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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर आईसीएमआर ने तीन स्वदेशी चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को उद्योग को हस्तांतरित किया

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस कार्यक्रम 'विज्ञान- टेक ' भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए 14 वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों को एक मंच पर एकत्रित किया

प्रविष्टि तिथि: 11 MAY 2026 5:58PM by PIB Delhi

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर बीआरआईसी-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई), नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम 'विज्ञान - टेक' में भाग लिया। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सहयोग से समन्वित इस कार्यक्रम में सरकार के समग्र सहयोग का दृष्टिकोण झलकता है, जिसमें भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रगति का जश्न मनाने के लिए 14 वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाया गया।

इस कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिरकत की, जिन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और नवप्रवर्तकों एवं प्रदर्शकों से बातचीत की। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अपने प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत, आईसीएमआर ने जैव-फार्मा, स्वास्थ्य और जैव-औद्योगिक एवं हरित रसायन क्षेत्रों में फैली छह उच्च-प्रभावशाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। इनमें कोवैक्सिन, कोविड कवच एलिसा किट, सीआरआईएसपीआर-कैस आधारित टीबी पहचान प्रणाली, निपाह प्वाइंट-ऑफ-केयर एसे, डेंगू की पहचान के लिए एक डायग्नोस्टिक एलिसा किट और मच्छर नियंत्रण के लिए एक बायोलार्विसाइड शामिल थे।

इसके अतिरिक्त, इस आयोजन के दौरान जारी आधिकारिक संकलन में विभिन्न आईसीएमआर संस्थानों द्वारा विकसित 25 आशाजनक प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को शामिल किया गया। इन नवाचारों ने निदान, चिकित्सा उपकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, रोग निगरानी और अनुवांशिक अनुसंधान में आईसीएमआर के महत्वपूर्ण योगदान को उजागर किया, जिससे स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को संबोधित करने की इसकी प्रतिबद्धता को बल मिला।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आईसीएमआर की मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल के तहत सुगम बनाए गए लाइसेंसिंग समझौतों के माध्यम से आईसीएमआर द्वारा विकसित तीन प्रौद्योगिकियों का उद्योग भागीदारों को हस्तांतरण था।

पहली तकनीक, जिसका शीर्षक "पीएसए 20 ng/ml से कम वाले मरीज़ों में प्रोस्टेट बायोप्सी के फ़ैसलों में मदद के लिए एक किफ़ायती पीएसपी 94 एलिसा का विकास" है, को आईसीएमआरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर रिसर्च इन वीमेन्स हेल्थ (आईसीएमआर-एनआईआरडब्ल्यूओएच) में डॉ. धनश्री जगताप, डॉ. स्मिता महाले और डॉ. भक्ति पाठक ने विकसित किया था। इस तकनीक का लाइसेंस कृषजेन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।

दूसरी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में "फैक्टर VIII इनहिबिटर / कोगुलेशन डिसऑर्डर पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक" शामिल था, जिसे आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन ब्लड एंड इम्यून डिसऑर्डर्स (आईसीएमआर-एनआईआरबीआईडी) में डॉ. रुचा पाटिल द्वारा विकसित किया गया था। इस प्रौद्योगिकी का लाइसेंस मेरिल लाइफ साइंसेज को दिया गया था।

तीसरी तकनीक, "डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस का पता लगाने के लिए सिंगल-ट्यूब मल्टीप्लेक्स रियल-टाइम आरटी-पीसीआर," को आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईवी) में डॉ. अलागारासु के द्वारा विकसित किया गया था और वैनगार्ड लाइफ साइंसेज को लाइसेंस दिया गया था।

ये प्रौद्योगिकी हस्तांतरण राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समझौता ज्ञापन विनिमय सत्र के दौरान किए गए, जो भाग लेने वाले मंत्रालयों और विभागों के स्वायत्त संस्थानों और प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाले एक राष्ट्रीय संकलन के विमोचन के साथ आयोजित किया गया था।

इन प्रौद्योगिकियों का सफल हस्तांतरण सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित नवाचारों की सुरक्षा के लिए आईसीएमआर की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसके तहत संरचित बौद्धिक संपदा सहायता प्रदान की जाती है और साथ ही उद्योग-अनुकूल समाधानों में उनका सहज रूपांतरण सुनिश्चित किया जाता है। यह पहल स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देकर, चिकित्सा नवाचार मूल्य श्रृंखला को मजबूत करके और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को विकसित करके ' मेक इन भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

'विज्ञान - टेक'' कार्यक्रम ने भारत के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने और सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य किया। इस आयोजन ने विकसित भारत की परिकल्पना के समर्थन में एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों के सामूहिक संकल्प की पुष्टि की।

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