संस्‍कृति मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

65 पीएम स्मृति चिन्हों में बिहार की विरासत, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक धरोहर की झलक


यह संग्रह मधुबनी एवं मंजूषा कला, सिक्की शिल्प, ऐतिहासिक हस्तियों और स्मारक कलाकृतियों को एक साथ लाता है

प्रविष्टि तिथि: 23 SEP 2026 7:47PM by PIB Delhi

‘पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026’ में शामिल 65 स्मृति चिन्हों के संग्रह में बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि की झलकती है। यह संग्रह राज्य की लोक कलाओं, हस्तशिल्पों, आध्यात्मिकता, इतिहास और विरासत की विविध परंपराओं को एक साथ लाता है। इस संग्रह में बारीक मधुबनी चित्रकला एवं सिक्की शिल्प से लेकर सम्मानित मंदिरों, ऐतिहासिक हस्तियों और राष्ट्रीय प्रतीकों की झलक देखने को मिलती है।

यह संग्रह किसी एक परंपरा को दर्शाने के बजाय, बिहार से जुड़ी विविध सांस्कृतिक पहचानों की झलक पेश करता है।

मधुबनी और मिथिला परंपराएं

इस संग्रह का एक बड़ा हिस्सा प्रसिद्ध मिथिला/मधुबनी चित्रकला परंपरा को समर्पित है। इन स्मृति-चिन्हों में राम-सीता विवाह, राम दरबार, छठ पूजा, दस महाविद्या और पवित्र यंत्रों के चित्र शामिल हैं। साथ ही, रामायण को दर्शाने वाली कछनी-शैली की मधुबनी कलाकृति भी है।

इस संग्रह में कई मिथिला पाग भी शामिल हैं, जिन पर मछली और कमल के फूलों जैसे पारंपरिक डिजाइन हाथ से बनाए गए हैं। मिथिला क्षेत्र की एक विशिष्ट सिर की पोशाक, 'पाग' को विभिन्न प्रकार के डिजाइनों और रूपों में पेश किया गया है।

इस क्षेत्र में रची-बसी शिल्प परंपराएं

 

 

बिहार की शिल्प विरासत को सिक्की घास की कला के जरिए भी दर्शाया गया है। इसमें भारत के नए संसद भवन का विस्तृत मॉडल और कोस्टर के साथ जुड़ी पारंपरिक बुनी हुई सिक्की टोकरी शामिल है। बांस की सूप पर हाथ से बनाई गई मधुबनी कलाकृति, लोक चित्रकला और पारंपरिक उपयोगी शिल्प का एक अनूठा संगम है।

एक और विशिष्ट कलाकृति भागलपुर की मंजूषा (अंगिका) चित्रकला है, जिसमें भारत के मानचित्र के साथ भारत माता को दिखाया गया है। पीले, हरे और लाल रंगों के पारंपरिक संयोजन से बनी यह कलाकृति मंजूषा कला की कहानी कहने की परंपरा को दर्शाती है।

इतिहास और आध्यात्मिक विरासत

 

यह संग्रह बिहार के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक परिवेश को भी दर्शाता है। मंगल पांडे की तस्वीर वाली तांबे की एक प्लेट, 1857 की आजादी की पहली लड़ाई से जुड़े इस स्वतंत्रता सेनानी की याद दिलाती है। अन्य कलाकृतियों में अशोक स्तंभ, तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब, भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी और राज्य भर के विभिन्न मंदिरों व तीर्थ स्थलों की झलकियां शामिल हैं।

चित्रित धार्मिक स्थलों में मुंगेर के चंडिका स्थान तथा बड़ी दुर्गा महारानी, ​​सीतामढी स्थित पुनौरा धाम, भोजपुर का मां अरण्य देवी मंदिर, मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर, गोरखनाथ धाम और कैमूर का मुंडेश्वरी देवी मंदिर शामिल हैं।

इस संग्रह में जननायक कर्पूरी ठाकुर, आचार्य चाणक्य और गुरु वाल्मीकि से जुड़े स्मृति चिन्हों के साथ-साथ रामायण और अन्य सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी शामिल है।

1,500 रुपये से लेकर 1,20,000 रुपये तक के आधार मूल्यों वाले इस ‘बिहार संग्रह’ के तहत  संग्रहकर्ताओं को प्रधानमंत्री को भेंट की गई स्मृति-चिन्हों के माध्यम से राज्य की कला, शिल्प, आस्था और इतिहास की जीवंत परंपराओं से जुड़ने का मौका मिलता है।

पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी का 8वां संस्करण 2 अक्टूबर, 2026 तक ऑनलाइन उपलब्ध  है। नीलामी की तारीखों, इसमें शामिल होने की जानकारी और पूरी कैटलॉग के लिए, पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी के आधिकारिक पोर्टल https://pmmementos.gov.in/#/ पर जाएं।

***

पीके/केसी/आरटी/आर


(रिलीज़ आईडी: 2314224) आगंतुक पटल : 119
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: Telugu , English , Urdu , Marathi