पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
सीएक्यूएम ने फिरोजपुर और फरीदकोट में धान की पराली के प्रबंधन संबंधी उपायों की समीक्षा की; फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की समय पर उपलब्धता और किसानों को सहायता प्रदान करने पर जोर
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के उपायों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए उच्चस्तरीय दल ने हॉटस्पॉट गांवों का दौरा
प्रविष्टि तिथि:
17 OCT 2026 7:29PM by PIB Delhi
पंजाब के मोगा जिले के दौरे के बाद, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य (तकनीकी) डॉ. टी.एस. पंवार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने आज फिरोजपुर और फरीदकोट जिलों का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य वर्तमान फसल कटाई के मौसम के दौरान धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की समीक्षा करना था।

दल ने फिरोजपुर स्थित उपायुक्त (डीसी) कार्यालय में फिरोजपुर और फरीदकोट के उपायुक्तों तथा संबंधित जिला अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान, दल ने धान की पराली इन-सीटू (खेत में) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन एवं उपयोग को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की। फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की उपलब्धता और तैनाती, जमीनी स्तर पर निगरानी, हॉटस्पॉट क्षेत्रों की निगरानी तथा प्रवर्तन संबंधी उपायों की भी समीक्षा की गई।
दल ने धान की पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन को मजबूत करने, सीआरएम मशीनरी की समय पर उपलब्धता और उसके सर्वोत्तम उपयोग को सुनिश्चित करने तथा किसानों, संग्रहकर्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और रुझानों के विश्लेषण के लिए ड्रोन तथा कम लागत वाले सेंसरों की तैनाती की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही, किसानों को पराली जलाने और पीएम 2.5 के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई।

आयोग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों तथा खेत में ही पराली प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य मशीनरी तक पहुंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, धान की पराली के प्रभावी एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन के लिए संग्रहकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय पर बल दिया। जिला प्रशासनों को पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए मशीनरी की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और सभी हितधारकों के बीच निकट समन्वय बनाए रखने की सलाह दी गई।
समीक्षा बैठक के बाद, सीएक्यूएम के दल ने जमीनी स्तर पर मौजूदा स्थिति का आकलन करने और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के उपायों के क्रियान्वयन की समीक्षा करने के लिए फिरोजपुर और फरीदकोट के चयनित हॉटस्पॉट गांवों का दौरा किया। यह दौरा पंजाब के हॉटस्पॉट जिलों में धान की पराली के प्रबंधन संबंधी उपायों की निरंतर निगरानी और समीक्षा के सीएक्यूएम के प्रयासों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य धान की पराली के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन को मजबूत करना तथा क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं को रोकना है।

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पीके/केसी/आरटी/केपी /डीके
(रिलीज़ आईडी: 2324805)
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