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भारत की ग्रीनहाउस गैस इन्वेंटरी प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने पर सीएसआईआर-आईआईपी में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित

प्रविष्टि तिथि: 22 MAY 2026 6:08PM by PIB Delhi

भारत अग्रणी विकासशील देश के रूप में, अपने राष्ट्रीय ग्रीनहाउस गैस इन्वेंटरी सिस्टम को सुदृढ बनाकर और कार्बन उत्सर्जन लेखांकन (वह व्यवस्थित प्रक्रिया जिसके द्वारा गतिविधियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वातावरण में छोड़ी गई ग्रीनहाउस गैसों की कुल मात्रा मापी जाती है) में सुधार कर वैश्विक जलवायु कार्रवाई में सक्रियता से योगदान दे रहा है। उसने हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को अपनी पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस प्रस्तुति के बाद वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी) और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से सीएसआईआर-आईआईपी, देहरादून में राष्ट्रीय ग्रीनहाउस गैस इन्वेंटरी पर तीन दिवसीय ज्ञान साझाकरण कार्यशाला 20 से 22 मई, 2026 तक आयोजित की गई।

कार्यशाला में सीएसआईआर-केंद्रीय खनन और ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआईएमएफआर), केंद्रीय खान योजना और डिजाइन संस्थान लिमिटेड (सीएमपीडीआई), भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), आईआईटी-इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईआईटी-आईएसएम, धनबाद), राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान (एनआईएएस), ऊर्जा कुशल अर्थव्यवस्था गठबंधन (एईईई) और जादवपुर विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने ऊर्जा और औद्योगिक प्रक्रियाओं और उत्पाद उपयोग (आईपीपीयू) क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) लेखांकन पर चर्चा की।

कार्यशाला का उद्घाटन सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने किया। उन्होंने उत्सर्जन लेखांकन और शमन के लिए सतत प्रौद्योगिकी के महत्व पर बल दिया। विभिन्‍न सत्रों की अध्यक्षता श्री शरथ कुमार पल्लेरला (सलाहकार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, श्री अजय राघवा (अपर निदेशक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, प्रोफेसर अमित गर्ग (आईआईएम अहमदाबाद) और डॉ. सुनील कुमार पाठक (मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईपी) ने की। इन सत्रों में बीटीआर और यूएनएफसीसीसी रिपोर्टिंग (द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट और यूएनएफसीसीसी रिपोर्टिंग जलवायु परिवर्तन की वैश्विक लड़ाई में प्रगति, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु कार्रवाई की निगरानी रखने के अनिवार्य साधन) उन्नत पारदर्शिता ढांचे और ग्रीनहाउस गैस सूची तैयार करने में प्रमुख कमियों और चुनौतियों पर चर्चा की गई।

कार्यशाला में द्वितीय द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट तैयार करने और भारत के लिए देश-विशिष्ट उत्सर्जन कारकों को विकसित करने पर तकनीकी और विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किए गए। इन पर विमर्श में ऊर्जा और औद्योगिक प्रक्रिया और उत्पाद उपयोग - आईपीपीयू क्षेत्रों के उत्सर्जन लेखांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें लोहा और इस्पात, सड़क परिवहन, पाइपलाइन परिवहन, अनियंत्रित उत्सर्जन और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन शामिल हैं। विचार-विमर्श में प्रमुख श्रेणियों की रिपोर्टिंग और परिवहन ईंधन में इथेनॉल मिश्रण की भूमिका, और केंद्र सरकार की 2047 तक विकसित भारत की भविष्य योजना के अनुरूप ईंधन आयात कम करने में इसके अनुमान पर भी चर्चा हुई।

भारत द्वारा 2026 के अंत तक द्वितीय द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट और 2028 तक तृतीय द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने पर चर्चा के साथ कार्यशाला संपन्न हुई।

कार्यक्रम के समापन के बाद सीएसआईआर-आईआईपी में नवनिर्मित सेल्फी प्वाइंट का भी उद्घाटन किया गया।

 

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पीके/केसी/एकेवी/एसके


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