पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सहयोग से समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र, कोच्चि में अंतर्राष्ट्रीय गहरे समुद्र के वृहद जीव वर्गीकरण पर क्षमता विकास कार्यक्रम
प्रविष्टि तिथि:
09 SEP 2026 3:15PM by PIB Delhi
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र -सीएमएलआरई कोच्चि में “गहरे समुद्र में जीव वर्गीकरण: जैव विविधता आकलन की मानकीकृत पद्धतियां” संबंधी पांच दिवसीय क्षमता-विकास कार्यक्रम संचालित कर रहा है। 7 से 11 सितंबर 2026 तक चलने वाली यह पहल अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण -आईएसए के सतत समुद्री तल ज्ञान पहल - एसएसकेआई के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण संयुक्त राष्ट्र का स्वायत्त संगठन है जो राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र की सीमाओं से परे गहरे समुद्र तल में खनिज-संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करता है।
यह कार्यक्रम समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र ,अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण, हिंद महासागर रिम एसोसिएशन -आईओआरए और कोरिया के राष्ट्रीय समुद्री जैव विविधता संस्थान -एमएबीआईके के सहयोगात्मक प्रयासों से आयोजित हो रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण की महासचिव, सुश्री लेटिसिया रीस डी कार्वाल्हो ने मुख्य अतिथि के रूप में गहरे समुद्री तल के सुचारू पर्यावरणीय प्रबंधन में वैज्ञानिक ज्ञान और वर्गीकरण संबंधी विशेषज्ञता सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सदस्य देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानकीकृत वैज्ञानिक दृष्टिकोणों की भूमिका रेखांकित करते हुए उन्होंने नवोदित अनुसंधानकर्ताओं को जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक उत्कृष्टता, दृढ़ता और आत्मविश्वास हासिल करने को प्रोत्साहित किया।
इससे पूर्व, समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र -सीएमएलआरई के निदेशक डॉ. आर. एस. महेशकुमार ने स्वागत संबोधन दिया। उद्घाटन सत्र में सीएमएलआरई के वैज्ञानिक-ई डॉ. सेंथिल ने सीएमएलआरई की बहुआयामी समुद्री जैव विविधता अनुसंधान गतिविधियों पर व्यापक प्रस्तुति दी। इसके बाद, चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान -एनआईओटी के समुद्री जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग के अध्यक्ष और वैज्ञानिक-जी, डॉ. जी. धरानी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के डीप ओशन मिशन के तहत समुद्री जैव विविधता अध्ययन पर विशेष व्याख्यान दिया । समारोह में दक्षिण कोरिया के एमएबीके द्वारा सतत समुद्री तल ज्ञान पहल कार्यक्रम के तहत संस्थागत गतिविधियों और प्रतिबद्धताओं का उल्लेख किया गया। गोवा स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. बबन इंगोले ने अपने संबोधन में हिंद महासागर में तटीय जीवों के अध्ययन पर विचार रखे।
वैश्विक भागीदारी और तकनीकी व्यापकता
प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिंद महासागर क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण सदस्य देशों के लगभग 30 नवोदित अनुसंधानकर्ता और वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका, केन्या, बांग्लादेश, मॉरीशस, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, मोज़ाम्बिक, तंजानिया, थाईलैंड, ओमान और भारत शामिल हैं।
पांच दिवसीय गहन क्षमता विकास कार्यक्रम में प्रतिभागी निम्नलिखित गतिविधियों में भाग लेंगे:
- विशेष व्याख्यान, क्षेत्र दौरा और तटीय नमूनों का संग्रह
- वृहद जीव-जंतुओं की पहचान और परिणाम रिपोर्टिंग में व्यावहारिक प्रयोगशाला प्रशिक्षण
- पारंपरिक वर्गीकरण, डीएनए बारकोडिंग, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और जैव विविधता डेटा विश्लेषण में उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण
- नमूना संकलन और जैव विविधता ओपन एक्सेस डेटा प्रकाशन (दुनिया भर के जीव-जंतुओं, वनस्पतियों, पारिस्थितिक तंत्र और आनुवंशिक संसाधनों से जुड़े वैज्ञानिक डेटा को इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से साझा और प्रकाशित करने की प्रक्रिया जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति निर्धारण को बढ़ावा देना है) पर कार्यशालाएं
इस क्षमता विकास कार्यक्रम में ब्राजील, दक्षिण कोरिया, पुर्तगाल, स्वीडन, मॉरीशस, इंडोनेशिया, जर्मनी और सिंगापुर के प्रख्यात राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ ही सहयोगी भारतीय संस्थानों और सीएमएलआरई के विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
आयोजन का महत्व
इस ऐतिहासिक आईएसए क्षमता-विकास कार्यक्रम की मेजबानी से गहरे समुद्र में जैव विविधता अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के बढ़ते नेतृत्व को बल मिलेगा। यह पहल तटीय जैव विविधता आकलन में मानकीकृत पद्धतियों और सुदृढ़ अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक साझेदारियों को बढ़ावा देकर सतत हिंद महासागर अन्वेषण और पर्यावरण प्रबंधन की दिशा में उल्लेखनीय कदम है।

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पीके/केसी/एकेवी/केएस
(रिलीज़ आईडी: 2308330)
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