काम करने वाले ‘राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम’ (एनडीएफडीसी) के लाभार्थी भी शामिल हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि मंत्रालय 2022 से ‘शिल्प समागम मेलों’ का आयोजन कर रहा है। ऐसे 15 मेलों के जरिए, अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारियों से जुड़े 1,000 से अधिक कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के अवसर मिले हैं। इससे उन्हें लाभ हुआ है।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों को उपभोक्ताओं से जोड़कर और उनके पारंपरिक कौशल एवं कारीगरी को अधिक पहचान दिलाकर उनकी आजीविका को मजबूत करना है।

इस मेले को सात अलग-अलग थीम वाले क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र भारत की कलाओं, परंपराओं, खान-पान और सांस्कृतिक झलक के जरिए एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है। ‘कला आँगन’ में शिल्पकारी का जीवंत प्रदर्शन होगा। ‘प्रकाश चौक’ में विभिन्न प्रकार के दीये और लाइटें देखने को मिलेंगी। ‘पूजा पथ’ पर पूजा-पाठ से जुड़ी चीजें उपलब्ध होंगी। ‘सजावट बाजार’ घर की सजावट पर केन्द्रित होगा। ‘घराना’ में वस्त्रों और फैशन से जुड़ी सामग्रियां होंगी। ‘स्वाद चौक’ में खाने-पीने की चीजें मिलेंगी; और ‘मंच’ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रस्तुतियां होंगी।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण ‘भारत ट्यूलिप’ (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) है। यह एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्य कारीगरों और अन्य लक्षित समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भारत और विदेशों में उपभोक्ताओं तक पहुंचाना तथा उनका विपणन करना है।

‘भारत ट्यूलिप’ ब्रांड कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने, बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने और आर्थिक रूप से सशक्त होने के लिए एक ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराता है। साथ ही, यह भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को संरक्षित करने में भी योगदान देता है।
इस मेले में ‘पर्पल फेस्ट’ को भी प्रमुखता दी गई है, जो दिव्यांगता, रचनात्मकता, प्रतिभा और समान भागीदारी का एक बहुआयामी उत्सव है। यह दिव्यांगजनों, संगठनों, संस्थानों, व्यवसायों, कलाकारों, पेशेवरों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाता है ताकि वे उपलब्धियों का उत्सव मना सकें, भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकें और समाज में समावेशन के प्रति बेहतर समझ को बढ़ावा दे सकें।

यह कार्यक्रम मंत्रालय और उसके चार राष्ट्रीय निगमों – एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी, एनएसकेएफडीसी और एनडीएफडीसी – की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं पहलों के बारे में जागरूकता फैलाने के एक मंच के रूप में काम करेगा। साथ ही, यह लक्षित समुदायों के बीच उद्यमिता, आजीविका सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसरों को भी रेखांकित करेगा।
‘शिल्प समागम मेला 2026’ के जरिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय पारंपरिक कारीगरों तथा उनके उत्पादों को अधिक पहचान दिलाने, आजीविका के टिकाऊ अवसरों को बढ़ावा देने, पारंपरिक शिल्प कौशल को प्रोत्साहित करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है।
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पीके/केसी/आरटी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2331873)
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