जनजातीय कार्य मंत्रालय
आईटीडीए और आईटीडीपी को सशक्त बनाने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु जनजातीय शासन सुधार के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया
माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीईएनएसई, आईआईएससी बेंगलुरु, 75 ईएमआरएस में स्पेस लैब्स में ट्रेनिंग फैब का उद्घाटन किया और लघु फिल्म सबसे दूर, सबसे पहले का लोकार्पण किया
प्रविष्टि तिथि:
03 JUN 2026 9:42PM by PIB Delhi
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों और परियोजनाओं (आईटीडीए/आईटीडीपी) को सुदृढ़ बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में देशभर के आईटीडीए/आईटीडीपी के परियोजना अधिकारियों, निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य सरकारों एवं मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर जनजातीय विकास संस्थानों की क्षमता बढ़ाने, शासन तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने और जनजातीय क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना व सुधार एजेंडे पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

यह सम्मेलन ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब भारत में जनजातीय विकास अभूतपूर्व गति और व्यापकता के साथ आगे बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान, शैक्षिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को गति देने वाली अनेक परिवर्तनकारी गतिविधियों का सफल नेतृत्व किया है। इस अवधि में ईएमआरएस नेटवर्क का विस्तार होकर 499 संचालित विद्यालयों तक पहुंचा है, जबकि 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति सहायता के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख जनजातीय विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों ने जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाओं को जन्म दिया है, जिनका संयुक्त परिव्यय 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। मंत्रालय का वार्षिक बजट भी तीन गुना बढ़कर 4,295 करोड़ रुपये से लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इन प्रयासों को और सुदृढ़ करने के लिए देशभर में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव (10 मई–9 जून) और हाल ही में संपन्न जन भागीदारी अभियान ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ ने सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता एवं सेवाओं की पहुंच को सशक्त किया है, जिससे विकास के लाभ दूरस्थ से दूरस्थ जनजातीय बस्तियों तक पहुंचना सुनिश्चित हो रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की गरिमा बढ़ाई और जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इनमें बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र (सीईएनएसई) में स्थापित प्रशिक्षण केंद्र (ट्रेनिंग फैब), देशभर के 75 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में स्पेस लैब्स की स्थापना तथा वृत्तचित्र फिल्म सबसे दूर, सबसे पहले का लोकार्पण शामिल है। अपने संबोधन में माननीय राष्ट्रपति ने विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में प्रत्येक जनजातीय नागरिक की समान भागीदारी सुनिश्चित करने तथा किसी भी आदिवासी समुदाय को विकास की मुख्यधारा से पीछे न छूटने देने के प्रति राष्ट्र की दृढ़ प्रतिबद्धता को व्यक्त किया।
बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र (सीईएनएसई) में स्थापित प्रशिक्षण केंद्र भारत का पहला समर्पित सेमीकंडक्टर माइक्रोफैब्रिकेशन प्रशिक्षण केंद्र है। यह विद्यार्थियों और पेशेवरों को व्यावहारिक कौशल प्रदान करेगा, जिससे देश के बढ़ते सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उद्योग-तैयार प्रतिभाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने क्लीनरूम अवसंरचना और विशेष प्रशिक्षण उपकरणों की स्थापना के लिए 4.7 करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग प्रदान किया है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 18 राज्यों के 75 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में अत्याधुनिक स्पेस लैब्स की स्थापना की गई है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) ढांचे के अंतर्गत लगभग 12 करोड़ रुपये के निवेश से कार्यान्वित यह पहल जनजातीय विद्यार्थियों के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के नए द्वार खोल रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त अंतरिक्ष प्रशिक्षक एजेंसियों के तकनीकी मार्गदर्शन में विकसित इन प्रयोगशालाओं से लगभग 50,000 आदिवासी विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की अपेक्षा है। इन अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों में अनुभवात्मक शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है, ताकि वे एयरोस्पेस, खगोल विज्ञान, उपग्रह प्रौद्योगिकी,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा अन्य उभरते एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में करियर के अवसरों का लाभ उठा सकें। अपने संबोधन में माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैज्ञानिक शिक्षा और नवाचार के महत्व पर बल देते हुए कहा कि देशभर में जनजातीय विद्यार्थियों को उन्नत शिक्षण अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसी और प्रयोगशालाओं की स्थापना की जानी चाहिए।
माननीय राष्ट्रपति ने जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत 18 मई से 25 जून 2026 तक आयोजित जन भागीदारी अभियान को दर्शाने वाली लघु फिल्म 'सबसे दूर, सबसे पहले' का भी लोकार्पण किया। इस अभियान ने अभूतपूर्व जन लामबंदी प्रयासों के माध्यम से देश के कुछ सबसे दूरस्थ स्थानों में रहने वाले आदिवासी समुदायों तक सरकारी सेवाएं सीधे पहुंचाई हैं।

माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुअल ओराम ने आयोजन को संबोधित करते हुए सरकार के उस दृष्टिकोण के बारे में बताया जिसके तहत आदिवासी समुदायों को केवल कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में ही नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में समान भागीदार के रूप में स्थापित किया जाएगा। जनजातीय और वन-निर्भर क्षेत्रों में विकास के अंतर को पाटने में आईटीडीए (आंतरिक विकास विकास प्राधिकरण) की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के कर्मचारियों, वित्तपोषण एवं जवाबदेही तंत्र में संरचनात्मक परिवर्तन का समय आ गया है।
श्री जुअल ओराम ने घोषणा करते हुए कहा कि मंत्रालय आईटीडीए पदाधिकारियों के लिए एक समर्पित क्षमता-निर्माण ढांचा तैयार करने पर विचार कर रहा है, ताकि परियोजना अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मियों को आधुनिक शासन कौशल, डिजिटल उपकरण व सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से अवगत कराया जा सके। उन्होंने विभागों के बीच समन्वय के महत्व पर बल देते हुए कहा कि आईटीडीए के नेतृत्व में समन्वित क्षेत्र-आधारित योजना, अलग-थलग योजना कार्यान्वयन की तुलना में कहीं अधिक बेहतर परिणाम देती है। श्री जुअल ओराम ने राज्यों को सहयोग देने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन से उभरने वाला राष्ट्रीय रोडमैप आगामी दशक में जनजातीय शासन सुधारों का मार्गदर्शन करेगा।

जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आईटीडीए (आदिवासी विकास प्राधिकरण) भारत की जनजातीय शासन संरचना के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं और इनकी प्रभावशीलता करोड़ों अनुसूचित जनजाति नागरिकों के जीवन स्तर को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) जैसी प्रमुख गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय कल्याण निवेशों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
श्री दुर्गादास उइके ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी अंतिम-छोर वितरण सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों के बढ़े हुए आवंटन के साथ-साथ संस्थागत क्षमता को भी बेहतर करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आईटीडीए को मजबूत करना अनुसूचित जनजातियों के लिए संवैधानिक प्रतिबद्धता को पूरा करने के उद्देश्य से अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्री दुर्गादास उइके ने परियोजना अधिकारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं को केवल प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि परिवर्तन के अभिकर्ता के रूप में देखें और सम्मेलन की सिफारिशों को प्रतिबद्धता एवं तत्परता के साथ आगे बढ़ाएं।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने स्वागत भाषण देते हुए जनजातीय उप-योजना प्रशासनिक इकाइयों से जनजातीय विकास के एकीकृत मंचों तक आईटीडीए के विकास का विवरण दिया। उन्होंने कहा कि यद्यपि आईटीडीए सामूहिक रूप से देश में अनुसूचित जनजाति की सबसे बड़ी आबादी की सेवा करते हैं, फिर भी कर्मचारियों की कमी, सीमित समन्वय, निधियों के असंगत उपयोग और प्रौद्योगिकी को अपर्याप्त रूप से अपनाने के कारण संस्थागत क्षमताएं असमान बनी हुई हैं।
रंजना चोपड़ा ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य समीक्षा करना नहीं, बल्कि राज्यों और मंत्रालय द्वारा कार्यान्वयन हेतु व्यावहारिक सुझाव तैयार करने के लिए एक दूरदर्शी संवाद स्थापित करना है। प्रतिभागियों से विषयगत चर्चाओं में रचनात्मक रूप से भाग लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये विचार-विमर्श देशभर में जनजातीय विकास संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण जनजातीय कार्य मंत्रालय की निदेशक डॉ. वरनाली डेका, आईएएस द्वारा आईटीडीए और आईटीडीपी को मजबूत करने के लिए तैयार किए गए लघु, मध्य एवं दीर्घकालिक रोडमैप का मसौदा प्रस्तुत करना था। यह रोडमैप आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्यों में परियोजना अधिकारियों, जनजातीय समुदायों तथा राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय कार्यशालाओं, क्षेत्रीय दौरों व संवादों सहित एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया था।
डेका ने माननीय प्रधानमंत्री द्वारा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रतिपादित एम.ए.एन.ए.वी. ढांचे (नैतिक व उचित प्रणाली, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभ एवं समावेशी एआई और वैध तथा न्यायसंगत प्रणाली) के अनुरूप उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह ढांचा पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता सुनिश्चित करते हुए निगरानी, लाभार्थी ट्रैकिंग तथा शिकायत निवारण के लिए एआई-आधारित उपकरणों के उपयोग में मंत्रालय का मार्गदर्शन करेगा।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के उप सचिव जफर मलिक ने इनमें से कई राज्यों में परामर्श सत्रों का नेतृत्व किया, जो मंत्रालय की जमीनी स्तर पर सहभागिता प्रक्रिया का आधार बने। यह रोडमैप इन परामर्श सत्रों से प्राप्त सीखों, चुनौतियों और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का सार प्रस्तुत करता है और संस्थागत क्षमता, मानव संसाधन, निधि प्रवाह तंत्र, अभिसरण व निगरानी प्रणालियों में सुधारों का प्रस्ताव करता है।
सम्मेलन में चार विषयगत ब्रेकआउट समूहों का गठन किया गया, जिन्होंने निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श किया: (i) संस्थागत ढांचा एवं मानव संसाधन; (ii) निधि प्रवाह और वित्तीय संरचना; (iii) निगरानी, मूल्यांकन व आईटी प्रणाली; तथा (iv) अभिसरण एवं योजना कार्यान्वयन। समूहों द्वारा दिए गए सुझावों को बाद में पूर्ण सत्र में प्रस्तुत किया गया।


समापन सत्र में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने भाग लिया, जिन्होंने जनजातीय वितरण संस्थानों को बेहतर करने की दिशा में मंत्रालय के व्यवस्थित दृष्टिकोण की सराहना की और जनजातीय क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित तथा डेटा-संचालित शासन के महत्व पर जोर दिया।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव मनीष ठाकुर ने समापन भाषण दिया और साक्ष्य-आधारित आईटीडीए नैदानिक स्कोरिंग फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जिसे सम्मेलन की चर्चाओं को एक विश्वसनीय राष्ट्रीय सुधार रोडमैप में बदलने के लिए तैयार किया गया है। यह फ्रेमवर्क 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 214 आईटीडीए का आकलन पांच संस्थागत क्षेत्रों से संबंधित 15 मापदंडों पर करता है, जिनमें अधिकार, कर्मचारी, योजना, अधिकार तथा परिणाम शामिल हैं।
मनीष ने पांच स्तरीय आईटीडीए परिपक्वता मॉडल का भी अनावरण किया, जो स्तर 1 पर एक बुनियादी प्रशासनिक कार्यालय से लेकर स्तर 5 पर अधिकार-आधारित, डेटा-संचालित संस्था तक फैला हुआ है। उन्होंने आईटीडीए से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे, अधिकारों तथा डिजिटल शासन प्रणालियों में समन्वय स्थापित करने वाली एकीकृत क्षेत्र-विकास संस्थाओं के रूप में कार्य करने का आह्वान किया।
अपर सचिव ने सम्मेलन से उभरे दृष्टिकोण का सारांश प्रस्तुत करते हुए कहा कि “कमजोरों को सशक्त बनाएं। मजबूतों का विस्तार करें। जो कारगर हैं उन्हें मानकीकृत करें। जो कठिन हैं उनमें सहयोग दें।” उन्होंने कहा कि राज्यों से आईटीडीए नोडल अधिकारियों को नामित करने और राष्ट्रीय रोडमैप को अंतिम रूप देने तथा प्रसारित करने में सहायता के लिए आधारभूत डेटा प्रस्तुत करने का अनुरोध किया जाएगा।
इस सम्मेलन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आईटीडीए/आईटीडीपी को पुरस्कार भी दिए गए, जिनमें सेवा वितरण, समन्वय, निधि उपयोग और सामुदायिक संपर्क में उत्कृष्टता प्रदर्शित करने वाले परियोजना अधिकारियों और एजेंसियों को सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करना और जनजातीय क्षेत्रों में सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के अनुकरण को बढ़ावा देना था।
आईटीडीए और आईटीडीपी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सहित राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों में काम करते हैं, जो पीएम-जनमन, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा अन्य जनजातीय विकास कार्यक्रमों जैसी प्रमुख गतिविधियों के लिए प्रमुख वितरण तंत्र के रूप में कार्य करते हैं।
जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत 18 मई से 25 जून 2026 तक आयोजित जन भागीदारी अभियान के दौरान, देश भर में 57,000 से अधिक शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके परिणामस्वरूप 90 लाख से अधिक आदिवासी लाभार्थियों को लाभ मिला। इस अभियान के माध्यम से एमजीएनआरईजीए, आधार कार्ड, आयुष्मान भारत, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, पेंशन योजनाएं और सिकल सेल रोग की जांच जैसी महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं तक पहुंच सुगम हुई।
इस अभियान ने आदिवासी बस्तियों में 37,000 से अधिक सूचना एवं संचार उपकरण (आईईसी) के साथ 21,000 सेल्फी पॉइंट स्थापित करके और लगभग 20,000 भित्तिचित्र बनाकर जागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया है। सेवा वितरण के अलावा, इस अभियान ने आदिवासी संस्कृति, उद्यमिता, युवा भागीदारी व डिजिटल समावेशन को भी बढ़ावा दिया, जो जन भागीदारी की भावना को दर्शाता है और सरकार की इस प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है कि विकास के लाभ अंतिम छोर तक पहुंचें तथा आदिवासी समुदायों को विकसित भारत की यात्रा में सक्रिय भागीदार के रूप में सशक्त बनाया जाए।












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