वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल ने युवाओं से भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नेतृत्व करने का आह्वान किया
लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएँ और निष्पक्ष व्यापार प्रथाएँ भारत की वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थिति को मजबूत करती हैं: श्री गोयल
भारत के युवाओं को भविष्य की नौकरी के अवसरों के लिए तैयार होने हेतु उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और आजीवन अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए: श्री गोयल
प्रविष्टि तिथि:
15 OCT 2026 3:06PM by PIB Delhi
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने युवा भारतीयों से उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने, अपने कौशल का निरंतर उन्नयन करने और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में योगदान देने का आह्वान किया। “पाथवेज़ टू विकसित भारत” विषय पर एसआरसीसी शताब्दी सम्मेलन के उद्घाटन को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि विनिर्माण, प्रौद्योगिकी अपनाने और कौशल विकास में निवेश से भारत के युवाओं के लिए अवसर सृजित होंगे तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश की स्थिति मजबूत होगी।
श्री गोयल ने कहा कि देशों का मूल्यांकन अब विनिर्माण और निवेश गंतव्य के रूप में राजनीतिक स्थिरता, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं तथा निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यापार प्रथाओं के आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण का विस्तार करने और उत्तरी तथा पूर्वोत्तर भारत सहित नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने का अवसर है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने युवाओं से बदलते रोजगार परिदृश्य के लिए तैयार होने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक अनुप्रयोग में कौशल विकसित करने का आग्रह किया। श्री गोयल ने कहा कि बड़े भाषा मॉडल और अन्य एआई प्रणालियों को ऐसे व्यावहारिक उपकरणों में विकसित किया जाना चाहिए, जिनका उपयोग व्यवसाय और आम नागरिक कर सकें। 1990 के दशक और 2000 के दशक में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की प्रगति का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं से कहा कि वे केवल नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके विकास और अनुप्रयोग में अग्रणी भूमिका निभाएँ।
श्री गोयल ने निरंतर अध्ययन और व्यक्तिगत विकास के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने छात्रों से कौशल उन्नयन को आजीवन उत्तरदायित्व मानने और उभरते अवसरों की पहचान करने को कहा, जिनसे वे व्यावसायिक वृद्धि, व्यापार में सहजता और जीवन में सहजता में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि भारत के युवा विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी प्रगति को व्यावहारिक समाधानों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य 1.4 अरब भारतीयों की सामूहिक प्रतिबद्धता है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की हीनता की भावना और निराशावादी सोच पर विजय पाने की अपील का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक राष्ट्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने भारत की संस्कृति, परंपराओं और विरासत की भूमिका का भी उल्लेख किया, जो देश के भविष्य को आकार देने में सहायक है, और नागरिकों में सामूहिक प्रयास तथा कर्तव्यभावना के महत्व को रेखांकित किया। श्री गोयल ने छात्रों से महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने और अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को परिभाषित करने को कहा। उन्होंने कहा कि नागरिकों के संयुक्त प्रयास भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने में योगदान दे सकते हैं।
श्री गोयल ने युवा भारतीयों की उद्यमशीलता की भावना, विशेष रूप से स्टार्टअप संस्थापकों की, पर प्रकाश डाला, जो जोखिम लेते हैं, चुनौतियों का समाधान करते हैं और नवाचारपूर्ण समाधान खोजते हैं। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों की ऊर्जा, दृढ़ संकल्प और महत्वाकांक्षा भारत की बदलती आकांक्षाओं को दर्शाती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ देश की बढ़ती भागीदारी में योगदान देती है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा जनसंख्या, जनसांख्यिकीय लाभांश, बड़ी घरेलू बाजार और उद्यमशीलता की प्रेरणा के सहारे भारत अगले 20–25 वर्षों तक सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय पेशेवर वैश्विक व्यवसायों, तकनीकी विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान में योगदान दे रहे हैं, जो वैश्विक आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी परिदृश्य को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बोलते हुए मंत्री ने कहा, “अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण अंतिम रूप दे दिया गया है और वह अंतिम रूपरेखा तथा कानूनी मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया से गुजर रहा है। हमें उम्मीद है कि अपने समकक्ष देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने के बाद हम इसे शीघ्र अंतिम रूप देकर लागू कर सकेंगे।”
अपने संबोधन के समापन पर श्री गोयल ने छात्रों से अपनी शिक्षा की जिम्मेदारी लेने, उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुकूल ढलने और देश के विकास में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, महत्वाकांक्षी लक्ष्य और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की इच्छाशक्ति से युवा भारतीय विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान दे सकेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर अवसर सृजित कर सकेंगे।
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पीके/ केसी/ आरटी/ एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2323829)
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