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सीसीआरयूएम का “यूनानी पद्धति में नवाचार और साक्ष्य” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन मुंबई में संपन्न हुआ


मुंबई में यूनानी दिवस 2026 समारोह में साक्ष्य-आधारित यूनानी चिकित्सा में नवाचार, अनुसंधान और सहयोग को प्रदर्शित किया गया

विशेषज्ञों ने यूनानी स्वास्थ्य सेवा को मुख्यधारा में लाने के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणन, डिजिटल एकीकरण और वैश्विक पहुंच का आह्वान किया

नौ वैज्ञानिक सत्रों में दवा विकास, रेजिमेनल थेरेपी, इलाज़-बिल-ग़िज़ा और अत्याधुनिक यूनानी अनुसंधान में प्रगति के बारे में जानकारी दी गई

सीसीआरयूएम ने नए प्रकाशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों का शुभारंभ किया और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, साथ ही आरआरआईयूएम मुंबई ने अपनी प्रयोगशालाओं के लिए एनएबीएल प्रमाणन प्राप्त किया

प्रविष्टि तिथि: 15 FEB 2026 8:13PM by PIB Delhi

यूनानी दिवस 2026 के भव्य समारोह के साथ-साथ “यूनानी पद्धति में नवाचार और साक्ष्य” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा के युग में यूनानी चिकित्सा के भविष्य के रोडमैप पर विचार-विमर्श करने के लिए देश भर के प्रख्यात विद्वानों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, चिकित्सकों और छात्रों को एक मंच प्रदान किया।

यूनानी चिकित्सा पद्धति की समृद्ध विरासत और योगदान की स्मृति में 14 फरवरी 2026 को यूनानी दिवस मनाया गया। समापन दिवस पर एक वैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने किया। इससे पहले, मंत्री महोदय ने ऐतिहासिक जे. जे. अस्पताल परिसर में क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आरआरआईयूएम) के पुनर्निमित सह-स्थान केंद्र का भी उद्घाटन किया, जिससे नैदानिक, अनुसंधान और रोगी-देखभाल बुनियादी ढांचा मज़बूत हुआ।

समापन सत्र में आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) के अंतर्गत यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर असीम अली खान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संबोधन में  शैक्षणिक मानकों को मजबूत करने, वैज्ञानिक प्रमाणन बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि यूनानी चिकित्सा को दुनिया भर में पहचान मिल सके और यह मुख्यधारा में शामिल हो सके।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में आयुष मंत्रालय के सलाहकार (यूनानी) डॉ. एम. ए. कासमी; सीसीआरयूएम के उप महानिदेशक डॉ. यूनिस इफ्तिखार मुंशी; मुंबई के अंजुमन-ए-इस्लाम कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. ज़हीर आई. काज़ी; वेदन ग्रुप, बरेली के चेयरमैन हकीम खुर्शीद मुराद; और आरआरआईयूएम, मुंबई के रिसर्च ऑफिसर (यूनानी) और नोडल ऑफिसर (जे.जे. को-लोकेशन) डॉ. मसरूर कुरैशी शामिल थे। पुणे के जेडवीएम यूनानी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के प्रो. (डॉ.) काज़ी राशि अनवर और वाइस प्रिंसिपल डॉ. जलील को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

सम्मेलन में नौ विषयगत वैज्ञानिक सत्र शामिल थे जो नवाचार, साक्ष्य जुटाने, दवा मानकीकरण, रेजिमेनल थेरेपी, इलाज़-बिल-गिज़ा (डायटोथेरेपी), ट्रांसलेशनल रिसर्च, जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पारंपरिक यूनानी सिद्धांतों के साथ आधुनिक तकनीकों के एकीकरण पर केंद्रित थे।

वैज्ञानिक सत्र I – यूनानी फार्मूलेशन और दवा विकास में नवाचार

डॉ. अहमद अली; डॉ. वी. एन. अज़गर दुस्ताकीर; डॉ. योगिता गोयल; डॉ. दिनेश मणि त्रिपाठी।

वैज्ञानिक सत्र II – यूनानी चिकित्सा में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देना

डॉ. रुचिका कौल घनेकर; डॉ. अमीषा वोरा; डॉ. एम. रसूल; डॉ. सईद अहमद।

वैज्ञानिक सत्र III – यूनानी मेडिसिन में ट्रांसलेशनल रिसर्च

डॉ. नितिन शर्मा; डॉ. नवनीत शर्मा; डॉ. मोहम्मद उरोज; डॉ. अजीजुद्दीन खान।

वैज्ञानिक सत्र IV – इलाज-बिल-गिज़ा (पोषण और जीवनशैली प्रबंधन) में प्रगतियां

एफएसएसएआई के प्रतिनिधि; डॉ. शेख निखत परवीन; प्रो. एरम एस. राव; प्रो. एशिया सुल्ताना।

वैज्ञानिक सत्र V – नैदानिक पद्धतियों और रोग प्रबंधन में नवाचार

डॉ. उज़मा बानो; प्रो. मोहम्मद अलीमुद्दीन क़मरी; डॉ. ग़ज़ाला मुल्ला; डॉ. हुमैरा बानो।

वैज्ञानिक सत्र VI – यूनानी अनुसंधान में हाल में हुई प्रगति

डॉ. मोहम्मद नवाब; प्रो. खान मोहम्मद कैसर; डॉ. मोहम्मद काशिफ हुसैन; डॉ. मिस्बाहुद्दीन अज़हर।

वैज्ञानिक सत्र VII – इलाज-बिल-तदबीर (रेजिमेनल थेरेपी) और स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती में प्रगति

प्रो. मोहम्मद अनवर; डॉ. नोमान अनवर; डॉ. तमन्ना नाज़ली; डॉ. फारूकी शाज़िया परवीन; डॉ. शाइस्ता उरोज।

वैज्ञानिक सत्र VIII - यूनानी अनुसंधान एवं विकास में जीनोमिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका

डॉ. मोहम्मद इदरीस; प्रो. बी. विजया लक्ष्मी; डॉ. उसामा अकरम; डॉ. मोहम्मद मंजर आलम; प्रो. कमर उद्दीन।

वैज्ञानिक सत्र IX – यूनानी क्लासिक्स और दवा मानकीकरण से साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण

डॉ. अमानुल्लाह; डॉ. फखरे आलम; डॉ. मुनिरा मोमिन; प्रो. लोकेश कुमार भट्ट; डॉ. बिलाल अहमद।

 

सम्मेलन की मुख्य बातें

01 अंतर्राष्ट्रीय और 08 राष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान।

सीसीआरयूएम प्रकाशनों और सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन।

सीसीआरयूएम सहयोगात्मक रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप्लिकेशन का शुभारंभ।

मिज़ाज-ए-इंसां के मूल्यांकन के लिए प्रश्नावली की प्रस्तुति।

आरआरआईयूएम, मुंबई प्रयोगशालाओं को एनएबीएल प्रमाणन प्रदान किया गया।

सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र और संस्थानों के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

विचार-विमर्श में एकीकृत और समावेशी स्वास्थ्य सेवा के लिए आयुष मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुरूप यूनानी चिकित्सा के भविष्य को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक स्तंभों के रूप में नवाचार, वैज्ञानिक सटीकता, डिजिटल एकीकरण और वैश्विक सहयोग को दोहराया गया।

यूनानी दिवस और राष्ट्रीय सम्मेलन से संबंधित प्रेस विज्ञप्तियों को नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से पढ़ा जा सकता है।

पूर्वावलोकन कार्यक्रम का लिंक : https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227528&reg=3&lang=1

उद्घाटन कार्यक्रम (14 फरवरी 2026) का लिंक : https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227999&reg=3&lang=1


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