पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ईएसटीआईसी 2026 के विषयगत उद्घाटन समारोह का आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 1:49PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय समुद्री जीव संसाधन और पारिस्थितिकी केंद्र (सीएमएलआरई) ने आज कोच्चि स्थित अपने कार्यालय परिसर में ईएसटीआईसी (उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन) 2026 का उद्घाटन समारोह आयोजित किया। ईएसटीआईसी 2026 का विषय 'महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी' था। इस उद्घाटन समारोह का आयोजन इंडोओबिस (हिंद महासागर जैव विविधता सूचना प्रणाली) पोर्टल की हितधारक सहभागिता कार्यशाला के साथ-साथ किया गया था। इंडोओबिस पोर्टल को देश के गहन महासागर मिशन के तहत चल रहे जैव विविधता अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया है। ईएसटीआईसी उद्घाटन समारोह का सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और डेटा प्रबंधकों को एक साथ लाया गया ताकि समुद्री अनुसंधान और डेटा साझाकरण नेटवर्क को मजबूत किया जा सके।

सीएमएलआरई में आयोजित होने वाला यह उद्घाटन समारोह विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा 10 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित ईएसटीआईसी 2026 के शुभारम्भ के बाद हो रहा है।

सीएमएलआरई कार्यक्रम में वीडियो संदेश के माध्यम से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) में सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने कहा कि, “पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण का गर्वपूर्वक समर्थन करता है जिसमें समुद्री संसाधनों को हमारी आर्थिक वृद्धि और विकसित भारत 2047 के सबसे बड़े चालकों में से एक माना गया है।” उन्होंने आगे कहा कि ईएसटीआईसी वैज्ञानिक सहयोग के लिए भारत का प्रमुख वार्षिक मंच है, जो नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैश्विक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ अत्याधुनिक अनुसंधान, क्रांतिकारी नवाचार और गहन तकनीकी सफलताओं पर चर्चा को एक मंच पर लाता है।

सीएमएलआरई में आयोजित उद्घाटन समारोह में ईएसटीआईसी के 'महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी' विषय पर आधारित वीडियो और सूचना ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। उपस्थित लोगों को ईएसटीआईसी 2026 के दौरान नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27-29 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित होने वाले निम्नलिखित आगामी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई:

  • अमेरिका के वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन में राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार और महासागर एवं जलवायु नीति के निदेशक डॉ. किलापार्टी रामकृष्ण का मुख्य भाषण।
  • विशेषज्ञों का आमंत्रित वार्ता, जिसमें डॉ. सतीश सी. शेनोई, पूर्व निदेशक, आईएनसीओआईएस (भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र), हैदराबाद; डॉ. पूर्णिमा जलिहाल, पूर्व वैज्ञानिक-जी, एनआईओटी (राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान) और संस्थापक और सीटीओ, एंगगिन रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड एवं ओसियनटूओएसिस प्राइवेट लिमिटेड; और डॉ. लीना वाचानी, एसोसिएट डीन और प्रोफेसर, आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) बॉम्बे, मुंबई शामिल है।
  • 'महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी: ज्ञान, नवाचार और सतत प्रौद्योगिकी का सेतु' विषय पर पैनल चर्चा का संचालन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में पूर्व सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने किया। पैनल में रक्षा मंत्रालय के नौसेना महासागर विज्ञान और मौसम विज्ञान निदेशालय के कमोडोर अभिनव डी. बर्वे; आईसीएआर-सीएमएफआरआई (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-समुद्री जीव संसाधन और पारिस्थितिकी केंद्र), कोच्चि के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज; प्लायमाउथ मरीन लेबोरेटरी, यूके की मेधावी रिमोट सेंसिंग वैज्ञानिक डॉ. शुभा सत्येंद्रनाथ; अमेरिकी कंपनी डीपसी टेक्नोलॉजीज इंक. के अध्यक्ष श्री संजय रेड्डी; और अनंत टेक्नोलॉजीज, हैदराबाद के अध्यक्ष और संस्थापक डॉ. सुब्बा राव पावुलुरी शामिल थे।

अपने पूर्ववर्ती संस्करणों की तरह, ईएसटीआईसी 2026 का उद्देश्य सहयोग को बढ़ावा देना और विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए मार्ग प्रशस्त करना है। ईएसटीआईसी 2025 की शानदार सफलता का उल्लेख करते हुए, डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने बताया कि ईएसटीआईसी 2026 को और भी बड़ा, भव्य और अधिक प्रभावशाली बनाने की योजना है। इसमें देश भर के प्रत्येक वैज्ञानिक संस्थान, प्रत्येक सरकारी विभाग, हितधारकों, स्टार्टअप और नवोन्मेषकों की भागीदारी की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा, "यह (ईएसटीआईसी 2026) भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार के संपूर्ण भंडार को प्रदर्शित करने में सहायक होगा।"

ईएसटीआईसी 2026 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के उभरते और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 12 विषयगत क्षेत्रों को शामिल करने की योजना है। इनमें से, महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी एक प्रमुख विषयगत सत्र है जिसका नेतृत्व पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय कर रहा है। ईएसटीआईसी 2026 का विवरण https://ईएसटीआईसी2026.in/  पर उपलब्ध है।

 

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पीके/केसी/आरटी/एके/एसवी  


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