पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
संसद प्रश्न: महासागर अवलोकन नेटवर्क और पूर्वानुमान
प्रविष्टि तिथि:
30 JUL 2026 2:20PM by PIB Delhi
महासागर अवलोकन बुऑय, डीप सी मूरिंग और तटीय अवलोकन प्रणालियों से युक्त महासागर अवलोकन नेटवर्क की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
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- महासागर अवलोकन मूरिंग: महासागरीय धाराओं और ज़ोप्लांकटन बायोमास की निगरानी के लिए कुल 19 उपसतही मूरिंग (मुख्य भूमि के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में 16 और भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में 3) कार्यरत हैं, जो महासागरीय मॉडल सत्यापन के लिए महत्वपूर्ण अवलोकन उत्पन्न करते हैं।
- सुनामी निगरानी नेटवर्क: भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को 17 ब्रॉडबैंड भूकंपीय स्टेशनों, गहरे समुद्र में स्थित 7 सुनामी बुआयों और 36 तटीय ज्वार गेजों के नेटवर्क से मदद मिलती है। यह तत्क्षण सुनामी का पता लगाने में सक्षम है और निगरानी के लिए इसे 35 ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) रिसीवर और मजबूत गति त्वरणमापी से मदद मिलती है।
- तटीय अवलोकन प्रणालियां: भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) तटीय और समुद्र विज्ञान संबंधी स्थितियों की निरंतर निगरानी के लिए 17 दिशात्मक तरंग चालक बुऑय, 20 ध्वनिक डॉप्लर धारा प्रोफाइलर (एडीसीपी), 32 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस), 2 जल गुणवत्ता बुऑय और 50 ज्वार गेजों से युक्त एक व्यापक तटीय अवलोकन नेटवर्क संचालित करता है।
- गहरे समुद्र और स्वायत्त अवलोकन: आईएनसीओआईएस ने 302 आर्गो प्रोफाइलिंग फ्लोट्स (2014-2025), 12 गहरे समुद्र ग्लाइडर मिशन, 45 ड्रिफ्टिंग बुऑय और 64 वेव ड्रिफ्टर्स तैनात किए हैं। इस अवलोकन नेटवर्क को वर्टिकल माइक्रोस्ट्रक्चर प्रोफाइलर्स (वीएमपी), अंडरवे कंडक्टिविटी-टेम्परेचर-डेप्थ (यूसीटीडी) सिस्टम और वायर वॉकर सिस्टम जैसे उन्नत उपकरणों द्वारा और मजबूत किया गया है। इससे बेहतर समुद्री अवलोकन और अनुसंधान में सहयोग मिलता है।
महासागर अवलोकन नेटवर्क संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और महासागर पूर्वानुमान प्रणालियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, लगभग वास्तविक समय के महासागरीय अवलोकन प्रदान करके मानसून पूर्वानुमान, चक्रवात पूर्वानुमान और महासागरीय स्थिति पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आर्गो प्रोफाइलिंग फ्लोट्स, लंगरयुक्त बुऑय, ज्वार गेज और अन्य महासागरीय अवलोकन प्लेटफार्मों से प्राप्त अवलोकन डेटा को वैश्विक दूरसंचार प्रणाली (जीटीएस) के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय महासागरीय सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) को प्रेषित किया जाता है, जहां डेटा की गुणवत्ता की जांच की जाती है और इसे परिचालन संख्यात्मक मॉडलों में समाहित किया जाता है। इससे सटीक प्रारंभिक महासागरीय स्थितियों का निर्धारण संभव होता है, जिससे पूर्वानुमान की अनिश्चितताएं कम होती हैं और मानसून एवं चक्रवात पूर्वानुमानों के साथ-साथ महासागरीय स्थिति पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ती है। इसके अलावा, तरंग चालक बुऑय से प्राप्त वास्तविक समय के अवलोकनों का उपयोग आईएनसीओआईएस द्वारा परिचालन तरंग पूर्वानुमान, तटीय बाढ़ आकलन और तटीय प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं के प्रसार के लिए किया जाता है, जिससे समुद्री संचालन, तटीय समुदायों और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहायता मिलती है।
सरकार राष्ट्रीय महासागर अवलोकन नेटवर्क के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर उपाय कर रही है। हाल की पहलों में सुनामी निगरानी और तटीय अवलोकन को बेहतर बनाने के लिए 14 अतिरिक्त ज्वारमापी यंत्र और 15 सह-स्थित वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली (जीएनएसएस) रिसीवर की स्थापना शामिल है। उत्तरी भारतीय तटीय जल को प्रभावित करने वाली दक्षिणी महासागर की लहरों के पूर्वानुमान में सुधार के लिए मॉरीशस के तट पर एक दिशात्मक तरंग चालक बुऑय भी तैनात किया गया है। इसके अलावा, महासागर अवलोकन प्रणालियों की तैनाती, सेवा और रखरखाव के लिए मानसून से पहले और बाद में नियमित अनुसंधान पोत यात्राओं को संस्थागत रूप दिया गया है। राष्ट्रीय महासागर अवलोकन नेटवर्क के सतत संचालन, रखरखाव और विस्तार को सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईओ), राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) और अन्य भागीदार संस्थानों के साथ सहयोग को भी मजबूत किया गया है।
महासागर अवलोकन नेटवर्क से प्राप्त वास्तविक समय के अवलोकन भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) को मिलते हैं और मौसम एवं महासागर पूर्वानुमानों को बेहतर बनाने के लिए परिचालन महासागर एवं संयुक्त वायुमंडल-महासागर पूर्वानुमान प्रणालियों में समाहित किए जाते हैं। इन अवलोकनों के समावेश से 2014 की तुलना में तरंग पूर्वानुमान की सटीकता में लगभग 43 प्रतिशत का सुधार हुआ है, और पांच दिवसीय पूर्वानुमान अवधि में निरंतर सुधार देखा गया है। उन्नत अवलोकन नेटवर्क ने तटीय पूर्वानुमान प्रणालियों को भी लगभग 70 प्रतिशत की सटीकता तक पहुंचने में सक्षम बनाया है। इसके अतिरिक्त, सुनामी बुऑय, ज्वार गेज, जीएनएसएस रिसीवर और तीव्र गति त्वरणमापी से प्राप्त अवलोकन आईएनसीओआईएस को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, सुनामी उत्पन्न करने वाले भूकंप के बाद निर्धारित 10 मिनट की समय सीमा के भीतर सुनामी संबंधी चेतावनी जारी करने में सक्षम बनाया हैं। वास्तविक समय के समुद्री प्रेक्षणों को आईएनसीओआईएस ग्लोबल ओशन डेटा एसिमिलेशन सिस्टम (आईएनसीओआईएस-जीओडीएस) में समाहित किया जाता है, जो मौसमी और विस्तारित अवधि के पूर्वानुमानों के लिए उपयोग किए जाने वाले युग्मित पूर्वानुमान प्रणाली (सीएफएस) और चक्रवात पूर्वानुमान के लिए उपयोग किए जाने वाले हरिकेन वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग (एचडब्ल्यूआरएफ) मॉडल के लिए प्रारंभिक समुद्री परिस्थितियां प्रदान करता है। इन डेटा एसिमिलेशन प्रणालियों ने मानसून, चक्रवात और समुद्री स्थिति के पूर्वानुमान में देश की क्षमताओं को काफी मजबूत किया है।
यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एके/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2291796)
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