युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
भारतीय खेल प्राधिकरण और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर ने खेल विज्ञान और एथलीटों की देखभाल को मज़बूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
"उच्च प्रदर्शन वाले बेहतर खेलों का भविष्य स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन के बेहतर तालमेल पर निर्भर करता है": सचिव (खेल मंत्रालय) श्री हरि रंजन राव
यह सहयोग सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें वैज्ञानिक रूप से सक्षम, एथलीट-केंद्रित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्पोर्ट्स व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है
यह एमओयू खेलो इंडिया, टॉप्स और भारत को एक प्रमुख स्पोर्ट्स देश बनाने के विकसित भारत@2047 विज़न जैसी प्रमुख पहलों को और मज़बूत बनाता है
प्रविष्टि तिथि:
08 JUL 2026 8:21PM by PIB Delhi
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) के तहत भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के तहत सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) ने आज स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन, एथलीट पुनर्वास, अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और क्षमता निर्माण में सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस एमओयू का मकसद दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, ढ़ांचागत सुविधाओं और वैज्ञानिक क्षमताओं को मिलाकर एक एकीकृत फ्रेमवर्क बनाना है, ताकि भारतीय एथलीटों और सपोर्ट स्टाफ़ को व्यापक सहायता मिल सके।

यह सहयोग प्रमाण आधारित स्पोर्ट्स साइंस और मेडिकल प्रैक्टिस को बढ़ावा देगा, मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च में मदद करेगा, एथलीटों को चोट से बचाने और उनके पुनर्वास को मज़बूत करेगा और वैज्ञानिक तरीकों से उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
इस एमओयू पर युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के सचिव (खेल) श्री हरि रंजन राव और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव सुश्री पुण्या सलिला श्रीवास्तव की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
एसएआई की ओर से, स्पोर्ट्स साइंस डिवीज़न (पहले एनसीएसएसआर) के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) विभु कल्याण नायक ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए और एसआईसी की ओर से सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के निदेशक (डॉ.) दीपक जोशी ने हस्ताक्षर किए।

इस मौके पर श्री राव ने कहा, "उच्च प्रदर्शन वाले बेहतर स्पोर्ट्स का भविष्य स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन के बेहतर तालमेल पर निर्भर करता है।"
उन्होंने कहा कि यह एमओयू एक मज़बूत संस्थागत ढांचा तैयार करता है, जो मिलकर शोध, वैज्ञानिक नवाचार, एथलीटों की निगरानी और उनके पुनर्वास को बढ़ावा देगा और अंतत: भारतीय एथलीटों के लिए विश्व स्तरीय व्यवस्था बनाने में योगदान देगा।
इस मौके पर सुश्री सलीला ने कहा, "स्पोर्ट्स मेडिसिन और स्पोर्ट्स साइंस एथलीट की सेहत और उनके प्रदर्शन के ज़रूरी हिस्से बन गए हैं। यह साझेदारी दोनों मंत्रालयों की उस साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसके तहत चोट से बचाव, क्लिनिकल देखभाल, पुनर्वास और वैज्ञानिक अनुसंधान की मज़बूत व्यवस्था विकसित करने के लिए मेडिकल क्षेत्र की बेहतरीन विशेषज्ञता को स्पोर्ट्स साइंस की विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे देश भर के एथलीटों को फ़ायदा होगा।"

ब्रिगेडियर नायक ने आगे कहा, "इस साझेदारी से कई क्षेत्रों से जुड़े शोध, स्टैंडर्ड क्लिनिकल और स्पोर्ट्स साइंस प्रोटोकॉल, जानकारी का आदान-प्रदान और एथलीटों के लिए बेहतर सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।"
उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों की खूबियों को मिलाकर हम ऐसे टिकाऊ वैज्ञानिक समाधान विकसित कर पाएंगे, जिनसे सीधे तौर पर एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार होगा और उनकी सेहत लंबे समय तक अच्छी बनी रहेगी।
प्रोफेसर जोशी ने भी अपनी बात रखते हुए कहा, "यह साझेदारी देश भर के एथलीटों के फायदे के लिए शोध, शिक्षा, पुनर्वास और प्रमाणों पर आधारित स्पोर्ट्स मेडिसिन को और मज़बूत करेगी।"
यह एमओयू स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन के क्षेत्र में भारत के दो प्रमुख संस्थानों के बीच आपसी सहयोग की दिशा में एक अहम पड़ाव है।

यह सहयोग भारत सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका मकसद वैज्ञानिक रूप से सक्षम, एथलीट-केंद्रित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्पोर्ट्स व्यवस्था तैयार करना है।
यह खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) जैसी प्रमुख पहलों को भी मजबूती देता है, साथ ही विकसित भारत@2047 के तहत भारत को एक प्रमुख स्पोर्ट्स देश बनाने की देश की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा का भी समर्थन करता है।
शोध,नवाचार, क्षमता निर्माण और प्रमाणों पर आधारित एथलीट देखभाल को बढ़ावा देकर, इस साझेदारी से भारत की उच्च प्रदर्शन वाली व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जिनमें ओलंपिक और पैरालंपिक खेल भी शामिल हैं, के लिए देश की तैयारी को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
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पीके/केसी/एनएस/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2282640)
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