ग्रामीण विकास मंत्रालय
ग्रामीण विकास सचिव ने वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत कन्वर्जेंस फ्रेमवर्क पर उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी परामर्श की अध्यक्षता की
समग्र सरकार की इस अहम बैठक में 18 मंत्रालयों और विभागों ने हिस्सा लिया; वीबी-जी राम जी 1 जुलाई 2026 से लागू होगा
प्रविष्टि तिथि:
24 JUN 2026 6:48PM by PIB Delhi
‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी–जी राम जी (विकसित भारत – जी राम जी) अधिनियम, 2025’ के तहत समन्वय ढांचे के मसौदे (ड्राफ्ट कन्वर्जेंस फ्रेमवर्क) पर आज, 24 जून 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल ने की। इस बैठक में भारत सरकार के 18 मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों एवं नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

यह परामर्श बैठक उन तैयारियों का हिस्सा है, जो 1 जुलाई 2026 से वीबी-जी राम जी अधिनियम के लागू होने से पहले की जा रही हैं। इस बैठक का मुख्य फोकस इस अधिनियम के उस विजन को कार्यान्वित करने पर था, जिसमें विकेंद्रीकृत और पंचायती राज संस्थाओं के नेतृत्व वाले नियोजन और समन्वय के जरिए ग्रामीण विकास के लिए ‘समग्र-सरकार’ वाले दृष्टिकोण को अपनाया जाना है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए, श्री रोहित कंसल ने इस बात पर जोर दिया कि ‘समन्वय’ वीबी-जी राम जी अधिनियम का एक मुख्य आधार है। यह ग्रामीण विकास की आपस में जुड़ी प्राथमिकताओं - जैसे पानी की सुरक्षा, आजीविका, बुनियादी ढांचा, जलवायु के प्रति सुदृढ़ता और स्थानीय आर्थिक विकास - को पूरा करने के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम “एक योजना – कई स्रोतों से फंडिंग” (सिंगल प्लान – मल्टी फंडिंग) के तरीके पर आधारित है। इससे अलग-अलग योजनाएं और कार्यक्रम अपने-अपने लक्ष्यों एवं फंडिंग के तरीकों को बनाए रखते हुए भी विकास के साझा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में काम कर सकेंगे।
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विभाग ने इस अधिनियम के तहत तैयार किया गया ‘समन्वय ढांचे’ का मसौदा पेश किया। इस ढांचे के केन्द्र में ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ (वीजीपीपी) है, जो ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीण विकास से संबंधित योजना निर्माण का मुख्य जरिया है। सामुदायिक भागीदारी से तैयार और ग्राम सभा से मंजूर की गई वीजीपीपी का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों को केन्द्र और राज्य की अलग-अलग योजनाओं के तहत उपलब्ध संसाधनों, विशेषज्ञता एवं निवेश के साथ जोड़ना है।
इस ढांचे में नीचे से ऊपर की ओर योजना निर्माण की एक ऐसी संरचना है, जिसमें ग्राम सभाओं द्वारा तय की गई विकास की प्राथमिकताओं को पंचायती राज संस्थाओं के जरिए एकत्रित किया जाता है और अलग-अलग मंत्रालयों व विभागों के सेक्टर-विशिष्ट कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाता है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी निवेश स्थानीय स्तर पर तय की गई प्राथमिकताओं पर केन्द्रित हो ताकि विकास के अधिक असरदार एवं स्थायी नतीजे मिल सकें।

बैठक में इस अधिनियम के तहत मुख्य विषयों और उन कामों की रूपरेखा की भी समीक्षा की गई जिनकी अनुमति है। यह अधिनियम ग्रामीण विकास के कार्यों को चार मुख्य क्षेत्रों में बांटता है: पानी की सुरक्षा; प्रमुख ग्रामीण बुनियादी ढांचा; ग्रामीण आजीविका; और चरम मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य। 1 जुलाई 2026 से इसे लागू करने हेतु, विभाग ने 318 ऐसे कार्यों की एक अंतरिम सूची जारी की है जिनकी अनुमति है। इन कार्यों में प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, सिंचाई, ग्रामीण कनेक्टिविटी, सामुदायिक बुनियादी ढांचा, आजीविका में मदद करने वाली परिसंपत्तियां, जलवायु के अनुकूल क्षमता और आपदा की तैयारी शामिल हैं। इस बैठक में शामिल प्रतिभागियों ने माना कि जिन कार्यों की अनुमति है, उनका दायरा काफी बड़ा है और इससे अलग-अलग सेक्टर तथा योजनाओं के बीच समन्वय बिठाने के व्यापक अवसर मिलेंगे।
तकनीकी और वित्तीय समन्वय को मजबूत करने, समन्वय के लिए उपयुक्त योजनाओं की पहचान करने, डिजिटल अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने और समन्वित कार्यान्वयन व निगरानी के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। भाग लेने वाले मंत्रालयों और विभागों ने मसौदा ढांचे पर अपने विचार और सुझाव साझा किए।
इस बैठक में अन्य लोगों के अलावा, श्रीमती रोहिणी भाजीभाकरे, संयुक्त सचिव (ग्रामीण रोजगार), श्री आशीष गुप्ता, उप सचिव (ग्रामीण रोजगार) और ग्रामीण विकास विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
वीबी-जी राम जी अधिनियम के लागू होने के साथ ही, 1 जुलाई 2026 से समन्वय ढांचा (कन्वर्जेंस फ्रेमवर्क) को शुरू करने का प्रस्ताव है। उम्मीद है कि इससे विकेंद्रीकृत नियोजन को मजबूती मिलेगी, सार्वजनिक निवेश का बेहतर उपयोग संभव होगा और समग्र सरकार के समन्वय वाले तरीके से ग्रामीण इलाकों का एकीकृत विकास तेजी से हो सकेगा।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2277574)
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