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राष्ट्रपति सुश्रुत जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान(एआईआईए) में 'सौश्रुतम् 2026' का उद्घाटन करेंगी


एआईआईए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार 'सौश्रुतम् 2026' की मेजबानी करेगा

'सौश्रुतम् 2026' में एनसीआईएसएम का अध्ययन जारी किया जाएगा और एक अत्याधुनिक एमआरआई सुविधा का उद्घाटन किया जाएगा

आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा विज्ञान के एकीकरण पर वैश्विक विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे

प्रविष्टि तिथि: 13 JUL 2026 11:39PM by PIB Delhi

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, 15 जुलाई को 'सौश्रुतम् 2026' के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगी। यह तीन दिन का अंतरराष्ट्रीय सेमिनार है, जिसे आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली द्वारा 15 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस सेमिनार से पहले 14 जुलाई को एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। यह आयोजन सुश्रुत जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जो सर्जरी (शल्य चिकित्सा) के जनक माने जाने वाले आचार्य सुश्रुत के सम्मान में हरेक वर्ष 15 जुलाई को होता है।

केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव; दिल्ली के उप-राज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू; लोकसभा सांसद श्री रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा इस उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि होंगे।

एआईआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने कहा कि 'सौश्रुतम् 2026' आचार्य सुश्रुत के कालजयी सिद्धांतों को समकालीन शल्य चिकित्सा नवाचारों के साथ जोड़कर साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक सर्जरी को आगे बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि यह सेमिनार शैक्षणिक और नैदानिक ​​सहयोग को मजबूती प्रदान करेगा, उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा और सर्जिकल शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देगा। भारत और विदेशों के प्रमुख सर्जनों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों की भागीदारी के साथ, यह आयोजन अपनी समृद्ध शल्य चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व को फिर से स्थापित करेगा।

सेमिनार के आयोजन अध्यक्ष और एआईआईए के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) योगेश बडवे ने कहा कि इस सेमिनार में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुतियां शामिल होंगी। इसके साथ ही मलाशय रोग विज्ञान, पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा, एकीकृत ऑन्कोलॉजी, चिकित्सा-कानूनी मुद्दों और सर्जरी में बौद्धिक संपदा जैसे विषयों पर समर्पित सत्र आयोजित किए जाएंगे।

वैज्ञानिक सत्रों में घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षार सूत्र और मर्म चिकित्सा सहित आचार्य सुश्रुत के चिरस्थायी शल्य सिद्धांतों पर पुनर्विचार किया जाएगा, साथ ही शल्य तंत्र और एकीकृत सर्जिकल देखभाल के क्षेत्र में उभरते हुए अनुसंधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। यह विचार-विमर्श समकालीन स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करेगा।

आयोजन सचिव डॉ. व्यासदेव महंता ने कहा कि सेमिनार का समापन एक बहु-विषयक पैनल चर्चा के साथ होगा, जिसका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित संवाद को मजबूत करना, नवाचार को बढ़ावा देना और आयुर्वेदिक सर्जरी में शिक्षा व नैदानिक अभ्यास को और बेहतर बनाने के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान का विस्तार करना है।

'सौश्रुतम् 2026' के दौरान, आयुष मंत्रालय के भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय शोध अध्ययन, जिसका शीर्षक "आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन - एक अवलोकन संबंधी खोजपूर्ण अध्ययन" है, जारी किया जाएगा। यह अध्ययन आयुर्वेद क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और करियर की प्रगति के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाएगा। इस अवसर पर ₹14.5 करोड़ की लागत से स्थापित एक अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का उद्घाटन भी किया जाएगा, जिसमें अत्याधुनिक एआई सक्षम वर्कफ़्लो, बायोमेट्रिक्स तकनीक और व्यापक इमेजिंग क्षमताएं शामिल हैं।

यह सेमिनार थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, ग्रेट ब्रिटेन (यूके), श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के प्रतिष्ठित सर्जनों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाएगा। इसमें पद्मश्री प्रो. एम. साहू और पद्मश्री प्रो. के. के. ठकराल सहित 30 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ, और साथ ही एआईआईए, आईएमएस-बीएचयू, एनआईए जयपुर और आईटीआरए जामनगर जैसे प्रमुख संस्थानों के संकाय सदस्य भाग लेंगे। एम्स, एसजीपीजीआई, लखनऊ, जीएमसी, अगरतला और सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली के प्रमुख आधुनिक सर्जिकल विशेषज्ञ भी इस विचार-विमर्श में शामिल होंगे, जिससे आयुर्वेद और समकालीन शल्य चिकित्सा विज्ञान के बीच एक सार्थक एवं सशक्त आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

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पीके/केसी/पीकेपी


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