सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन रणनीति 2026-2030 पर दस्तावेज
प्रविष्टि तिथि:
07 OCT 2026 2:25PM by PIB Delhi
परिचय:
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) का पालन कर रहा है। मंत्रालय ने वर्ष 2018 से, पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करना शुरू कर दिया है। इस कार्य के व्यापक दायरे को देखते हुए, एक स्पष्ट रणनीतिक रूपरेखा की आवश्यकता थी। तदनुसार, एमओएसपीआई के एनएसओ ने पर्यावरण लेखा के विकास का मार्गदर्शन करने के लिए 'भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन रणनीति 2022-2026' जारी की, जिसमें सामग्री प्रवाह लेखांकन (एमएफएएस), महासागर लेखा, ऊर्जा लेखा और जैव विविधता एवं शहरी क्षेत्रों के लिए विषयगत लेखा आदि क्षेत्रों की पहचान की गई जिन पर उक्त अवधि के लिए कार्य किया जाना है। एमओएसपीआई ने पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर कार्य शुरू कर दिया है और वन, जैव विविधता, आर्द्रभूमि, महासागर लेखा, मृदा, जल गुणवत्ता, कृषि भूमि, ऊर्जा, अवशेष, शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए अध्ययन शुरू किए हैं, प्रकाशन और रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। मंत्रालय पर्यावरण लेखांकन के दायरे को विस्तारित और मजबूत करने के लिए भी प्रयास कर रहा है।
पर्यावरण आर्थिक लेखांकन रणनीति 2026-2030 दस्तावेज के बारे में
पर्यावरण लेखांकन के इतने विशाल और विकसित होते क्षेत्र का प्रभावी ढंग से मापन और निगरानी करने तथा अब तक किए गए प्रयासों और प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए, पर्यावरण लेखांकन के विकास हेतु एक दूरदर्शी रणनीतिक ढांचा स्थापित करना आवश्यक है। रणनीति दस्तावेज में प्रमुख कार्य बिंदुओं और वांछित परिणामों की ओर प्रगति के लिए आवश्यक कदमों का उल्लेख होगा, आंकड़ों में कमियों को दूर किया जाएगा, लेखांकन के दायरे का विस्तार किया जाएगा, तथा कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करने और प्रगति की निगरानी करने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और लक्ष्यों की पहचान की जाएगी। अतः सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने " भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन के लिए रणनीति 2026-2030" शीर्षक से एक दस्तावेज संकलित और जारी किया है।
भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन रणनीति: 2026-2030 इससे पहले के दस्तावेज़ का विस्तार है और इसका उद्देश्य भारत में पर्यावरण लेखांकन के विकास के लिए वन, खनिज, मृदा संसाधन, भूमि, जल, कार्बन भंडार, पर्यावरण संबंधी गतिविधियां, जैव विविधता, पर्यावरण सांख्यिकी आदि जैसे नए विषयों को शामिल करने या इन विषयों के दायरे को बढ़ाने के लिए व्यापक रूपरेखा प्रदान करना है। इन क्षेत्रों का चयन मुख्य रूप से "भारत में हरित राष्ट्रीय लेखा: एक रूपरेखा" रिपोर्ट और एसईईए-सीएफ रूपरेखा में उल्लिखित अनुशंसाओं के आधार पर किया गया है।
यह व्यापक और विस्तृत दस्तावेज़ पर्यावरण लेखांकन के क्षेत्र में भारत की प्रगति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन के विकास को आगे बढ़ाने, आंकड़ों में कमियों को दूर करने संभावित डेटा स्रोतों, नीतिगत निहितार्थों और आगामी वर्षों के लिए एक स्पष्ट कार्य योजना बनाने के लिए एमओएसपीआई द्वारा की गई पहलों पर प्रकाश डाला गया है।
हितधारकों के लिए रणनीति दस्तावेज की उपयोगिता:
राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 के अंतर्गत हुए विकास , विशेष रूप से राष्ट्रीय लेखा ढांचे के भीतर प्राकृतिक संसाधन लेखांकन की मान्यता, पर्यावरण लेखांकन के महत्व को और मजबूत करते हैं। इस रूपरेखा के अंतर्गत शामिल विषय/क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच संबंधों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करेंगे। रणनीतिक ढांचा इन क्षेत्रों में आंकड़ों की कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने में भी सहायक होगा।
यह दस्तावेज़ उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक उपयोगी संदर्भ और मार्गदर्शक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है जो पर्यावरण लेखांकन के क्षेत्र में अपना कार्य शुरू करना या उसे सुदृढ़ करना चाहते हैं। यह रणनीति दस्तावेज़ एक मार्गदर्शन उपकरण है जो स्वतः विकसित होता रहता है। यह रणनीति दस्तावेज़ वर्ष 2026-30 की अवधि के दौरान भारत में पर्यावरण लेखांकन के विकास के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है, ताकि सांख्यिकीय और लेखांकन प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके और पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन के प्रति अधिक व्यवस्थित और समन्वित दृष्टिकोण को सुगम बनाया जा सके।
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पीके/केसी/आरटी/जेके/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2320202)
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