पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण कार्य योजना की समीक्षा की
श्री भूपेंद्र यादव ने कार्यान्वयन में मौजूद कमियों को उजागर करते हुए सड़क धूल नियंत्रण, बुद्धिमान यातायात प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन उपायों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आग्रह किया
श्री भूपेंद्र यादव ने कहा- जन स्वास्थ्य की रक्षा और नागरिक जीवन स्तर में सुधार के लिए नियोजित कदमों का समय पर कार्यान्वयन, सख्त प्रवर्तन और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है
प्रविष्टि तिथि:
26 MAY 2026 6:58PM by PIB Delhi
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की। राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से चल रहे उपायों की प्रगति का बैठक में आकलन किया गया। केंद्रीय मंत्री ने शीत ऋतु के प्रारंभ से पहले प्रदूषण के स्तर में पर्याप्त कमी सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्यान्वयन, मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय और कड़े प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह और पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री सरदार मंजिंदर सिंह सिरसा बैठक में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में शामिल रहे।

श्री यादव ने इस बात पर बल दिया कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा निरंतर और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कार्यान्वयन में पाई गई कमियों को मिशन-आधारित तरीके से दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “आने वाले महीने दिल्ली के वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। जन स्वास्थ्य की रक्षा और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए नियोजित उपायों को समय पर पूरा करना, कड़ाई से लागू करना और जमीनी स्तर पर समन्वित कार्रवाई करना आवश्यक है।”
सड़क पर धूल प्रदूषण कम करने के मुद्दे की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने सड़क पुनर्निर्माण के वार्षिक लक्ष्यों को पूरा करने और योजना, निविदा प्रक्रिया, कार्य आदेश जारी करने में देरी और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान को दूर करने के लिए अधिक केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी लंबित पुनर्निर्माण कार्य अक्टूबर 2026 तक पूरे करने के लिए दिल्ली सरकार से लक्षित कार्य योजना के अनुसार कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया। श्री यादव ने धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सड़कों के किनारे खुले स्थानों की पहचान करके व्यापक हरियाली गतिविधियों का भी आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि निर्धारित सड़क विकास मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और योजना एवं वास्तुकला विद्यालय (एसपीए) के साथ लंबित समझौता ज्ञापन (एमओए) को मई 2026 के अंत तक अंतिम रूप दिया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने मशीनीकृत सड़क सफाई मशीनों (एमआरएसएम) की तैनाती की समीक्षा की और इनकी वर्तमान संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता के बारे में बताया। उन्होंने दिल्ली सरकार से सड़क सफाई अभियान तेज करने और पहले के प्रस्ताव के अनुसार सितंबर 2026 तक 78 बड़ी और मध्यम आकार की एमआरएसएम मशीनों के साथ-साथ 1,000 कूड़ा बीनने वाली मशीनों को शामिल करने को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कण प्रदूषण को कम करने के लिए गहन और विस्तृत सड़क सफाई और धूल नियंत्रण सबसे प्रभावी उपायों में से हैं।
श्री यादव ने सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विषय पर अधिक इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की आवश्यकता पर बल दिया और दिल्ली सरकार से अक्टूबर 2026 तक चरणबद्ध कार्य योजना के माध्यम से इस कमी को पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने पूरे शहर में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के सार्वजनिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे में तेजी से वृद्धि की आवश्यकता पर भी बल दिया। क्षेत्रीय समन्वय के महत्व पर बल देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री जी ने दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क को मजबूत करने और मांग-आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए बहु-मोडल लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक पहुंच) में सुधार करने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग प्रोत्साहित हो और वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आए। उन्होंने आग्रह किया कि यात्रियों के लिए सुगम और सुविधाजनक आवागमन सुनिश्चित करने के लिए अंतिम छोर तक पहुंच वाले पहलों को व्यापक शहरी परिवहन योजना के साथ पूरी तरह से एकीकृत किया जाना चाहिए।
श्री यादव ने पुराने वाहनों से सम्बंधित उपायों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से एनसीआर क्षेत्र से बाहर पुराने वाहनों के स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि निगरानी और प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए सितंबर 2026 तक सभी सीमा प्रवेश नाकों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएं। श्री यादव ने दिल्ली में वाणिज्यिक वाहनों की फिटनेस जांच क्षमता बढ़ाने पर भी बल दिया।

केंद्रीय मंत्री जी ने यह भी आग्रह किया कि दिल्ली में 15 क्षेत्रों को सितंबर 2026 तक सिग्नल-मुक्त कॉरिडोर के रूप में चिह्नित और विकसित किया जाए। इसका उद्देश्य यातायात जाम और वाहनों के निष्क्रिय रहने से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। उन्होंने सम्बंधित एजेंसियों से प्रमुख प्रदूषण केंद्रों की पहचान करने और यातायात जाम को कम करने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लक्षित उपाय करने को भी कहा।
सार्वजनिक पार्किंग अवसंरचना की समीक्षा के दौरान, श्री यादव ने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नई पार्किंग सुविधाओं के विकास को और अधिक गति देने का आह्वान किया । उन्होंने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि वह लक्षित कार्रवाई करे और अनुमोदित योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं उपलब्ध कराए।
औद्योगिक प्रदूषण के विषय पर केंद्रीय मंत्री जी ने बल दिया कि सभी औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (एपीसीडी) का नियमित अंशांकन और सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए, और सीएक्यूएम द्वारा जारी औद्योगिक उत्सर्जन के नए मानदंडों के अनुसार एपीसीडी की पर्याप्तता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नियमित रूप से निरीक्षण किए जाने चाहिए और जीएनसीटीडी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन ओसीईएमएस उपकरणों से प्राप्त डेटा निगरानी के लिए सीपीसीबी सर्वर पर निरंतर प्रवाहित होता रहे। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर सील लगाना भी शामिल है।
श्री यादव ने मानकों का उल्लंघन करने वाले क्षेत्रों में संचालित उद्योगों के निरीक्षण को तेज करने का आह्वान किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जिला प्रशासन को शामिल करते हुए पर्यावरण मानदंडों के अनुसार ऐसी इकाइयों के स्थानांतरण, नियमितीकरण और बंद करने के लिए उचित कार्रवाई करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पूरे शहर में मानकों का उल्लंघन करने वाले डीजल जनरेटर सेटों के खिलाफ प्रवर्तन अभियान तेज किए जाएं।
निर्माण एवं तोड़फोड़ (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने प्रसंस्करण क्षमता में प्रतिदिन लगभग 1,000 टन की मौजूदा कमी को उजागर किया और दिसंबर 2026 तक अतिरिक्त प्रसंस्करण सुविधाओं को बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने दिल्ली नगर निगम से जुलाई 2026 तक सभी सी एंड डी अपशिष्ट परिवहन वाहनों की जियोटैगिंग सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया। कड़ी निगरानी की आवश्यकता पर बल देते हुए, श्री यादव ने डीपीसीसी, एमसीडी और एनडीएमसी से निर्माण स्थलों पर निरीक्षण तेज करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि प्रत्येक सक्रिय निर्माण स्थल का कम से कम महीने में एक बार निरीक्षण किया जाए। उन्होंने गैर-अनुपालन करने वाले स्थलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया और सरकारी एजेंसियों से संसाधित सी एंड डी अपशिष्ट के उपयोग और निकासी के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया।
नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सम्बंध में, केंद्रीय मंत्री जी ने दिल्ली सरकार से निर्धारित समयसीमा के भीतर पुराने अपशिष्ट निपटान लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने सितंबर 2026 तक नए नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों के विस्तार की आवश्यकता पर भी बल दिया और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों के चालू होने के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित करने का आह्वान किया।

सर्दियों के मौसम में कचरा जलाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री यादव ने खुले में कचरा जलाने के खिलाफ सख्त नीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों से उल्लंघन रोकने के लिए पर्याप्त प्रवर्तन दल तैनात करने का आह्वान किया और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को सलाह दी कि वे सर्दियों के दौरान श्रमिकों को हीटिंग की सुविधा प्रदान करें ताकि खुले में कचरा जलाने की प्रथा को हतोत्साहित किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री महोदय ने प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों के महत्व पर भी बल दिया और निर्देश दिया कि सीएक्यूएम आईईसी ढांचे के अनुसार सभी हितधारकों को जागरूक किया जाए। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि दिल्ली में चिन्हित सभी 36 स्थानों पर हरित श्मशान घाटों की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
जनभागीदारी और समन्वित संस्थागत कार्रवाई के महत्व पर बल देते हुए, श्री यादव ने सुझाव दिया कि गहन हरियाली और सफाई अभियान तुरंत शुरू करने और मॉनसून समाप्त होने के बाद भी इन्हें आयोजित करने के लिए कहा है। इससे बारिश के बाद सड़कों/नालियों/रेल पटरियों पर जमा होने वाली धूल की समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी, जो वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनती है। श्री यादव ने यह भी कहा कि इन अभियानों में 'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण समाज' का दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। इसमें केंद्र और दिल्ली सरकार के संयुक्त प्रयास शामिल हों और जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और हर स्तर पर निरंतर कार्रवाई आवश्यक है। केंद्र सरकार दिल्ली सरकार और सभी हितधारकों के साथ मिलकर दिल्लीवासियों के लिए स्वच्छ वायु सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के प्रमुख क्षेत्रों से निपटने के लिए राजनीतिक और सरकारी प्रतिनिधियों से मिलकर कार्य बल गठित कर सकती है। उन्होंने कहा कि ये टीमें सम्बंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मासिक समीक्षा कर सकती हैं।
इस बैठक में वायु गुणवत्ता नियंत्रण आयोग (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) के सचिव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, सीपीसीबी, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, एनडीएमसी, दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस और सार्वजनिक परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
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पीके/केसी/वीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2265618)
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