सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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मैसूर में 11 अक्टूबर से 9 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026


मेले में 12 राज्यों के कारीगरों के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई

प्रविष्टि तिथि: 12 OCT 2026 7:40PM by PIB Delhi

कर्नाटक के मैसूर स्थित मैसूर दशहरा एग्जिबिशन ग्राउंड में 'शिल्प समागम मेला 2026' चल रहा है। इसे भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 11 अक्टूबर से आयोजित किया जा रहा है।

19 अक्टूबर तक चलने वाले 9 दिवसीय मेले का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारियों के बनाए उत्पादों के लिए विपणन का मंच प्रदान करना है। इसमें मंत्रालय के अधीन काम करने वाले तीन राष्ट्रीय निगमों यानी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) से मदद पाने वाले कारीगर भी शामिल हैं।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना, पारंपरिक शिल्प कौशल का संवर्द्धन करना और लक्षित समूहों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना है।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है और अब तक आयोजित किए गए 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हुए हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 का यह पहला 'शिल्प समागम मेला' मैसूर में आयोजित किया जा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए हैं; इनमें 37 महिला कारीगर भी शामिल हैं। आगंतुकों के लिए पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले फूड स्टॉल भी लगाए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मेले में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के कारीगर भाग ले रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि इस प्रदर्शनी में हस्तशिल्प की वस्तुएं, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्ती, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक-प्रिंट वाले उत्पाद, कांजीवरम साड़ियां, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग और पर्स, टेराकोटा के उत्पाद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, रोजवुड की वॉल हैंगिंग और बेड व कुशन कवर जैसे कई पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। यह मंच कारीगरों को अपने उत्पादों को अधिक लोगों तक पहुंचाने और संभावित ग्राहकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है, साथ ही भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कौशल ​​को भी बढ़ावा देता है।

अधिकारी ने यह भी कहा कि शिल्प समागम मेला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा इसके तीन राष्ट्रीय निगमों- एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी और एनएसकेएफडीसी- की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी का प्रसार करने का एक मंच है। यह पहल पात्र लाभार्थियों के लिए उपलब्ध सहायता और विकास के अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उद्यमिता व आर्थिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है।

मंत्रालय ने भारत और विदेशों में विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से लक्षित समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने के लिए भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों का उत्थान आजीविका कार्यक्रम) भी शुरू किया है। इस पहल के तहत, उत्पादों को 'भारत ट्यूलिप'  ब्रांड नाम दिया गया है ताकि ये उत्पाद अधिक लोगों तक पहुंच सके और ऑनलाइन बिक्री आसान हो सके। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करते हुए और व्यापक लोगों के बीच भारत के समृद्ध शिल्प कौशल को बढ़ावा देते हुए कारीगरों की आजीविका को बेहतर बनाना है।

अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराता है तथा यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, सामान लाने-ले जाने का खर्च और दोपहर व रात के भोजन की सुविधा देकर उनकी भागीदारी को सुगम बनाता है। यह सहायता कारीगरों को स्टॉल के किराए तथा भागीदारी से जुड़े विशिष्ट खर्चों को वहन किए बिना मेले में भाग लेने और अपने उत्पादों का प्रदर्शित करने में मदद करती है।

यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान, मंत्रालय ने गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में शिल्प समागम मेले आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है।

मंत्रालय और इसके तीन राष्ट्रीय निगम नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर, 2026 तक आयोजित होने वाले इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (आईआईटीएफ) 2026 और फरवरी 2027 में फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले सहित प्रमुख प्रदर्शनियों में भी भाग लेंगे।

शिल्प समागम मेला और भारत ट्यूलिप जैसी पहलों के माध्यम से, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय लक्षित समूहों के कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच, उद्यमिता तथा आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही यह भारत की पारंपरिक कला व शिल्प के संरक्षण और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में भी सहयोग कर रहा है।

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पीके/केसी/आरटी/एसके


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