पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: ज़िला स्तर पर लू की भविष्यवाणी और शुरुआती चेतावनी प्रणालियाँ

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 2:13PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ज़िला स्तर पर दिन में दो बार लू के लिए चेतावनी और अलर्ट जारी करता है, जिसमें प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान (आईबीएफ) भी शामिल हैं। इसमें लू के संभावित असर और उससे निपटने के लिए सुझाए गए उपाय शामिल होते हैं, जैसा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशानिर्देशों और हीट एक्शन प्लान में बताया गया है। ज़िला स्तर पर ये प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियाँ आपदा प्रबंधकों, संबंधित पक्षों, मीडिया और आम जनता तक कई संचार माध्यमों से पहुँचाई जाती हैं। इनमें ईमेल, एपीआई, मोबाइल एप्लिकेशन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया, मास कम्युनिकेशन सिस्टम और कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) आधारित वितरण प्रणालियाँ शामिल हैं।

मौसम विज्ञान विभाग  ने भारत काजलवायु संबंधी खतरे और भेद्यता मानचित्र’ ('हैज़र्ड एंड वल्नरेबिलिटी एटलस') तैयार किया है। यह लू के खतरों के प्रति ज़िले-वार संवेदनशीलता का आकलन प्रदान करता है (https://imdpune.gov.in/hazardatlas/index.html) इस एटलस में देश के सभी ज़िले शामिल हैं, जिनमें राजस्थान का बाड़मेर ज़िला भी है। एटलस के अनुसार, बाड़मेर ज़िले का हीटवेव वल्नरेबिलिटी इंडेक्स (संवेदनशीलता सूचकांक) 0 से 1 के पैमाने पर 0.54 है, जो इसे 'उच्च संवेदनशीलता' (High Vulnerability) की श्रेणी में रखता है।

मौसम विज्ञान विभाग नियमित रूप से लू के बारे में अपने हीटवेव बुलेटिन विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ साझा करता है। इनमें आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग, श्रम विभाग, भारतीय रेल, परिवहन विभाग, वन विभाग आदि शामिल हैं। इसके अलावा, मौसम विज्ञान विभाग वेबसाइट, मास मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्स ऐप ग्रुप, मोबाइल ऐप, एपीआई, कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल आदि के माध्यम से आम जनता के साथ भी लू की चेतावनियाँ साझा करता है। प्रायोगिक पहल के तौर पर, मौसम विज्ञान विभाग ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को उनके संबंधित संगठनों के माध्यम से सरल, आसानी से समझ में आने वाले और अमल करने योग्य प्रारूप में लू की प्रभाव-आधारित चेतावनियाँ पहुँचाना शुरू किया है। एनडीएमए द्वारा विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ नियमित बैठकें भी की जाती हैं ताकि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर पहले से तैयारी और ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई की जा सके।  हीटवेव (लू) से जुड़ी ज़्यादातर जानकारी वेब-जीआईएस आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है और आम जनता के लिए खुली है (https://dss.imd.gov.in/dwr_img/GIS/heatwave.html)

सरकार ने एनडीएमए, राज्य एजेंसियों और स्थानीय स्वास्थ्य विभागों के साथ मिलकर भारत मौसम विज्ञान विभाग के ज़रिए लू की निगरानी, ​​पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को काफ़ी मज़बूत किया है। देश के कई हिस्सों में बचाव के उपायों के बारे में पहले से चेतावनी और सलाह देने के लिए 'हीट एक्शन प्लान' लागू किए गए हैं। 2016 से, मौसम विज्ञान विभाग योजना बनाने में सहायता के लिए तापमान और हीटवेव के बारे में मौसमी अनुमान जारी कर रहा है। इसके साथ ही, जनता, आपदा प्रबंधन से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए मासिक अनुमान, लंबे समय (साप्ताहिक) के पूर्वानुमान और दिन में दो बार हीटवेव बुलेटिन भी जारी किए जाते हैं।

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/पीके


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