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डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, क्षमता निर्माण और वित्तीय सुधारों के माध्यम से नगरपालिका प्रशासन को पेशेवर बनाने का आह्वान किया, आईआईपीए और आईसीएआई ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए


प्रौद्योगिकी, साक्ष्य-आधारित शासन और पेशेवर वित्तीय प्रबंधन शहरी स्थानीय निकायों की अगली पीढ़ी को आकार देंगे: डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नगरपालिका लेखांकन और वित्तीय शासन के आधुनिकीकरण के लिए संस्थागत साझेदारी का समर्थन किया

आईआईपीए और आईसीएआई समझौता ज्ञापन ने नगरपालिका क्षमता निर्माण और वित्तीय प्रबंधन सुधारों में एक नया अध्याय शुरू किया

प्रविष्टि तिथि: 21 JUL 2026 4:25PM by PIB Delhi

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत के अगली पीढ़ी के शासन सुधारों को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने, पेशेवर क्षमता निर्माण और जमीनी स्तर पर सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन द्वारा संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगरपालिका लेखांकन अब केवल एक वित्तीय कार्य नहीं है, बल्कि पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित और नागरिक-केंद्रित शहरी शासन की नींव है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और पेशेवर विशेषज्ञता द्वारा समर्थित मजबूत संस्थाएं, तेजी से शहरीकरण हो रहे राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम कुशल शहरी स्थानीय निकायों के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

केंद्रीय मंत्री महोदय नगर निगमों की क्षमता निर्माण और नगरपालिका लेखांकन और वित्तीय प्रबंधन पद्धतियों को सुदृढ़ करने के लिए शहरी अध्ययन केंद्र (सीयूएस), भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) और भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन समारोह  को संबोधित कर रहे थे। इस सहयोग का उद्देश्य शासन, अनुसंधान और लोक प्रशासन में आईआईपीए की विशेषज्ञता को लेखांकन, लेखापरीक्षा और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में आईसीएआई की व्यावसायिक क्षमताओं के साथ संयोजित करना है, ताकि नगरपालिकाओं में संस्थागत सुधारों को समर्थन मिल सके।

स्थानीय शासन को सुदृढ़ करने की दिशा में इस साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दशकों से विकसित होकर दोनों संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित उत्कृष्टता केंद्र बन चुके हैं और इनका एक साथ आना ज्ञान, शासन और व्यावसायिक दक्षता का स्वाभाविक संगम है। उन्होंने कहा कि जहां आईआईपीए ने सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने की अपनी पारंपरिक भूमिका से कहीं आगे बढ़कर निर्वाचित प्रतिनिधियों, न्यायिक अधिकारियों, रक्षा कर्मियों, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों की सेवा करने के लिए विस्तार किया है, वहीं आईसीएआई वित्तीय प्रबंधन में अद्वितीय विशेषज्ञता के साथ विश्व के सबसे बड़े पेशेवर लेखा निकायों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि इन पूरक शक्तियों को एक साथ लाने से नगरपालिका स्तर पर शासन में सुधार के लिए एक मजबूत संस्थागत मंच का निर्माण होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज शासन व्यवस्था प्रौद्योगिकी, विश्वसनीय डेटा और पेशेवर प्रणालियों से अधिकाधिक प्रभावित हो रही है। इससे नगरपालिका लेखा सुधार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग, समझौता ज्ञापन में उल्लिखित गतिविधियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों संस्थानों द्वारा अनुसंधान, नवाचार और संस्थागत शिक्षा के माध्यम से शहरी शासन व्यवस्था में सुधार के नए अवसरों की पहचान करने के साथ-साथ निरंतर विकसित होता रहेगा। उन्होंने कहा कि आईआईपीए और आईसीएआई के व्यापक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से निरंतर क्षमता निर्माण पहलों द्वारा इस साझेदारी का लाभ देश भर की नगरपालिकाओं तक पहुंच सकेंगे।

यह समझौता ज्ञापन नगरपालिका लेखा प्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पद्धतियों को सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान और ज्ञान विकास, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, सलाहकार सेवाएं और तकनीकी सहायता हेतु सहयोग का एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है। दोनों संस्थान संयुक्त रूप से नीतिगत अनुसंधान, सर्वेक्षण, प्रलेखन और ज्ञान उत्पाद तैयार करने का कार्य करेंगे, नगरपालिका अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार, सम्मेलन और वेबिनार आयोजित करेंगे, शिक्षण संसाधन विकसित करेंगे और शहरी स्थानीय निकायों में वित्तीय जवाबदेही और शासन में सुधार के लिए पेशेवर विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाएंगे। यह समझौता आरंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए लागू रहेगा।

इस अवसर डॉ. सुरेंद्रकुमार बागडे, आईएएस, महानिदेशक, आईआईपीए; सीए प्रसन्ना कुमार डी., अध्यक्ष, आईसीएआई; सीए हंस राज चुघ, अध्यक्ष, लोक और  सरकारी वित्तीय प्रबंधन समिति (पीजीएफएमसी), आईसीएआई; प्रोफेसर वीएन आलोक, समन्वयक, शहरी अध्ययन केंद्र; आईआईपीए के वरिष्ठ संकाय सदस्य; और आईसीएआई के पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह सहयोग इसी वर्ष की शुरुआत में आईआईपीए और आईसीएआई द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 16वें वित्त आयोग और स्थानीय सार्वजनिक वित्त पर सफल राष्ट्रीय सम्मेलन पर आधारित है। इसमें भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, रिजर्व बैंक, नीति आयोग, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान, राष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त और नीति संस्थान और नगर निकायों के प्रतिनिधियों ने स्थानीय सार्वजनिक वित्त में सुधारों पर विचार-विमर्श किया था। इस दौरान नगर लेखा प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और वर्तमान साझेदारी की नींव रखी।

1966 में स्थापित, आईआईपीए के शहरी अध्ययन केंद्र ने शहरी शासन में अनुसंधान, नीति विश्लेषण और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वर्तमान में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सहयोग से छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत है। केंद्र ने हरियाणा सरकार के साथ राज्य के सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों में लेखा सुधारों का समर्थन करने के लिए पहले ही चर्चा शुरू कर दी है और उम्मीद है कि इससे प्राप्त अनुभव देश के अन्य हिस्सों में इसी तरह की पहलों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करेगा।

कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर बल दिया कि शहरी शासन में स्थायी सुधार के लिए पेशेवर क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत शिक्षा में निरंतर निवेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी संयुक्त अनुसंधान, व्यावहारिक टूलकिट और प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास, तकनीकी सलाहकार सहायता और संरचित ज्ञान आदान-प्रदान को सुगम बनाएगी। साथ ही प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर राज्यों में इसका व्यापक प्रभाव उत्पन्न करेगी। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग व्यावहारिक क्षेत्र के अनुभव को आधुनिक लेखा मानकों और प्रौद्योगिकी-आधारित वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकृत करके राष्ट्रीय नगर निगम लेखा नियमावली (एनएमएएम) के चल रहे संशोधन में सहायक होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी नगरपालिका प्रशासन और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के लिए संस्थागत सहयोग में एक नया अध्याय खोलेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल ज्ञान, नवाचार और पेशेवर उत्कृष्टता के माध्यम से शासन को मजबूत करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही शहरी स्थानीय निकायों को आधुनिक वित्तीय प्रणालियों, उन्नत संस्थागत क्षमता और विश्व स्तर पर तुलनीय लेखांकन पद्धतियों से लैस करती है। यह अंततः बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण और लोगो के जीवन स्तर में सुधार में बदलती हैं।

फोटो : केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में शहरी अध्ययन केंद्र (सीयूएस) और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के दौरान बात करते हुए

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पीके/केसी/एसके


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