प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री ने संशय से उबरने और अनिश्चितता को अंगीकार करने पर बल देने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
प्रविष्टि तिथि:
27 OCT 2026 10:40AM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज संस्कृत सुभाषितम् साझा किया जिसमें संशय से उबरने और अनिश्चितता को अंगीकार करने के महत्व पर बल दिया गया है:
न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥
यह सुभाषितम् इस बात को रेखांकित करता है कि संदेह से मुक्त होने पर व्यक्ति शुभ संभावनाओं को पहचानने में सक्षम होता है, जबकि अनिश्चितताओं का सामना करने से गहन समझ और अंतर्दृष्टि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह जीवन की चुनौतियों से निपटने में विवेक, साहस और दृढ़ संकल्प के महत्त्व को भी उजागर करता है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:
न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥
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पीके/केसी/आरटी/एसकेजे/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2328815)
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