आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
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एएमआरयूटी के लिए वित्तपोषण का स्वरूप

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 5:11PM by PIB Delhi

अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (एएमआरयूटी) का शुभारंभ 25 जून 2015 को देश भर के चयनित 500 शहरों (15 विलय किये गये शहरों सहित 485 शहर) और कस्बों में किया गया था। इस मिशन का उद्देश्य चयनित शहरों और कस्बों में जल आपूर्ति, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन, वर्षा जल निकासी, हरित क्षेत्र एवं पार्क और गैर-मोटराइज़्ड शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना था। एएमआरयूटी के अंतर्गत कुल 83,471 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में से राज्यों ने जल आपूर्ति में 43,359.6 करोड़ रुपये (51.94 प्रतिशत), सीवरेज/सेप्टेज प्रबंधन में 34,467.01 करोड़ रुपये (41.29 प्रतिशत) और जल निकायों के कायाकल्प के लिए 71.29 करोड़ रुपये (0.09 प्रतिशत) की परियोजनाएं शुरू की हैं।

केंद्रीय जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (सीपीएचईईओ) के नियमावली के अनुसार, आपूर्ति किए गए पानी का अस्सी प्रतिशत अपशिष्ट जल के रूप में वापस आता है

अमृत ​​(एएमआरयूटी) के तहत अपशिष्ट जल को एकत्रित करने, उसका उपचार करने और उसे पेयजल एवं जल निकायों में मिलने से रोकने के लिए 34,467.01 करोड़ रुपये की लागत से 889 सीवेज/सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 6,299 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवेज उपचार क्षमता को मंजूरी दी गई है। इसमें से 4,843 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता सृजित की जा चुकी है और 1,437 एमएलडी क्षमता पुनर्चक्रण/पुन: उपयोग के लिए विकसित की गई है।

अमृत को 1 अक्टूबर 2021 को अमृत 2.0 के तहत सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी)/शहरों में शामिल कर लिया गया है। अमृत 2.0 का उद्देश्य शहरों को 'आत्मनिर्भर' और 'जल सुरक्षित' बनाना है। 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन की सार्वभौमिक कवरेज प्रदान करना अमृत 2.0 के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है। इस मिशन के तहत अब तक आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचए) द्वारा 66,117.69 करोड़ रुपये की 583 सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। स्वीकृत परियोजनाओं में 6,649 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता (नई/विस्तार), 65 लाख घरेलू सीवर कनेक्शन और 34,548 किमी सीवर लाइन बिछाना शामिल है। अमृत ​​2.0 प्लेटफॉर्म पर सिटी वाटर बैलेंस प्लान में शहरों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्यों द्वारा उद्योगों, बागवानी, कृषि आदि में लगभग 6,535 एमएलडी उपचारित जल का पुन: उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, अमृत 2.0 के तहत पुनर्चक्रण/पुन: उपयोग के लिए 1,931 एमएलडी क्षमता को मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने अमृत 2.0 सुधारों के तहत "जल ही अमृत" पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने वाले पुनर्चक्रण योग्य उपचारित जल के लिए सीवेज उपचार संयंत्रों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण करना और उपचारित जल की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रोत्साहन देना है। चक्रीयता को संस्थागत रूप देने के लिए इस पहल के तहत 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जल संसाधन पुनर्प्राप्ति प्रकोष्ठ (डब्ल्यूआरआरसी) स्थापित किए गए हैं, जो संसाधन पुनर्प्राप्ति हस्तक्षेपों की योजना बनाने, निगरानी करने और उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने का काम करेंगे।

नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अमृत योजना के तहत 43,359.6 करोड़ रुपये की 1403 जल आपूर्ति परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा देश भर के 2,484 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में 1,19,636.49 करोड़ रुपये की 3,528 जल आपूर्ति परियोजनाओं वाली राज्य जल कार्य योजनाओं (एसडब्ल्यूएपी) को अब तक मंजूरी दी जा चुकी है। अमृत योजना/अमृत योजना 2.0 के माध्यम से और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए शहरी क्षेत्रों में अब तक 238 लाख नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। 90,457.51 किलोमीटर जल पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया/बदला जा चुका है। 5,417 एमएलडी जल शोधन क्षमता विकसित की गई है।

अमृत ​​2.0 के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में प्रतिदिन 11,393 मिलियन लीटर (एमएलडी) जल उपचार क्षमता (नई/वृद्धि) का विकास, 178 लाख नए घरेलू नल कनेक्शन और 1.26 लाख किलोमीटर पाइपलाइन (नई और बदली गई) बिछाना शामिल है।

राज्यों ने अमृत 2.0 के तहत नल से पीने का पानी (डीएफटी) परियोजनाएं शुरू की हैं। राज्यों को प्रत्येक अमृत शहर के भीतर एक जिला मीटर क्षेत्र (डीएमए) या वार्ड में कम से कम एक डीएफटी परियोजना कार्यान्वित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। अमृत 2.0 के तहत 349 शहरी स्थानीय निकायों में 1,153 डीएमए वाली 408 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनसे 16.72 लाख घरों को लाभ मिलेगा।

अमृत ​​2.0 के अंतर्गत अमृत मित्र पहल के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को जल मांग प्रबंधन, जल गुणवत्ता परीक्षण और अन्य जल क्षेत्र परियोजनाओं आदि में शामिल किया गया है। अब तक इस पहल के तहत 38,000 से अधिक एसएचजी सदस्यों को शामिल करते हुए 376.95 करोड़ रुपये की 6,067 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 60.68 करोड़ रुपये की 697 परियोजनाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए स्वीकृत किया गया है।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आईएम/एसके

 


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