पंचायती राज मंत्रालय
पंचायती राज मंत्रालय 09 जून 2026 को गांधीनगर, गुजरात में एक जनसंपर्क कार्यशाला एवं आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का आयोजन करेगा
कार्यशाला का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जाएगा जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे गुजरात के पात्र ग्राम पंचायत एवं ब्लॉक पंचायत शामिल होंगे
प्रविष्टि तिथि:
07 JUN 2026 7:37PM by PIB Delhi
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 09 जून 2026 को गांधीनगर, गुजरात में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर एक आउटरीच कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यशाला का आयोजन पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, गुजरात सरकार के पंचायत, ग्रामीण आवास एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री धनंजय द्विवेदी, गुजरात सरकार के अतिरिक्त विकास आयुक्त डॉ. गौरव दहिया, गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, आवास एवं शहरी विकास निगम लिमिटेड (हुडको) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के प्रतिनिधियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा।
इस कार्यशाला का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जाएगा। इसमें गांधीनगर के आसपास स्थित पात्र पंचायतें व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे जबकि इस दायरे से बाहर स्थित पंचायतें अपने-अपने कार्यालयों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लाइव शामिल होंगी। मंत्रालय का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से पूरे गुजरात में ग्राम पंचायत एवं ब्लॉक पंचायत स्तर के नेताओं से सीधे जुड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की परिकल्पना, उद्देश्य एवं परिचालन रूपरेखा से अवगत कराना है।
कार्यशाला के लिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर अपने दृष्टिकोण पर प्रकाश डालेंगे साथ ही इसमें राष्ट्रीय नीति के उद्देश्यों, तकनीकी रूपरेखा एवं अपेक्षित परिणामों पर विस्तृत प्रस्तुति, आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का लाइव प्रदर्शन एवं एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र शामिल है। नाबार्ड और हुडको के प्रतिनिधि भी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे तथा कार्यक्रम के प्रति अपने संस्थानों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेंगे।
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम भारत सरकार की एक पहल है जिसका संचालन पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है, एक पारदर्शी राष्ट्रीय चुनौती प्रक्रिया के माध्यम से पंचायतों को आमंत्रित किया जाता है कि वे ऐसी राजस्व-निर्माण परियोजनाओं एवं पहलों के लिए अपने विचार प्रस्तुत करें जो अनुपयोगी संपत्तियों एवं अप्रयुक्त स्थानीय अवसरों का उत्पादक उपयोग करें। चयनित विचारों को योजना अनुरूप, बैंक योग्य परियोजनाओं में विकसित करने के लिए मंत्रालय से समर्पित तकनीकी सहायता प्राप्त होगी, जिसमें धन समर्थन सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योगदान, बैंक वित्त और अन्य सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय से प्राप्त होगा। सामुदायिक स्वामित्व ग्राम सभा की प्रत्येक योजना चरण में अनिवार्य सहभागिता के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है।
सभी ग्राम पंचायतें जिनका न्यूनतम स्वयं स्रोत राजस्व (ओएसआर) 50 लाख रुपये है और सभी ब्लॉक पंचायतें जिनका न्यूनतम ओएसआर एक करोड़ रुपये है, और दोनों की अवधि में कम से कम तीन साल शेष हैं, इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। पंचायत राज मंत्रालय ने ग्रामीण परियोजना विकास में संस्थागत विशेषज्ञता प्रदान करने और योग्य पंचायतों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए नाबार्ड और हुडको के साथ साझेदारी की है।
राष्ट्रीय ग्राम शासन अभियान (आरजीएसए) के अंतर्गत आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम को लागू किया गया है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से सक्षम पंचायतों की एक नई पीढ़ी का निर्माण करना है, जो इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करें कि वित्तीय स्वतंत्रता और स्वशासन एक दूसरे के पूरक है। मंत्रालय की सोच है कि एक आत्मनिर्भर पंचायत आत्मनिर्भर भारत की सबसे मजबूत नींव है। गांधीनगर कार्यशाला गुजरात राज्य में कार्यक्रम के विस्तार की शुरुआत का प्रतीक है।

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पीके/केसी/एके /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2270111)
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