ग्रामीण विकास मंत्रालय
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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए


शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निपटारे के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रावधान

शिकायत दर्ज कराने के कई माध्यम उपलब्ध; अनसुलझी शिकायतें उच्च स्तर पर भेजी जाएंगी

शिकायतों की जांच 7 कार्य दिवसों में और निपटारा 15 दिनों के भीतर करना होगा

प्रविष्टि तिथि: 02 NOV 2026 11:16AM by PIB Delhi

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और समयबद्ध व्यवस्था स्थापित की गई है। इनका उद्देश्य शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि नागरिकों की समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जा सके और उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।

बहुस्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था

इन नियमों के तहत राज्य सरकारों द्वारा ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर समयबद्ध, बहुस्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित की जाएगी। संबंधित स्तरों पर नामित शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, जांच करने और उनका निपटारा करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

जिला कार्यक्रम समन्वयक जिला स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था की निगरानी करेंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि शिकायतों का समाधान निर्धारित व्यवस्था और शिकायत निवारण के लिए विकसित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से किया जाए।

शिकायत दर्ज कराने के लिए कई माध्यम

शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कोई भी व्यक्ति योजना के क्रियान्वयन से जुड़े किसी भी मामले में शिकायत कर सकता है। नियमों के तहत शिकायत दर्ज कराने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं:

  • नामित शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज कराना।
  • डिलीवरी के प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजना।
  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शिकायत निवारण के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से शिकायत दर्ज कराना।
  • टेलीफोन, निर्धारित हेल्पलाइन या राज्य सरकार द्वारा तय किसी अन्य माध्यम से शिकायत करना।

ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों को उसी दिन निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर दर्ज और पंजीकृत करना होगा। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो अगले कार्य दिवस तक उनका पंजीकरण अनिवार्य होगा।

शिकायत का पंजीकरण होने पर शिकायतकर्ता को एक पावती दी जाएगी। इसमें पंजीकरण संख्या, शिकायत प्राप्त होने की तारीख और शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी का पदनाम दर्ज होगा। डिजिटल माध्यम से प्राप्त शिकायतों के लिए पावती इलेक्ट्रॉनिक रूप में और भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों के लिए पावती भौतिक रूप में दी जाएगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत के प्रारूप, भाषा, उसे प्रस्तुत करने के तरीके या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर उसका पंजीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इस प्रावधान से यह सुनिश्चित होगा कि प्रक्रियागत औपचारिकताओं के कारण किसी भी नागरिक को शिकायत निवारण व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित न होना पड़े।

जांच और शिकायत निवारण के लिए निर्धारित समय-सीमा

नियमों में शिकायतों की त्वरित जांच और समाधान सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। नामित शिकायत निवारण अधिकारी प्रत्येक पंजीकृत शिकायत की जांच करेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे। इसके लिए अधिकारी संबंधित प्राधिकारियों या कर्मचारियों से रिकॉर्ड, रजिस्टर, दस्तावेज, रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा या अन्य आवश्यक जानकारी मांग सकते हैं।

आवश्यकता पड़ने पर शिकायत का निपटारा करने से पहले शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी दिया जाएगा।

शिकायत की प्राप्ति की तारीख से 7 कार्य दिवसों के भीतर उसकी जांच पूरी करना अनिवार्य होगा। जांच पूरी होने के बाद शिकायत निवारण अधिकारी निष्कर्ष दर्ज करेंगे और अधिनियम तथा नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्रवाई करेंगे अथवा करवाएंगे। प्रत्येक शिकायत का निवारण उसकी प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर करना होगा।

जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई का विवरण निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर दर्ज किया जाएगा और शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी दी जाएगी। भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों के मामले में उनके नतीजे और की गई कार्रवाई की सूचना शिकायतकर्ता को भौतिक रूप से भी दी जाएगी।

डिजिटल ट्रैकिंग और अनसुलझी शिकायतों को उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था

निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से शिकायतों के पंजीकरण से लेकर उनके अंतिम निपटारे तक पूरी प्रक्रिया की डिजिटल ट्रैकिंग की जा सकेगी। इसके अलावा जांच, निष्कर्ष और की गई कार्रवाई का विवरण भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।

निर्धारित 15 दिनों की अवधि में जिन शिकायतों का निवारण नहीं हो पाएगा, उन्हें राज्य सरकार द्वारा स्थापित शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत अगले उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। उच्च स्तर पर शिकायत प्राप्त करने वाला प्राधिकारी मामले की जांच करेगा और उसके निपटारे के लिए उचित कार्रवाई करेगा। ऐसी शिकायतों के समाधान होने तक उनकी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से निगरानी जारी रहेगी।

अपील का भी प्रावधान

नियमों में शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत पारित आदेशों के विरुद्ध अपील का भी प्रावधान किया गया है। ऐसी अपील वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची-I के अनुसार दायर और निस्तारित की जाएगी।

इन नियमों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य वीबी-जी राम जी के तहत नागरिक-केंद्रित, सुलभ और समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था को संस्थागत स्वरूप देना है। बहुस्तरीय संस्थागत व्यवस्था, शिकायत दर्ज कराने के कई माध्यम, अनिवार्य पंजीकरण, निर्धारित समय-सीमा, डिजिटल ट्रैकिंग और अनसुलझी शिकायतों को उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था से प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होने और योजना के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

यह अधिसूचना वीबी-जी राम जी के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों का व्यवस्थित, पारदर्शी और निर्धारित समय-सीमा के भीतर निवारण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के अधिकारों और पात्रता के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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PU


(रिलीज़ आईडी: 2331400) आगंतुक पटल : 138
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