सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
भारत को नशामुक्त बनाने के अभियान में चार और आध्यात्मिक संगठन - अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्णा आंदोलन - शामिल; सचिव सुधांश पंत की उपस्थिति में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
जमीनी स्तर पर जागरूकता, रोकथाम, पुनर्वास और नशीले पदार्थों के सेवन के विरुद्ध सामाजिक एकजुटता हेतु साझेदारी
प्रविष्टि तिथि:
09 SEP 2026 5:50PM by PIB Delhi
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने भारत को नशामुक्त बनाने के प्रयास मजबूत करते हुए, आज राजधानी दिल्ली में चार प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों, अर्थात् अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्णा आंदोलन के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।




सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सचिव श्री सुधांश पंत, संयुक्त सचिव (नशीले पदार्थ रोकथाम) डॉ. संदीप आर. राठौड़, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और इन आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
मंत्रालय के चिंतन सम्मेलन हॉल में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से नशा मुक्ति निदेशक श्री अस्तिक कुमार पांडे ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। उपस्थित लोगों की करतल हर्ष ध्वनि के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।




संबंधित संगठनों का प्रतिनिधित्व श्री चंद्र सिंह, अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र; श्रीमती प्रेमा विश्वनाथ, चिन्मय मिशन; दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की साध्वी शिताभा भारती ; और हरे कृष्णा आंदोलन के श्री फतेह चंद शर्मा ने अपने संगठनों की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत विभाग के निरंतर प्रयासों के तहत ये साझेदारियां की गई हैं, जिसका उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन के विरूद्ध जागरूकता फैलाना, इसकी रोकथाम और ऐसे प्रयासों में एकजुटता के लिए आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों पर आधारित संगठनों की व्यापक पहुंच, प्रभाव और सामुदायिक तंत्र का लाभ उठाना है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव श्री सुधांश पंत ने अपने संबोधन में नशामुक्त भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में आध्यात्मिक संगठनों के महत्व पर जोर दिया। मंत्रालय से जुड़े संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान के तहत उनकी सामूहिक पहल से विभाग 34.42 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने में सफल हुआ है।

श्री पंत ने नव-साझेदार संगठनों से आग्रह किया कि वे अपनी अधिकतम पहुंच के साथ नशाले पदार्थों के सेवन के प्रति रोकथाम, जागरूकता और उससे उबरने के संदेश को जमीनी स्तर पर फैलाने में अपने व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार, नागरिक समाज और आध्यात्मिक संगठनों की सामूहिक शक्ति- मादक पदार्थों के सेवन के विरूद्ध सतत सामाजिक आंदोलन खड़ा करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

श्री पंत ने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान के तहत आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी का उद्देश्य आध्यात्मिक शक्ति, सामाजिक दायित्व और सामुदायिक एकजुटता को साथ लाना है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक संगठनों की जमीनी स्तर पर व्यापक उपस्थिति- लोगों और परिवारों में स्थिति अनुरूप ढ़लने की क्षमता बढ़ाने, मादक पदार्थों के सेवन से जुड़े कलंक में कमी लाने और प्रभावित व्यक्तियों को समय पर सहायता, उपचार और पुनर्वास के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
श्री पंत ने कहा कि इन साझेदारियों द्वारा मंत्रालय का उद्देश्य सुनिश्चित करना है कि रोकथाम, नशे की लत से उबरने, करुणा और सामाजिक दायित्व का संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचे और सतत जन आंदोलन बने।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव ने कहा कि आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों का बढ़ता दायरा नशा मुक्त भारत के उद्देश्यों को साकार करने और विकसित भारत के निर्माण में योगदान के सामूहिक संकल्प को और सुदृढ़ बनाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारियों ने जन जागरूकता, स्वयंसेवक एकत्रित करने, मादक द्रव्यों का सेवन रोकने और इससे उबरने वाले लोगों के पुनर्वास में सहायता के उद्देश्य से शुरू की गई पहल में योगाभ्यास, ध्यान, आध्यात्मिक परामर्श और मूल्य-आधारित दृष्टिकोणों को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इससे पहले मंत्रालय ने इस उद्देश्य के लिए आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्मा कुमारिस, संत निरंकारी मिशन, इस्कॉन, श्री राम चंद्र मिशन, अखिल विश्व गायत्री परिवार, शिवानंद योग वेदांत धनवंतरी आश्रम और पतंजलि विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समुदायों के मार्गदर्शन, लोगों में अनुशासन की भावना उत्पन्न करने, मूल्य-आधारित जीवन को बढ़ावा देने तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक तौर पर स्थिति से उबरने में आध्यात्मिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।

इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव ने सहभागी संगठनों के प्रतिनिधियों को नशा-मुक्ति संकल्प दिलाई। संगठनों से आग्रह किया गया कि वे अपने प्रमुख कार्यक्रमों, आयोजनों और सार्वजनिक सभाओं के दौरान इसकी शपथ दिलाएं ताकि नशामुक्त समाज निर्मित करने के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता सुदृढ़ बनाई जा सके।
आयोजन में मादक द्रव्यों के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता और इसके पीड़ितों के पुनर्वास दर्शाने वाली मंत्रालय द्वारा बनाई तीन लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गई। प्रतिभागियों को नशा मुक्त भारत अभियान पोर्टल पर नशा मुक्ति मित्र के रूप में पंजीकरण और ई-संकल्प लेने जैसी पहल की भी जानकारी दी गई।
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पीके/केसी/एकेवी/केएस
(रिलीज़ आईडी: 2308479)
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