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केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आईआईटी दिल्ली में हैंडलूम टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया


भारत के हैंडलूम क्षेत्र में नवाचार, टिकाऊपन और डिजिटल परिवर्तन को तेज करने के लिए पांच प्रमुख पहलों का शुभारंभ

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 7:37PM by PIB Delhi

आज केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आईआईटी दिल्ली में हैंडलूम टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE-HT) का उद्घाटन किया, जो प्रौद्योगिकी, नवाचार और शोध के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के सरकार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उद्घाटन समारोह में श्रीमती नीलम शामी राव, सचिव, वस्त्र मंत्रालय; डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हैंडलूम); श्रीमती अमृत राज, विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट्स); प्रो. अरविंद के. नेमा, निदेशक-इन-चार्ज, आईआईटी दिल्ली; प्रो. अश्विनी अग्रवाल, डीन, आईआईटीडी; वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, शोधकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक, हैंडलूम उद्योग के प्रतिनिधि तथा देश भर के बुनकर उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सरकार की उस दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें भारत की समृद्ध बुनाई धरोहर को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़कर एक भविष्य-उन्मुख हैंडलूम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नवाचार, डिजिटल तकनीक, टिकाऊपन और उद्यमशीलता बुनकरों की उत्पादकता बढ़ाने, बाजार तक पहुंच सुदृढ़ करने और उनकी आजीविका सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

श्रीमती नीलम शामी राव ने अकादमी, उद्योग और सरकारी संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि हैंडलूम क्षेत्र के लिए व्यवहारिक तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकें।

डॉ. एम. बीना ने कहा कि यह सेंटर शोध, ज्ञान साझा करने, कौशल विकास और नवाचार के लिए एक उत्प्रेरक बनेगा और बुनकरों, डिजाइनरों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर सृजित करेगा।

कार्यक्रम के दौरान केंद्र की पाँच प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया गया:

  • हैंडलूम 4.0 मोबाइल ऐप, जो कारखाने/करघे की उत्पादकता, गुणवत्ता, रखरखाव और स्थिरता की डिजिटल मॉनिटरिंग सक्षम करेगा।
  • हैंडलूम e-विद्या, हैंडलूम पारिस्थितिकी तंत्र में क्षमता निर्माण के लिए एक समग्र डिजिटल लर्निंग और नॉलेज प्लेटफ़ॉर्म।
  • HandloomX, एक एक्सेलेरेटर और इनक्यूबेशन प्लेटफ़ॉर्म जो मंत्रालय की 5F वैल्यू चेन में काम कर रहे स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स का समर्थन करेगा।
  • कलागृह हैंडलूम स्टूडियो (GenZ डिज़ाइन स्टूडियो), जो कस्टमाइज़ेशन और विज़ुअलाइज़ेशन के माध्यम से समकालीन उपभोक्ताओं को प्रामाणिक हैंडलूम उत्पादों से जोड़ने के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग करेगा।
  • थ्रेड्स ऑफ वलर, एक स्थिरता पहल है जो वैज्ञानिक रूप से रीसायकल किए गए रक्षा वस्त्रों  को कुशल शिल्पकलाओं के साथ प्रीमियम हैंडलूम फैब्रिक्स में परिवर्तित करती है, ।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा करघा आधुनिकीकरण, श्रमिक कार्यक्षमता (एर्गोनॉमिक्स), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टिकाऊपन, कार्यात्मक नवाचार और डिजिटल तकनीकों में शोध किया जाएगा। यह हैंडलूम ज्ञान का एक राष्ट्रीय रिपॉज़िटरी विकसित करेगा, एआई-सक्षम उपकरण बनाएगा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मदद करेगा। यह स्टार्टअप्स का समर्थन करेगा और अगले पाँच वर्षों में कम से कम 1,000 बुनकरों, संकाय सदस्यों और हैंडलूम पेशेवरों को प्रशिक्षित करेगा।

केंद्र की स्थापना वस्त्र मंत्रालय की भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को उन्नत प्रौद्योगिकियों, शोध क्षमताओं और नवाचार-आधारित समाधानों से सुसज्जित करने की प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है। अकादमी, उद्योग, स्टार्टअप्स और हैंडलूम संस्थानों को एक साथ लाकर, यह सेंटर पूरे हैंडलूम पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और भारतीय हैंडलूम को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने में योगदान देगा।

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पीके/ केसी /एमएम / डीए


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