प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया
राष्ट्रीय एकता दिवस पर, हम सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और राष्ट्रीय एकता में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हैं: प्रधानमंत्री
सरदार पटेल ने राष्ट्र की एकता को आकार देने और उसे सुरक्षित रखने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: प्रधानमंत्री
देश में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार किया गया है: प्रधानमंत्री
भारत आज पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और अधिक संकल्पबद्ध है, इसका एक बड़ा कारण देशवासियों का बढ़ा हुआ आत्मविश्वास है: प्रधानमंत्री
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं: प्रधानमंत्री
2047 तक एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प से हमारा हर प्रयास प्रेरित होना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रविष्टि तिथि:
31 OCT 2026 9:24PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया। जनसभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने सुबह के पारंपरिक कार्यक्रम के बजाय शाम के समारोह के बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने पिछली शाम भारत पर्व पवेलियन में प्रस्तुत शानदार प्रदर्शन और सुबह की रन फॉर यूनिटी के दौरान एकता बनाए रखने के संकल्प के साथ लाखों नागरिकों की भारी उपस्थिति को याद किया।
दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में देशव्यापी सामूहिक भागीदारी, इस स्थल के अद्वितीय माहौल और एकता दिवस की प्रेरणादायक ऊर्जा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस स्मारक का दौरा करने पर दिल भारतीय नागरिक होने के गर्व और सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रति गहरी कृतज्ञता से भर जाता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "स्वतंत्रता के बाद, उन्होंने 550 से अधिक रियासतों को एकजुट किया और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर इस राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां स्वतंत्रता किसी राष्ट्र को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अधिकार देती है और गणराज्य की व्यवस्था जन-उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक दायरे में निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त करती है, वहीं एकता पूरे देश को एक साथ आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है। श्री मोदी ने कहा, “इसीलिए आज हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और एकता दिवस, इन तीनों राष्ट्रीय पर्वों को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।”
इस वर्ष एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता परेड में राष्ट्रीय एकता के भव्य स्वरूप का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परेड पुलिस और सुरक्षा बलों के शौर्य को समर्पित थी। इसके साथ ही, भारत की विरासत और आकांक्षाओं को दर्शाती झांकियों ने भी इस आयोजन की शोभा बढ़ाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि एकता दिवस अब केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनगौरव का उत्सव बन गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं और सरदार वल्लभभाई पटेल के चरणों में सादर नमन करता हूं।”
सरदार पटेल को एक महान ऐतिहासिक व्यक्तित्व बताते हुए, जिनके बिना आधुनिक भारत की कल्पना नहीं की जा सकती, प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के वर्तमान भौगोलिक और राजनीतिक स्वरूप को आकार देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री मोदी ने कहा, “विभाजन के बाद भी हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक भारत को सुरक्षित रखने का काम स्वयं सरदार पटेल ने किया था।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल को सफलता इसलिए मिली, क्योंकि वे भारत के स्वभाव और उसकी चेतना को गहराई से समझते थे। उन्होंने विविधता को कभी बाधा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का वास्तविक आधार माना। यही वह आधार है, जिसने हजारों वर्षों से भारतीय सभ्यता को एक सूत्र में बांधे रखा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “इसी शक्ति के बल पर हमने प्रगति और समृद्धि के नए शिखरों को छुआ है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने देश को भौगोलिक और भावनात्मक, दोनों रूपों में एकजुट कर आधुनिक भारत की नींव रखी। उन्होंने राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत करने में भी सरदार पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। श्री मोदी ने कहा, “गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के माध्यम से उन्होंने देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग भी प्रशस्त किया।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों तक आक्रांताओं की चुनौतियों के बावजूद मंदिर पर शान से लहराती रही धर्मध्वजा ने देशभर में मनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “और इस वर्ष देश इसी उत्साह और उमंग के साथ यह पर्व भी मना रहा है।”
राष्ट्रीय एकता के भव्य आयोजनों, वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद, तेज आर्थिक विकास और काशी विश्वनाथ से लेकर राम मंदिर तक हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज उसी मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, जिसकी परिकल्पना सरदार पटेल ने की थी। श्री मोदी ने कहा, “इसके लिए यह देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।”
सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर में दो वर्षों तक चले समारोहों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान देश ने कई महत्वपूर्ण संकल्प लिए थे। उन्होंने सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि देश ने इन संकल्पों को बहुत ही कम समय में पूरा कर लिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “इन दो वर्षों में देश ने कई ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जो पहले कभी नहीं बने थे।”
सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उनके चरणों में ली गई उस प्रतिज्ञा को याद करते हुए कि नक्सलवाद और माओवादी आतंक के पूरी तरह समाप्त होने तक वे चैन से नहीं बैठेंगे, प्रधानमंत्री ने कहा कि महज एक वर्ष के भीतर वामपंथी उग्रवाद की कमर टूट गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो मार्च 2026 तक घटकर शून्य हो गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इन क्षेत्रों में सड़कों, मोबाइल नेटवर्क, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा, “जिन युवाओं के सामने कभी अनिश्चितता थी, उनके लिए अब शिक्षा, रोजगार और जीवन में आगे बढ़ने के नए अवसर खुल रहे हैं।”
एकता दिवस समारोह में पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए परिवारों का स्वागत करते हुए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए प्रधानमंत्री ने शांति स्थापना के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “आज मैं उन सभी वीर जवानों को भी नमन करता हूं, जिन्होंने देश के इन क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि ठोस राष्ट्रीय उपलब्धियों और संवेदनशील प्रशासन के कारण जनता का विश्वास बढ़ा है, जिससे आज भारत पहले से अधिक सुरक्षित और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद दशकों तक गरीबी हटाने के खोखले नारे दिए गए, लेकिन इन नारों को देने वाले लोग अपना ही हित साधते रहे। उन्होंने हाल ही में जारी विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 से पहले के 10-12 वर्षों के दौरान 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले। श्री मोदी ने कहा, “इसका अर्थ है कि पहले जहां हर 100 में से 27 लोग अत्यधिक गरीबी की चपेट में थे, वहीं आज यह संख्या 3 से भी कम रह गई है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में गरीबों के कल्याण और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देकर यह वैश्विक स्तर पर सराहनीय उपलब्धि हासिल की गई है। इसके लिए बिना किसी लीकेज के सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि हस्तांतरित करने (डीबीटी), मुफ्त राशन, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं, करोड़ों पक्के घरों, शौचालयों, धुएं से मुक्त रसोई और व्यापक बीमा कवरेज जैसी योजनाओं का सहारा लिया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले जहां सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ 25 करोड़ से भी कम लोगों तक पहुंचता था, वहीं आज इसका दायरा बढ़कर लगभग 100 करोड़ नागरिकों तक हो गया है। सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए और उनका आशीर्वाद लेते हुए प्रधानमंत्री ने गरीबी को पूरी तरह समाप्त करने के संकल्प को दोहराया। श्री मोदी ने कहा, “ऐसे ही प्रयासों से हम देश से गरीबी दूर करेंगे और भारत को विकसित राष्ट्र बनाएंगे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों के सबसे उथल-पुथल भरे वैश्विक दौर में राष्ट्रीय एकता स्थिरता और सफलता की गारंटी है। इस दौर में युद्ध, आर्थिक संकट, संसाधनों की कमी और आपूर्ति श्रृंखलाओं में बिखराव जैसी चुनौतियां सामने हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में आने वाले हर संकट का सामना करने में भारतीयों की एकजुटता ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में पैदा हुए ऊर्जा संकट का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके कारण कई देशों को ईंधन की राशनिंग करनी पड़ी। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले और तेल आयात पर निर्भर देश के सामने भीषण संकट आने की आशंकाएं जताई जा रही थीं। इस दौरान भारत विरोधी ताकतें भी सक्रिय हो गई थीं। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक सूझबूझ और देशवासियों की एकजुटता, दोनों ने मिलकर भारतीय नागरिकों को इस संकट के प्रभाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री ने विभाजनकारी ताकतों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि एक दशक से अधिक समय की राजनीतिक हताशा के बाद ऐसी ताकतें अब खुलकर सामने आ गई हैं। वे साजिशें रचने, नागरिकों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काने और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाहें फैलाने तथा भारत की छवि खराब करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे गुप्त विदेशी बैठकों, भारत विरोधी तत्वों से मिलने वाले बाहरी समर्थन और देश के शत्रुओं की भाषा से मेल खाते बयानों के तौर-तरीकों को पहचानें। श्री मोदी ने आगाह करते हुए कहा, “हमने दूर-दराज के क्षेत्रों से नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है, लेकिन देश में वैचारिक उग्रवाद का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। देश को ऐसी ताकतों के प्रति हमेशा सतर्क रहना होगा।”
प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता का महान संकल्प और एक सशक्त एवं सक्षम भारत के निर्माण की यात्रा तमाम कठिनाइयों के बावजूद निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने देश की अगली प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करना, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलावों पर रोक लगाना तथा सेकुलर सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े संकल्पों और साहसिक निर्णयों के मार्ग में बाधाएं और चुनौतियां आना स्वाभाविक है, लेकिन देश एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत के संकल्प से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश का प्रत्येक नागरिक अपनी पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ निरंतर प्रयास करता रहेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “हम परिश्रम की पराकाष्ठा तक जाएंगे, हर तूफान का डटकर सामना करेंगे, लेकिन हमारा लक्ष्य एक ही रहेगा—2047 तक एक सशक्त और सक्षम भारत का निर्माण!”
अंत में प्रधानमंत्री ने सभी को पर्व की शुभकामनाएं दीं और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।
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पीके/केसी/आरटी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2331058)
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