रेल मंत्रालय
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत में 75 अमृत भारत स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित किया

प्रविष्टि तिथि: 18 JUL 2026 7:43PM by PIB Delhi

एक बड़े ढ़ांचागत पैकेज के तहत, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रमुख अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया।

यह प्रधानमंत्री द्वारा अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत फिर से विकसित किए गए स्टेशनों का दूसरा बड़ा राष्ट्रव्यापी समर्पण कार्यक्रम है। इससे पहले, 22 मई 2025 को प्रधानमंत्री ने 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 103 पुनर्विकसित अमृत भारत स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित किया था।

इन नए रूप में विकसित स्टेशनों को आधुनिक और यात्रियों की सुविधा पर केंद्रित ट्रांजिट हब में तब्दील किया गया है। अब इनमें बेहतर सुविधाएं और आसान पहुंच की व्यवस्था है, साथ ही इनकी वास्तुकला स्थानीय और क्षेत्रीय विरासत को दर्शाती है। इसके अलावा इनमें भविष्य की जरूरतों के अनुसार ढ़ांचागत बदलाव भी किए गए हैं। देश भर के 20 राज्यों में स्थित इन 75 नए स्टेशनों को लगभग 1,570 करोड़ रुपये की कुल लागत से पुर्नविकसित किया गया है।

75 अमृत भारत स्टेशनों की राज्य-वार जानकारी:

आंध्र प्रदेश (3)

  • कंबम: यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ राज्य की ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है।
  • मंगलगीरी: पनकला नरसिम्हा स्वामी मंदिर की विरासत को दिखाता है।
  • रायनपाडु: आंध्र प्रदेश के मंदिरों की विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ता है।

असम (1)

  • माजबाट: असम के चाय बागानों और प्राकृतिक विरासत से प्रेरित है।

बिहार (1)

  • शिवनारायणपुर: भागलपुर की मशहूर रेशम की बुनाई की विरासत को दिखाता है।

छत्तीसगढ़ (3)

  • बालोद: कृषि की मज़बूती और बुनाई की परंपराओं को उजागर करता है।
  • चंपा जंक्शन: क्षेत्रीय संपर्क और कृषि विरासत को दिखाता है।
  • सरोना: बढ़ती संपर्क सुविधाएं और स्थानीय बुनाई परंपराओं को प्रदर्शित करता है।

गुजरात (4)

  • भक्तिनगर: गुजरात की औद्योगिक तरक्की और रेलवे की विरासत को दिखाता है।
  • गोधरा जंक्शन: राज्य की रेलवे विरासत का सम्मान करता है।
  • पोरबंदर: महात्मा गांधी के मूल्यों और तटीय विरासत का जश्न मनाता है।
  • प्रतापनगर: गुजरात की सबसे बड़ी पुर्नविकास परियोजना, जो औद्योगिक विकास को दिखाती है।

हरियाणा (2)

  • कालका: कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे का प्रवेश द्वार।
  • नरवाना: हरियाणा की कृषि विरासत को दिखाता है।

हिमाचल प्रदेश (1)

  • अंब अंदौरा: पहाड़ी इलाकों की पारंपरिक वास्तुकला और आध्यात्मिक विरासत को दिखाता है।

झारखंड (2)

  • मुरी जंक्शन: यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देता है।
  • पिस्का: शहरी संपर्क सुविधाओं के विस्तार को दिखाता है।

कर्नाटक (4)

  • अलनावर जंक्शन: जंगलों वाले इलाकों और ऐतिहासिक पहचान को दिखाता है।
  • बदामी: बदामी गुफा मंदिरों से प्रेरित।
  • बंटावाला: मंदिर की वास्तुकला और हस्तशिल्प परंपराओं पर आधारित।
  • कोप्पल: कर्नाटक के ऐतिहासिक नज़ारों को दिखाता है।

केरल (6)

  • अंगमाली से कलाडी: आदि शंकराचार्य के जन्मस्थान पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए।
  • चालाकुडी: प्राकृतिक नज़ारों और तटीय विरासत को दिखाता है।
  • नीलांबुर रोड: केरल के जंगलों और रेलवे की विरासत को दिखाता है।
  • परप्पनंगडी: तटीय सुंदरता और सांस्कृतिक परंपराओं को दिखाता है।
  • थलासेरी: शहर के किले और खान-पान की विरासत को दिखाता है।
  • तिरूर: प्राकृतिक नज़ारों और यात्रियों के लिए विश्व-स्तरीय सुविधाओं का मेल।

मध्य प्रदेश (13)

  • अशोकनगर: राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दिखाता है।
  • बालाघाट: जनजातीय कला परंपराओं और जंगलों को शामिल करता है।
  • ब्योहारी: जंगलों और जनजातीय कला को दिखाता है।
  • भिंड: बुंदेलखंड की विरासत को दिखाता है।
  • छिंदवाड़ा: जंगलों की विरासत का जश्न मनाता है।
  • हरपालपुर: बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान को दिखाता है।
  • जुन्नार देव: जनजातीय कला और जंगलों के नज़ारों से प्रेरित।
  • एमसीएस छतरपुर: बुंदेलखंड की विरासत का जश्न मनाता है।
  • नैनपुर जंक्शन: अपनी ऐतिहासिक रेलवे विरासत का सम्मान करता है।
  • सांची: यूनेस्को की सूची में शामिल बौद्ध विरासत के आधार पर डिज़ाइन किया गया।
  • शिवपुरी: ऐतिहासिक पहचान को दिखाता है।
  • टीकमगढ़: बुंदेलखंड की विरासत को उजागर करता है।
  • विदिशा: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दिखाता है।

महाराष्ट्र (2)

  • बारामती: इस क्षेत्र में खेती-बाड़ी से जुड़े नए प्रयोगों को दिखाता है।
  • नंदुरा: विदर्भ की कपड़ों की विरासत का जश्न मनाता है।

ओडिशा (7)

  • बलांगीर: शाही विरासत और संबलपुरी हथकरघा से प्रेरित।
  • बारिपदा: जनजातीय और सांस्कृतिक परंपराओं को दिखाता है।
  • बरपाली: संबलपुर की बुनाई की परंपराओं का जश्न मनाता है।
  • बिमलगढ़ जंक्शन: खनन क्षेत्र की विरासत को दिखाता है।
  • केसिंगा: ओडिशा की सांस्कृतिक परंपराओं को उजागर करता है।
  • पारलाखेमुंडी: पारलाखेमुंडी की शाही विरासत से प्रेरित।
  • तालचेर: राज्य की खनन विरासत को दिखाता है।

पंजाब (4)

  • जालंधर कैंट: सैन्य विरासत और आधुनिक ढांचे का मेल।
  • एस.ए.एस. नगर (मोहाली): पंजाब की उद्यमी पहचान को दिखाता है।
  • श्री आनंदपुर साहिब: सिख विरासत का जश्न मनाता है।
  • श्री मुक्तसर साहिब: मुक्तसर की ऐतिहासिक लड़ाई का सम्मान करता है।

राजस्थान (8)

  • बाड़मेर: रेगिस्तानी विरासत को दिखाता है।
  • दौसा: किले और महल की वास्तुकला से प्रेरित।
  • डीग: डीग पैलेस की विरासत का जश्न मनाता है।
  • गंगापुर सिटी: क्षेत्रीय वास्तुकला की विरासत को दिखाता है।
  • गोटन: राजस्थान की वास्तुकला की खासियत को उजागर करता है।
  • जैसलमेर: गोल्डन फोर्ट और रेगिस्तानी विरासत से प्रेरित।
  • खैरथल: कालातीत क्षेत्रीय वास्तुकला को दिखाता है।
  • सोमेसर: रेगिस्तानी विरासत का जश्न।

तमिलनाडु (3)

  • चेन्नई पार्क: तमिल वास्तुकला की विरासत को दिखाता है।
  • चिन्ना सलेम: क्षेत्रीय वास्तुकला को उजागर करता है।
  • कुन्नूर: यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त नीलगिरि माउंटेन रेलवे का सम्मान करता है।

तेलंगाना (1)

  • हाई-टेक सिटी: हैदराबाद की नवाचार आधारित पहचान को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश (7)

  • ऐशबाग जंक्शन: लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान को दिखाता है।
  • धामपुर: स्थानीय विरासत को उजागर करता है।
  • फतेहपुर: राज्य की विरासत को दिखाते हुए संपर्क को मजबूत करता है।
  • मोदीनगर: शहर की औद्योगिक पहचान को दिखाता है।
  • पनकी धाम: पनकी धाम आने वाले तीर्थयात्रियों की सेवा करता है।
  • शामली: औद्योगिक शहर के लिए संपर्क को मजबूत करता है।
  • विंध्याचल: विंध्यवासिनी मंदिर का प्रवेश द्वार।

उत्तराखंड (1)

  • हर्रावाला: आधुनिक डिज़ाइन के साथ दून घाटी का प्रवेश द्वार।

पश्चिम बंगाल (2)

  • हल्दीबाड़ी: उत्तर बंगाल की रेलवे विरासत को दिखाता है।
  • जलपाईगुड़ी रोड: उत्तर बंगाल की विरासत और रेलवे की परंपरा का जश्न।

अमृत ​​भारत स्टेशन योजना के बारे में

रेल मंत्रालय ने दिसंबर 2022 में अमृत भारत स्टेशन योजना (एबीएसएस) की शुरूआत की थी। यह एक लंबे समय तक चलने वाली और चरणों में पूरी होने वाली मास्टर-प्लानिंग पहल है, जिसका मकसद रेलवे स्टेशनों को सिर्फ ऊपरी तौर पर चमकाने के बजाय, उन्हें आधुनिक शहर के केंद्रों के रूप में फिर से विकसित करना है।

अब तक, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 261 रेलवे स्टेशनों पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इस योजना के तहत देश भर में 1,340 रेलवे स्टेशनों को चरणों में फिर से विकसित करने की योजना है और बाकी स्टेशनों पर काम अलग-अलग चरणों में चल रहा है।

यह दुनिया के सबसे बड़े स्टेशन-आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक है, जिसके तहत देश भर में कई चरणों में निर्माण कार्य चल रहा है। इस योजना में कई तरह के सुधार शामिल हैं, जैसे कि बेहतर स्टेशन बिल्डिंग और वेटिंग हॉल, चौड़े फुट-ओवर-ब्रिज और एयर कॉनकोर्स, बेहतर सर्कुलेटिंग और पार्किंग एरिया, दिव्यांगजनों के अनुकूल सुविधाएं (रैंप, टैक्टाइल पाथ, लिफ्ट), आधुनिक साइनेज और यात्री-सूचना प्रणाली, एग्जीक्यूटिव लाउंज और जहां संभव हो, वहां टिकाऊ और शहर से जुड़ी हुई डिज़ाइन।

75 अमृत भारत स्टेशनों की तस्वीरें और विशेषताएं

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पीके/ेसी/एनएस


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