सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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भारत ट्यूलिप ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों की बाजार तक पहुंच बढ़ाई

प्रविष्टि तिथि: 14 OCT 2026 4:18PM by PIB Delhi

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों की आजीविका मजबूत करने के लिए भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान के लिए आजीविका कार्यक्रम) लागू कर रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बाजार तक पहुंच का विस्तार करना, उत्पादों की दृश्यता बढ़ाना तथा भारत और विदेशों में ग्राहकों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

5 नवम्‍बर, 2024 को शुरू की गई भारत ट्यूलिप पहल का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को विस्‍तृत बाजारों से जोड़ना और डिजिटल तथा अन्य विपणन माध्यमों के जरिए अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने एवं बेचने के अवसर प्रदान करना है। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को संरक्षित करते हुए पात्र लक्षित समूहों के कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना चाहती है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत पारंपरिक उत्पादों की दृश्यता बढ़ाने और ऑनलाइन बिक्री को सुगम बनाने के लिए उन्हें भारत ट्यूलिप ब्रांड के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के सामने आने वाली बाजार तक पहुंच संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और उनके उत्पादों को स्थानीय बाजारों से आगे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में सहायता करना है। एक साझा ब्रांड के अंतर्गत उत्पादों को बढ़ावा देकर यह कार्यक्रम पारंपरिक शिल्पकला की पहचान को मजबूत करने और आजीविका के स्‍थायी अवसर सृजित करने का प्रयास करता है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनबीसीएफडीसी डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स माध्यमों के जरिए बाजार से संपर्क स्थापित करने में कारीगरों की सहायता कर रहा है, ताकि वे अधिक व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत उत्पादों के प्रचार-प्रसार, डिजिटल मार्केटिंग, गुणवत्ता आश्वासन, कौशल विकास तथा लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी से संबंधित सहायता भी प्रदान की जाती है। इससे कारीगरों को बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप ढलने में मदद मिलती है।

अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और क्रेता-विक्रेता बैठकों में कारीगरों की भागीदारी को सुगम बनाना भी है। इससे उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, संभावित खरीदारों से जुड़ने और नए व्यावसायिक अवसर तलाशने का मौका मिलता है। ऐसे मंच पारंपरिक कारीगरों को बाजार से संबंध स्थापित करने और अपने उत्पादों को व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।

भारत ट्यूलिप के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया जाता है। इनमें गृह सज्जा एवं जीवनशैली से जुड़े उत्पाद, हस्तनिर्मित आभूषण, हाथ से बुने वस्त्र एवं कपड़े तथा पारंपरिक चमड़े के उत्पाद शामिल हैं। यह पहल भारत की विविध कलात्मक विरासत की व्यापक सराहना को प्रोत्साहित करते हुए पारंपरिक कौशल और शिल्पकला को समकालीन बाजारों से जोड़ती है।

कारीगर और इच्छुक हितधारक इस पहल के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने तथा इसके उत्पादों और विपणन गतिविधियों का अवलोकन करने के लिए एनबीसीएफडीसी की आधिकारिक ट्यूलिप वेबसाइट पर जा सकते हैं। खुदरा विक्रेता, संस्थागत खरीदार और उपभोक्ता भी कार्यक्रम के ऑनलाइन एवं प्रचार माध्यमों के जरिए पारंपरिक उत्पादों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे कारीगरों की आजीविका को सहयोग मिलता है और पारंपरिक कौशल को बनाए रखने में मदद मिलती है।

भारत ट्यूलिप के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और एनबीसीएफडीसी पारंपरिक कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच को मजबूत करके, उद्यमिता को प्रोत्साहित करके तथा भारत की समृद्ध शिल्प विरासत के संरक्षण और उसे व्यापक पहचान दिलाने में सहयोग देकर समावेशी आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना जारी रखे हुए हैं।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://nbcfdc.gov.in/nbcfdc/web/tulip

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पीके/केसी/आरटी/केपी
 


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