मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
‘पशुजन्य युद्ध अभ्यास (पीवाईए)’ पशु स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों और जूनोटिक रोगों के प्रकोप से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को मज़बूत करता है
29 जून से 3 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के खारी गांव में एक राष्ट्रीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, इसका उद्देश्य 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण के तहत किसी भी बीमारी या संकट से मिलकर निपटने के तरीके को परखना और मजबूत करना था
प्रविष्टि तिथि:
03 JUL 2026 7:11PM by PIB Delhi
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने 'नेशनल वन हेल्थ मिशन' के तहत पशुजन्य युद्ध अभ्यास (पीवाईए) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह राष्ट्रीय स्तर का तीसरा मॉक ड्रिल था, जिसका उद्देश्य जूनोटिक रोगों के प्रकोप से उत्पन्न होने वाली पशु स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए देश की तैयारी, समन्वय तंत्र और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को परखना और मजबूत करना था।
यह 5 दिवसीय अभ्यास 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के खारी गांव में आयोजित किया गया। वन हेल्थ दृष्टिकोण पर आधारित इस अभ्यास ने पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य, वन्यजीव, खाद्य सुरक्षा, प्रयोगशाला और जिला प्रशासन से जुड़े सभी संबंधित हितधारकों को एक मंच प्रदान किया। इस ड्रिल का उद्देश्य परिचालन तत्परता, विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल व संचार, और जूनोटिक रोग के प्रकोप पर शुरुआती अलर्ट से लेकर नियंत्रण तक प्रबंधित करने की प्रक्रिया का आकलन करना था।
इस परिदृश्य में जानवरों में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) के फैलने की स्थिति को दिखाया गया, जिसमें इसके इंसानों और जंगली जानवरों में भी फैलने का खतरा था। इस स्थिति पर काम करते हुए, प्रतिभागियों ने पूरी रिस्पॉन्स चेन को परखा— जिसमें बीमारी की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी और रिपोर्टिंग, प्रकोप की जांच और फील्ड महामारी विज्ञान, सैंपल इकट्ठा करना और उन्हें पहुंचाना, लैब में जांच, जोखिम का आकलन, घटना का प्रबंधन, जैव सुरक्षा, रोकथाम के उपाय, आवाजाही पर नियंत्रण और लोगों तक जानकारी पहुंचाना शामिल था।
इस अभ्यास में पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, राष्ट्रीय बीएसएल-3 नेटवर्क के तहत आने वाली प्रयोगशालाओं (जैसे आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिज़ीज़ (एनआईएचएसएडी), भोपाल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ मध्य प्रदेश के राज्य और ज़िला पशुपालन, स्वास्थ्य और वन विभागों तथा राज्य और ज़िला प्रशासन ने सक्रिय रूप से भाग लिया। पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य और वन्यजीव क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (एनजेओआरटी) के मार्गदर्शन में मिलकर काम किया।
पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने कहा कि पशुजन्य युद्ध अभ्यास ने वन हेल्थ दृष्टिकोण को क्रियान्वित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जूनोटिक खतरों का पता लगाने, उन्हें रोकने और त्वरित व समन्वित तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए नियमित अभ्यास बहुत ज़रूरी हैं।
आखिरी दिन यानी 3 जुलाई 2026 को डीएएचडी के पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। इसमें एनसीडीसी के निदेशक, मध्य प्रदेश के पशुपालन निदेशक और बैक-एंड, फ्रंट-एंड व ऑब्जर्वर टीमें शामिल हुईं। इस बैठक का उद्देश्य अभ्यास के दौरान नोट की गई टिप्पणियों की समीक्षा करना, कमियों पर चर्चा करना और आगे की राह पर विचार-विमर्श करना था। इस विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल को मजबूत करना, विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल बेहतर करना और पशु स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों व जूनोटिक रोगों के प्रकोप से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए क्षमता निर्माण करना था।

पशुजन्य युद्ध अभ्यास (पीवाईए) एक सफल अभ्यास रहा, जिसने जूनोटिक रोगों (जानवरों से इंसानों में फैलने वाले रोग) के प्रकोप से निपटने और भारत की तैयारी को मज़बूत करने की भविष्य की रणनीतियों के लिए ज़रूरी जानकारी प्रदान की। इसने नई और दोबारा उभरने वाली जूनोटिक रोगों की रोकथाम, शुरुआती स्तर पर पहचान और तेज़ी से कार्रवाई के लिए मज़बूत पशु चिकित्सा प्रणालियां विकसित करने के सरकार के संकल्प को और मज़बूत किया। साथ ही, इसने सभी संबंधित क्षेत्रों में तालमेल बिठाकर और कुशलता से कार्रवाई करने के लिए 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण के महत्व को भी रेखांकित किया।
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पीके/केसी/एसके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2280940)
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