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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार


भारत के असाधारण बच्चों को सम्मान

प्रविष्टि तिथि: 23 JUN 2026 12:50PM by PIB Delhi

मुख्‍य अंश

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है, जो 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के असाधारण धैर्य, साहस, सृजनात्मकता और अदम्य जज़्बे वाले बच्चों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा यह पुरस्कार प्रतिवर्ष नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है। इस पुरस्‍कार के अंतर्गत छह श्रेणियोंबहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीमें उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित किया जाता है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह का आयोजन वीर बाल दिवस (26 दिसंबर) के अवसर पर किया जाता है, जो गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के ऐतिहासिक बलिदान और उनके अदम्य नैतिक साहस को समर्पित है। इस प्रकार भारत सरकार समकालीन युवा प्रतिभाओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों को दृढ़ संकल्प और मूल्यों की कालजयी विरासत से जोड़ती है।

भारत के असाधारण बच्‍चे

भारत वीरों की भूमि है, जिसकी पहचान पीढि़यों से इसके युवाओं के साहस, बौद्धिक प्रतिभा और त्याग की गौरवशाली परंपरा से निर्मित हुई है। युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस से लेकर बाल्यावस्था में ही वेदों के प्रकाण्ड विद्वान बने आदि शंकराचार्य तक, कम आयु में ही असाधारण संकल्प, प्रतिभा और समर्पण का भाव भारत के इतिहास में गहराई से रचा-बसा है।

आज यही कालजयी भावना प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के रूप में जीवंत है, जिसके साथ भारत सरकार 5 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के असाधारण बच्चों को इस प्रतिष्ठित पुरस्‍कार से सम्मानित करती है। इस पुरस्कार का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले बच्चों को मान्‍यता देना और उनका सम्मान करना है।

यह पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान को मान्यता देकर युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित एवं प्रेरित करता है तथा अन्य बच्चों को भी उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरणा प्रदान करता है।

26 दिसंबर को मनाए जाने वाले वीर बाल दिवस के अवसर पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। पदक, प्रमाण-पत्र और प्रशस्ति-पत्र से युक्त प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत के युवा परिवर्तनकर्ताओं के धैर्य, साहस, सृजनात्मकता और अदम्य जज़्बे को समर्पित एक सम्मान है।

वर्ष 2019 में इसकी शुरुआत के बाद से अब तक 203 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इस पहल के माध्यम से सरकार बच्चों को केवल शैक्षणिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण सहित, जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

वीर बाल दिवस पर प्रदान किए जाने वाले पुरस्कार

भारत सरकार प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाती है। यह दिवस दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबज़ादोंसाहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंहके बलिदान और अदम्य साहस की स्मृति को समर्पित है।

साहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह की आयु क्रमशः 9 वर्ष और 7 वर्ष थी। उन्होंने दबाव और प्रलोभनों के बावजूद अपना धर्म त्यागने से इनकार किया, जिसके कारण 26 दिसंबर, 1704 को वे शहीद हो गए। उनका बलिदान कम आयु में भी अदम्य साहस, नैतिक दृढ़ता और अपने विश्वास के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। विपरीत परिस्थितियों में उनके अद्वितीय त्याग और वीरता आज भी बच्चों को प्रेरित करते हैं।

वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान कर भारत के युवाओं – अतीत तथा वर्तमान, दोनों - की प्रतिभा, सृजनात्मकता और उपलब्धियों का सम्मान किया जाता है।

पुरस्कार का विवरण

असाधारण वीरता तथा उत्कृष्टता के लिए बच्चों को छह क्षेत्रों में लगभग 25 पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं:

  • बहादुरी: अपने जीवन को जोखिम में डालकर निस्वार्थ सेवा या साहस का परिचय देने वाले बच्चे को यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है;
    • और/अथवा प्रतिकूल प्राकृतिक या मानव-जनित परिस्थितियों में असाधारण साहस और वीरता का परिचय देने के लिए;
    • और/अथवा स्वयं तथा समाज पर आए गंभीर संकट की स्थिति में असाधारण मानसिक दृढ़ता, सूझ-बूझ और तीव्र बुद्धि का परिचय देने के लिए;
  • समाज सेवा: महिलाओं, बच्चों तथा अन्य लोगों के अधिकारों के प्रति समुदाय को प्रेरित करने, संगठित करने और सक्रिय रूप से जोड़ने में नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने पर
  • पर्यावरण: विभिन्न स्तरों पर पर्यावरण संबंधी मुद्दों के क्षेत्र में निरंतर प्रयास या उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने पर
  • खेल: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में निरंतर उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने पर
  • कला एवं संस्कृति: सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन हेतु निरंतर प्रयास तथा कला एवं संस्कृति के क्षेत्रजैसे कला, संगीत (गायन एवं वादन), नृत्य, चित्रकला अथवा किसी अन्य कला/सांस्कृतिक विधा मेंमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने पर
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: जिसमें ऐसे नवीन विकास/नवाचार शामिल हैं, जिनका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा हो, जिन्होंने जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया हो या वास्तविक समस्याओं के समाधान में योगदान दिया हो।

 

उन्होंने राह दिखाई प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के पूर्व विजेता

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से ऐसे बच्चों को सम्मानित किया गया है, जिनके साहस, सृजनात्मकता और करुणा ने उनकी कम आयु से कहीं बढ़कर परिपक्वता का परिचय दिया है। हाल के पुरस्कार विजेताओं में शामिल हैं:

  • अर्नव अनुप्रिया महर्षि (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, 2025) – महाराष्ट्र के औरंगाबाद के 17 वर्षीय दिव्यांग बालक, जिन्होंने हाथ के लकवे के पुनर्वास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरण विकसित किया।
  • करीना थापा (बहादुरी, दिसंबर 2024) – महाराष्ट्र के अमरावती की 17 वर्षीय बालिका, जिन्होंने बचाव अभियान के दौरान आगजनी वाली जगह से गैस सिलेंडर हटाकर 36 लोगों की जान बचाई। इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें नगर निगम द्वारा फायर ब्रांड एंबेसडर के रूप में सम्मानित किया गया।
  • आदित्य विजय ब्रम्हाणे (बहादुरी, 2024) — महाराष्ट्र के नंदुरबार के 12 वर्षीय बालक, जिन्होंने अच्छे तैराक होने के बावजूद नदी में डूब रहे अपने चचेरे भाइयों को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी और इस बचाव प्रयास में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
  • अनुष्का पाठक (कला एवं संस्कृति, 2024) — चार वर्ष की आयु में कथा वाचन प्रारंभ किया और 22 से अधिक राज्यों एवं शहरों में श्रीमद्भागवत कथा तथा रामचरितमानस का वाचन किया।
  • अरमान उभरानी (कला एवं संस्कृति, 2024) — छत्तीसगढ़ के छह वर्षीय 'गूगल मैथ बॉय', जिन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में 100 गुणा के प्रश्न हल करने वाले सबसे कम आयु के बालक तथा पुस्तक-त्रयी के सबसे कम आयु के लेखक के रूप में स्थान प्राप्त किया।
  • हेतवी कांतिभाई खीमसूरिया (कला एवं संस्कृति, 2024) — गंभीर सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित वडोदरा की इस बाल कलाकार ने 250 फ्री-हैंड पेंटिंग बनाई हैं और अपनी दिव्यांगता पेंशन एक दिव्‍यांग बालक देखभाल संस्थान को दान करती हैं।
  • चार्वी (खेल, 2024) — भारत की अंडर-8 एवं अंडर-10 बालिका वर्ग में नंबर 1 शतरंज खिलाड़ी; वर्ष 2022 में अंडर-8 विश्व एवं कॉमनवेल्थ शतरंज चैंपियन।
  • आर सूर्य प्रसाद (खेल, 2024) — पाँच वर्ष की आयु में पर्वतारोहण प्रशिक्षण प्रारंभ किया और अप्रैल 2022 में माउंट किलिमंजारो पर चढ़ाई की; सम्मानित किए जाने के समय उनकी आयु नौ वर्ष थी।
  • आदित्य प्रताप सिंह चौहान (नवाचार, 2023) — ‘माइक्रोपानामक एक किफायती तक्‍नॉलॉजी विकसित की, जो पेयजल से माइक्रोप्लास्टिक का पता लगाने और उन्हें फिल्टर करने में सक्षम है।
  • अनुष्का जॉली (समाज सेवा, 2023) — 'एंटी-बुलिंग स्क्वॉड कवच' ऐप का निर्माण किया, जिसने चार वर्ष छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया।
  • अवनीश तिवारी (समाज सेवा, 2024) — डाउन सिंड्रोम से प्रभावित नौ वर्षीय बालक, जिसने सात वर्ष की आयु में एवरेस्ट बेस कैंप तक ट्रेक किया और टीईडीएक्‍स वार्ताओं में भाग लेकर समावेशिता पर राष्ट्रीय चर्चा को प्रेरित किया।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026

नामांकन और पात्रता विवरण:

इस पुरस्कार हेतु नामांकन के लिए शर्तें

भारतीय नागरिक तथा भारत का निवासी
● 5 से 18 वर्ष की आयु के बीच (31 जुलाई, 2026 को)
किसी भी श्रेणी में इस पुरस्कार के पूर्व प्राप्तकर्ता नहीं होने चाहिए
घटना, उपलब्धि या कार्य नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 से पिछले दो वर्षों  के भीतर हुआ होना चाहिए

यह पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान नहीं किया जाता, लेकिन अपवादस्वरूप परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है।

किसी बच्चे को एक से अधिक श्रेणियों के लिए नामित किया जा सकता है, लेकिन समिति के पास केवल एक आवेदन स्वीकार करने का विवेकाधिकार होता है।

किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा बच्चे का नामांकन किया जा सकता है। बच्चे स्व-नामांकन के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं। कुछ सरकारी निकायों और कार्यालयों से भी सिफारिशें आमंत्रित की जाती हैं। इनमें शामिल हैं:

  • केंद्रीय मंत्री
  • मुख्‍य मंत्री
  • राज्‍यपाल
  • उप-राज्‍यपाल
  • केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक
  • संसद सदस्‍य
  • केंद्र सरकार के मंत्रालय व विभाग
  • राज्‍य सरकार
  • केंद्र शासित प्रदेश सरकार
  • जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर
  • महिला एवं बाल विकास अथवा समाज कल्याण विभागों के प्रमुख सचिव
  • केन्द्रीय विद्यालय संगठन अथवा नवोदय विद्यालय समिति के अधीन शैक्षणिक संस्थान और विद्यालय।

आवेदकों को अपने व्यक्तिगत विवरण और पुरस्कार श्रेणी भरनी होती है तथा हाल की एक तसवीर और सहायक दस्तावेज़ अपलोड करने होते हैं। उन्हें अपनी उपलब्धि और उसके परिणाम का संक्षिप्त विवरण भी प्रस्तुत करना होता है, जो अधिकतम 1,000 शब्दों में होना चाहिए।

सभी नामांकन प्रविष्टियाँ निर्धारित समय-सीमा तक https://awards.gov.in पर जमा कर दी जानी चाहिए।

पुरस्कार समिति

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री पुरस्कार समिति का गठन करते हैं तथा पुरस्कारों को अंतिम स्वीकृति प्रदान करते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली इस समिति में पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों से संबंधित क्षेत्र-विशेषज्ञ शामिल होते हैं। समिति प्राप्त नामांकनों की समीक्षा करती है और पुरस्कार विजेताओं की अनुशंसा करती है।

व्यय वहन की सुविधा

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पुरस्कार विजेताओं तथा उनके अधिकतम दो अभिभावकों अथवा संरक्षकों के लिए आने-जाने की इकोनॉमी श्रेणी की यात्रा, स्थानीय परिवहन, आवास और भोजन की व्यवस्था में होने वाले व्यय का वहन करता है। यात्रा का खर्च पुरस्कार विजेता के निवास स्थान या अध्ययन संस्थान से नई दिल्ली तक की इकोनॉमी श्रेणी के किराए अथवा वास्तविक व्यय, दोनों में से जो कम हो, उसके अनुसार वहन किया जाता है। दिव्यांग पुरस्कार विजेताओं को शारीरिक असुविधा कम करने के उद्देश्य से बिज़नेस श्रेणी के टिकट उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से प्राप्त करना अनिवार्य है। यदि पुरस्कार विजेता समारोह में उपस्थित नहीं हो सकता है अथवा मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किए जाने की स्थिति में, उसके स्थान पर एक अभिभावक या संरक्षक पुरस्कार ग्रहण कर सकते हैं।

राष्ट्र के भविष्य का सम्मान

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) केवल एक पदक और प्रशस्ति-पत्र नहीं है। यह राष्ट्र की ओर से अपने युवा नागरिकों को यह संदेश है कि उनका साहस, सृजनात्मकता और करुणा महत्त्वपूर्ण हैं। यह पुरस्कार हमारे बच्चों के दृढ़ संकल्प, योग्‍यता, जोश तथा उत्साह का सम्मान करता है।

वीर बाल दिवस के अवसर पर उन्हें सम्मानित कर सरकार आज की युवा प्रतिभाओं को एक कालजयी विरासत से जोड़ती है। साहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह का बलिदान उनकी अल्पायु से कहीं अधिक दृढ़ आस्था, साहस और अडिग संकल्प का प्रतीक था।

यह विज़न आप सभी की सामूहिक भागीदारी पर आधारित है, जिससे ऐसे अनमोल रत्‍नों की पहचान की जा सके। यदि आप ऐसे किसी बच्चे को जानते हैं, जिसकी असाधारण यात्राचाहे वह अकस्‍मात् दिए गए किसी अद्वितीय साहस का परिचय हो या विज्ञान, कला अथवा सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में वर्षों का समर्पित योगदानराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान की पात्र हो, तो याद रखें कि उसकी प्रेरक कहानी को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने की शुरुआत आपके एक नामांकन से होती है। और यदि वह बच्चा आप स्वयं हैं, तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। बस क्लिक करें!

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संदर्भ

पत्र सूचना कार्यालय

अन्‍य:

पीआईबी शोध

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