श्रम और रोजगार मंत्रालय
डॉ. मनसुख मांडविया ने हैदराबाद में आयोजित 12वीं ब्रिक्स देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में कहा: ‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि कोई भी कामगार पीछे न छूटे’
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली अब 100 करोड़ लोगों को कवर करती है
ब्रिक्स देशों ने श्रम और रोजगार से संबंधित एक ऐतिहासिक घोषणा-पत्र को स्वीकार किया
भारत ने ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता विकास को मजबूत करने हेतु ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ का शुभारंभ किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से प्रेरित ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता ‘जन-केन्द्रित' दृष्टिकोण और ‘मानवता प्रथम’ की भावना पर आधारित है: डॉ. मांडविया
ब्रिक्स का मंच ‘ग्लोबल साउथ’ को व्यावहारिक, समावेशी और जन-केन्द्रित समाधान तैयार करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है: केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया
प्रविष्टि तिथि:
15 JUL 2026 5:29PM by PIB Delhi
ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता 2026 के तहत, हैदराबाद में ब्रिक्स के सदस्य देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस बैठक में काम-काज के भविष्य को आकार देने वाले अहम मुद्दों पर चर्चा करने हेतु ब्रिक्स के सदस्य देशों के मंत्री, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख, प्रतिनिधि, श्रमिक एवं नियोक्ता संगठनों के सदस्य तथा नॉलेज पार्टनर शामिल हुए।

यह बैठक भारत की अध्यक्षता की थीम “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण” के तहत आयोजित की गई थी। इसमें सामाजिक सुरक्षा, श्रम बाजार के औपचारिकीकरण, श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी, कौशल विकास और समावेशी व सुदृढ़ श्रम बाजार के लिए डिजिटल तकनीक के सदुपयोग जैसे क्षेत्रों में सामूहिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित किया गया।
I. मुख्य भाषण
जन-केन्द्रित अध्यक्षता
हैदराबाद में प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए, केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन से प्रेरित रही है और इसे ‘जन-केन्द्रित' दृष्टिकोण तथा 'मानवता प्रथम' की भावना के साथ आगे बढ़ाया गया है।
भारत में किए गए विभिन्न सुधारों की यात्रा को रेखांकित करते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने नवंबर 2025 में 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार आधुनिक श्रम संहिता बनायी। यह एक ऐसा ऐतिहासिक सुधार है जो भारत के 1.4 बिलियन नागरिकों के लिए कामगारों पर केन्द्रित एक इकोसिस्टम का निर्माण करता है।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि ई-श्रम पोर्टल ने 317 मिलियन से अधिक पंजीकृत असंगठित क्षेत्र के कामगारों को विशिष्ट पहचान, दोहरी प्रविष्टि हटाने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से पाने की सुविधा दी है। उन्होंने कहा कि नेशनल करियर सर्विस पोर्टल में नौकरियों के मिलान, कौशल की मैपिंग और परामर्श जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही, भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म का लचीला डिजाइन प्लेटफॉर्म वर्कर्स जैसे नए प्रकार के कामगारों तक सेवाओं का तेजी से विस्तार करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने मॉरिशस समेत कई सहयोगी देशों के साथ यह तकनीक साझा की है।
डॉ. मांडविया ने कुशल एवं भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार श्रमशक्ति को उभरते हुए वैश्विक मौकों से जोड़कर श्रमिकों के अंतरराष्ट्रीय आवागमन को मजबूत करने की दिशा में भारत की निरंतर कोशिशों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि आज भारत में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें 2.35 बिलियन पेशेवर काम करते हैं और जिनसे लगभग 98 बिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक राजस्व मिलता है।
केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स पर काम-काज के ऐसे भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी है, जो उत्पादक और न्यायपूर्ण हो। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “यह मंच ‘ग्लोबल साउथ’ को व्यावहारिक, समावेशी और जन-केन्द्रित समाधान तैयार करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।”
II. दिन की कार्यवाही
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक का संदेश
सभा को भेजे अपने वीडियो संदेश में, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के महानिदेशक ने ब्रिक्स के एजेंडे में श्रम और रोजगार को मुख्य प्राथमिकता देने के लिए भारत की अध्यक्षता की सराहना की। महानिदेशक ने भारत के मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की भी सराहना की, जिसका पिछले दशक में तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “आईएलओ के मौजूदा अनुमानों के अनुसार, भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली अब एक बिलियन लोगों तक पहुंचती है। यह उपलब्धि ऐसे सबक देती है जिन्हें साउथ-साउथ सहयोग के जरिए साझा किया जा सकता है।”

घोषणा-पत्र को स्वीकार किया जाना; ब्रिक्स कनेक्ट का शुभारंभ
इस बैठक का एक प्रमुख परिणाम ‘ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों के घोषणापत्र’ को स्वीकार किया जाना था। यह घोषणापत्र ब्रिक्स के सदस्य देशों की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वे सम्मानजनक काम को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने, रोजगार की क्षमता बढ़ाने, समावेशी विकास का समर्थन करने और श्रम व रोजगार के क्षेत्र में सहयोग को प्रगाढ़ करने की दिशा में काम करेंगे। इस घोषणापत्र में श्रम बाजार की आम चुनौतियों से निपटने हेतु ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच साउथ-साउथ सहयोग, एक-दूसरे से सीखने और व्यावहारिक सहयोग के महत्व को फिर से दोहराया गया।
सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने और श्रम बाजार के औपचारिकीकरण से जुड़ी प्राथमिकता 1 के तहत, सदस्य देश सामाजिक सुरक्षा के कवरेज को बढ़ाने की सामूहिक कोशिशों की सराहना करने पर सहमत हुए हैं। साथ ही, सदस्य देश अपनी-अपनी परिस्थितियों, प्राथमिकताओं और क्षमताओं के आधार पर, राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए मानकों के अनुरूप मौजूदा स्तर से सामाजिक सुरक्षा कवरेज को धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी एवं समावेशन को बढ़ाने हेतु प्राथमिकता 2 के तहत, सदस्य देशों ने ऐसे नीतिगत ढांचे को मजबूत करने का संकल्प लिया जो महिलाओं को कौशल विकास, माता-पिता की छुट्टी से संबंधित नीति (पैरेंटल लीव पॉलिसी) और कार्यस्थल पर उत्पीड़न व भेदभाव से सुरक्षा तक बेहतर पहुंच के जरिए सशक्त बनाते हैं। साथ ही, वे सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी काम करेंगे।
रोजगार-क्षमता, कौशल मैपिंग और विकास में सहयोग हेतु प्राथमिकता 3 के तहत, सदस्य देशों ने आईएलओ द्वारा भारत और ब्राजील के सहयोग से ‘पेशों के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ वर्गीकरण’ (इंटरनेशनल रेफरेंस क्लासिफिकेशन ऑफ ऑक्यूपेशंस) के बारे में किए जा रहे व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) का संज्ञान लिया। साथ ही, सदस्य देशों को प्रमुख क्षेत्रों - डिजिटल, केयर और ग्रीन - में प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) में भाग लेने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स समेत सभी कामगारों के लिए डिजिटल तकनीक का सदुपयोग करने से जुड़ी प्राथमिकता 4 के तहत, सदस्य देश मिलकर काम करेंगे। वे ज्ञान और अनुभव साझा करने के अवसर सृजित करेंगे, अपने डिजिटल नवाचार को प्रदर्शित करेंगे, और एक-दूसरे से सीखने तथा 'साउथ-साउथ' एवं 'ट्रायंगुलर' सहयोग के जरिए बदलाव के दौरान आने वाली चुनौतियों को कम करने में मदद करेंगे। इस प्रक्रिया में व्यापक बातचीत, संयुक्त योगदान और साझा लाभ शामिल होंगे।
इस बैठक में ब्रिक्स कनेक्ट का शुभारंभ भी किया गया। यह भारत की ओर से प्रस्तावित एक अहम संस्थागत पहल है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता विकास को मजबूत करना है। उम्मीद है कि यह पहल श्रम बाजार से जुड़ी सूचनाओं को बेहतर बनाने, कौशल संबंधी पूर्वानुमान लगाने और भविष्य के कौशल, डिजिटल रोजगार सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम बाजार से संबंधित सुधारों पर सहयोग को बढ़ावा देने हेतु बेहतर तरीकों और ज्ञान के आदान-प्रदान का एक सहयोगी मंच बनेगी। सदस्य देशों ने इस पहल का स्वागत किया। इसे ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच सहयोग को सिर्फ नीतिगत स्तर की बातचीत से आगे ले जाकर ठोस और देशों की अगुवाई वाले सहयोग की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय बयान और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों का आदान-प्रदान
बैठक के दौरान, ब्रिक्स के सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी-अपनी प्राथमिकताएं, उपलब्धियां और नीतिगत दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय बयान दिए। इंडोनेशिया ने कौशल विकास, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, नौकरी छूटने की स्थिति में सुरक्षा और महिलाओं, दिव्यांगों एवं दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए समावेशी रोजगार के अवसरों के महत्व पर जोर दिया। ईरान ने ब्रिक्स के ढांचे के भीतर बातचीत और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने निजी क्षेत्र की भागीदारी, लचीले नियमों, वैश्विक प्रतिभाओं के लिए खुलेपन और श्रम प्रशासन के लिए डिजिटल तकनीकों व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सदुपयोग पर आधारित श्रम बाजार से संबंधित अपने सुधारों को सामने रखा। दक्षिण अफ्रीका ने भी ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ की सराहना करते हुए इसे एक ऐसा संस्थागत नवाचार बताया, जो सहयोग को नीतिगत बातचीत से आगे ले जाकर एक ऐसे साझा श्रम बाजार की दिशा में ले जाता है जो अधिक उत्पादक, समावेशी और न्यायपूर्ण हो।
इथियोपिया ने मांग-आधारित व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया, जिसका लक्ष्य 2030 तक दस लाख नौकरियां सृजित करना है। साथ ही, उसने ब्रिक्स के सहयोगी देशों से सीखकर 'साउथ-साउथ सहयोग' की भावना के तहत साझा लक्ष्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। रूस ने बेरोजगारी दर में कमी, श्रम क्षेत्र के डिजिटलीकरण और भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक एप्लीकेशन शुरू करने से जुड़ी अपनी प्रगति के बारे में जानकारी दी। ब्राजील ने अपने माइक्रो-इंटर्नशिप प्रोग्राम का उल्लेख किया जिससे लाखों कर्मचारियों को लाभ हो रहा है और एआई के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। चीन ने प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था और काम के नए तरीकों के उभरने पर जोर दिया और घोषणा-पत्र पर बनी सहमति तथा उसे स्वीकार किए जाने का स्वागत किया।
बैठक में सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों पर एक विशेष तकनीकी सत्र भी हुआ, जिसमें सदस्य देशों ने अपने व्यावहारिक अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर किए गए नवाचारों के बारे में जानकारियां साझा कीं। कामगारों एवं नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया और सामाजिक न्याय, सम्मानजनक काम, मानवीय गरिमा, मानव-केन्द्रित तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा, लाभों की पोर्टेबिलिटी, कौशल का निरंतर उन्नयन, पहले से सीखे गए हुनर को मान्यता देना और काम के भविष्य में महिलाओं की भागीदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर जोर दिया।

III. समापन वक्तव्य
अपने समापन वक्तव्य में, केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बैठक में स्वीकार किए गए घोषणापत्र को सामूहिक प्रयासों की सफल परिणति और आम सहमति की उस भावना का प्रतिबिंब बताया, जिसने कार्यवाही का मार्गदर्शन किया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “हम ऐसे सुदृढ़ श्रम बाजार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो औपचारिक, समावेशी, लैंगिक रूप से उत्तरदायी (जेंडर-रिस्पॉन्सिव), डिजिटल रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार हों ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी कामगार पीछे न छूटे।”
प्रेसीडेंसी ने तकनीकी विचार-विमर्श में सहयोग देने और चर्चाओं को समृद्ध बनाने में आईएलओ, इंटरनेशनल सोशल सिक्योरिटी एसोसिएशन (आईएसएसए) और यूनाइटेड नेशंस रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ऑफिस (यूएनआरसीओ) जैसे अंतरराष्ट्रीय नॉलेज पार्टनरों के बहुमूल्य योगदान को भी स्वीकार किया।

घोषणा-पत्र को सफलतापूर्वक स्वीकार किया जाना और ब्रिक्स कनेक्ट का शुभारंभ, श्रम और रोजगार के क्षेत्र में ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। बैठक का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि सभी के लिए सामाजिक न्याय, सम्मानजनक रोजगार, नवाचार, कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाले कामकाजी माहौल की दिशा में मिलकर काम करना जारी रखा जाएगा।
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पीके/केसी/आर/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2285174)
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