सहकारिता मंत्रालय
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एमएससीएस अधिनियम को सुदृढ़ बनाना

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 6:29PM by PIB Delhi

(क)      मौजूदा कानून के अनुसमर्थन द्वारा और सतानवेवां संविधान संशोधन के उपबंधों की अंतर्विष्ट करके बहुराज्‍य सहकारी समितियों में शासन सशक्तीकरण, पारदर्शिता में वृद्धि, जवाबदेही में बढ़ोतरी और निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार, इत्‍यादि हेतु बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (एमएससीएस) (संशोधन) अधिनियम और नियम, 2023 को क्रमश: दिनांक 03.08.2023 और दिनांक 04.08.2023 को अधिसूचित किया गया है ।

सहकारी समितियों के कार्यकरण में विनियामक पर्यवेक्षण और निगरानी को सशक्‍त करने और उनमें वित्तीय अनियमितताओं की रोकथाम हेतु उपर्युक्‍त संशोधन के माध्‍यम से अनेक उपबंध किए गए हैं, जिनमें अन्‍य बातों के साथ निम्‍नलिखित शामिल हैं: -

  1. बहुराज्‍य सहकारी समितियों में समयबद्ध, नियमित और पारदर्शी निर्वाचन कराने के लिए सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण का उपबंध शामिल किया गया है ।
  2. सदस्‍यों की शिकायतों के निवारण हेतु एक तंत्र प्रदान करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा सहकारी ऑम्‍बड्समैन की नियुक्ति ।
  3. पारदर्शिता में सुधार हेतु बहुराज्‍य सहकारी समितियों द्वारा सदस्‍यों को सूचना प्रदान करने के लिए सूचना अधिकारी की नियुक्ति ।
  4. पारदर्शिता में वृद्धि हेतु शीर्ष बहुराज्‍य सहकारी समितियों के संपरीक्षा रिपोर्टों को संसद में प्रस्‍तुत किया जाना ।
  5. लेखांकन और संपरीक्षा में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लेखांकन और संपरीक्षण मानकों का निर्धारण ।
  6. शासन और पारदर्शिता में सुधार हेतु बहुराज्‍य सहकारी समितियों की वार्षिक रिपोर्ट में बोर्ड के ऐसे निर्णयों को शामिल करना जो सर्वसम्‍मति से न लिए गए हों ।
  7. केंद्रीय सरकार द्वारा थ्रिफ्ट और क्रेडिट का व्‍यवसाय करने वाली बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों (तरलता, जोखिम, आदि) का निर्धारण ।
  8. बहुराज्‍य सहकारी समितियों में परिवारवाद और पक्षपात की रोकथाम हेतु किसी बहुराज्‍य सहकारी समिति का निदेशक उन विचार-विमर्शों में उपस्थित नहीं होगा या उन मामलों में मतदान नहीं करेगा जहां वह स्‍वयं या उसके परिजन हितबद्ध पक्ष हों । 
  9. शासन में सुधार के लिए निदेशकों की अयोग्‍यता के अतिरिक्‍त आधार बनाए गए हैं ।
  10. सुरक्षित निवेश और औपनिवेशिक युग से संबंधित प्रतिभूतियों को हटाने के लिए बहुराज्‍य सहकारी समितियों द्वारा निधियों के निवेश के उपबंधों को पुन:परिभाषित किया गया है ।
  11. अधिक वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के लिए बहुराज्‍य सहकारी समितियों के बोर्ड द्वारा अन्‍य गठित समितियों के साथ संपरीक्षा और आचार समिति का गठन किया जाएगा ।
  12. शासन सशक्तीकरण हेतु मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की शर्तों को विनिर्दिष्‍ट किया गया है ।
  13. बहुराज्‍य सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक निर्णयन को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की बैठकों के लिए गणपूर्ति को विनिर्दिष्‍ट किया गया है ।
  14. यदि केंद्रीय पंजीयक को यह सूचना मिलती है कि कपटपूर्ण तरीके से या किसी गैरकानूनी प्रयोजन से व्‍यवसाय किया जा रहा है तो वह जांच पड़ताल करा सकता है ।
  15. यदि किसी बहुराज्‍य सहकारी समिति द्वारा दुर्व्‍यपदेशन (misrepresentation), कपट, इत्‍यादि से पंजीकरण प्राप्‍त किया गया हो तो सुनवाई का अवसर देने के पश्‍चात् के उसके परिसमापन का उपबंध किया गया है ।
  16. बहुराज्‍य सहकारी समितियों के सामुहिक हितों के विरुद्ध सदस्‍यों को कार्य करने से हतोत्‍साहित करने के लिए बहुराज्‍य सहकारी समिति के किसी निष्‍कासित सदस्‍य की निष्‍कासन अवधि को 1 वर्ष से बढ़ा कर 3 वर्ष कर दिया गया है ।
  17. केवल कुछ ही सदस्‍यों द्वारा समिति के संसाधनों का लाभ लेने से रोकने के लिए, सहायक संस्‍थान के रूप में उन संस्‍थानों पर विचार नहीं किया जाएगा जिनमें बहुराज्‍य सहकारी समितियों के सदस्‍यों या उनके परिजनों द्वारा अधिसंख्‍य इक्विटी शेयर धारित किए गए हैं ।

(ख)      बहुराज्‍य सहकारी समितियों में संपरीक्षा प्रक्रिया को सशक्‍त करने के लिए निम्‍नलिखित उपबंध विशिष्‍ट रूप से शामिल किए गए हैं:

  1. 500 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर/जमा वाली बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लिए केंद्रीय पंजीयक द्वारा अनुमोदित संपरीक्षकों के पैनल द्वारा कॉनकरंट संपरीक्षण का उपबंध शामिल किया गया है । कॉनकरंट संपरीक्षण से धोखाधड़ी या अनियमितताएं, यदि कोई हो, का जल्‍द पता लग सकेगा और तदनुसार तत्‍काल सुधार किया जा सकेगा ।
  2. बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लिए संपरीक्षकों के निम्‍नलिखित  दो पैनल अधिसूचित किए गए हैं:
  1. पांच सौ करोड़ रुपये तक के वार्षिक टर्नओवर/जमा (जैसा भी मामला हो) वाली बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लिए सांविधिक संपरीक्षण हेतु संपरीक्षकों का पैनल ।
  2. पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक टर्नओवर/जमा (जैसा भी मामला हो) वाली बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लिए सांविधिक और कॉनकरंट संपरीक्षण हेतु संपरीक्षकों का पैनल ।

केंद्रीय सरकार द्वारा बहुराज्‍य सहकारी समितियों के लेखांकन और संपरीक्षा के निर्धारण हेतु एक उपबंध भी शामिल किया गया है । इसके अलावा, यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्‍येक बहुराज्‍य सहकारी समिति द्वारा अधिनियम की धारा 120क के अधीन लेखा वर्ष की समाप्ति के छह माह के भीतर ऑनलाइन सीआरसीएस पोर्टल के माध्‍यम से केंद्रीय पंजीयक को अपनी वार्षिक विवरणी दाखिल की जाएगी जिसमें अधिनियम की धारा 120 के अधीन विनिर्दिष्‍ट निम्‍नलिखित सूचनाएं होंगी:

  1. सर्वसम्‍मति से न लिए गए बोर्ड के निर्णयों का ब्‍योरा सहित कार्यकलापों की वार्षिक रिपोर्ट;
  2. लेखा की संपरीक्षित विवरणी;
  3. साधारण निकाय द्वारा यथा अनुमोदित अधिशेष निपटान की योजना;
  4. बहुराज्‍य सहकारी समिति की उपविधियों के संशोधनों की सूची;
  5. साधारण निकाय की बैठक के आयोजन की तारीख तथा निर्वाचन, जहां नहीं हुए हैं, के संबंध में घोषणा;
  6. ऐसे कर्मचारियों का प्रकटन जो बोर्ड के सदस्‍यों के परिजन हैं;
  7. निदेशक मंडल द्वारा किसी हितबद्ध पक्ष लेनदेनों की घोषणा; और
  8. इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बने नियमों के उपबंधों के अनुसरण में केंद्रीय पंजीयक द्वारा मांगी गई कोई अन्‍य सूचना ।

ऐसे रिटर्न जमा न करना अधिनियम की धारा 43 के उपबंधों के अधीन अयोग्यता का आधार बन सकता है।

(ग)       सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के सहयोग से वृहत राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) को विकसित किया गया है । एनसीडी पोर्टल को 08 मार्च, 2024 को लॉन्‍च किया गया था। यह डेटाबेस देश भर की 8.4 लाख से भी अधिक सहकारी समितियों की सूचना का सिंगल पॉइंट एक्‍सेस प्रदान करता है । एनसीडी पोर्टल के अनुसार दिनांक 20.01.2026 तक देश भर की कुल 8.48 लाख सहकारी समितियों में से 6.58 लाख समितियां कार्यशील हैं, 1.41 अकार्यशील हैं और 49,179 सहकारी समितियां परिसमापनाधीन हैं ।

सहकारिता मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स), डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को बहुद्देशीय सहकारी समितियों में रूपांतरित करने के लिए सक्रिय उपाय किए हैं । इस पहल का लक्ष्‍य सहकारी समितियों को आर्थिक कार्यकलापों की व्‍यापक श्रृंखला में शामिल होने में सक्षम बनाकर उनका व्‍यवसाय विविधीकरण करना, वित्तीय संधारणीयता सशक्‍त करना और बंद होने से बचाना है । एनसीडी का प्रयोग सहकारी समितियों की आच्‍छादित और अनाच्‍छादित ग्राम पंचायतों, दोनों में भौगोलिक प्रसार की कमियों की पहचान करने और 2 लाख नए बहुद्देशीय पैक्‍स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्‍थापना के लिए किया जाता है ।  जहां कहीं संभव हो, निष्क्रिय समितियों को परिसमाप्‍त कर नए एम-पैक्‍स की स्‍थापना की जानी है ।

इसके अतिरिक्‍त, सहकारिता मंत्रालय ने रुग्‍ण बहुराज्‍य सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए और अवसंरचना आवश्‍यकता को पूरा करने में सहायता प्रदान करने के लिए बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधियिम, 2023 की धारा 63क के अधीन सहकारी पुनर्वास पुनर्गठन और विकास निधि की स्‍थापना की है ।

(घ)       कार्यशील, अकार्यशील और परिसमापनाधीन समितियों का राज्य-वार ब्योरा संलग्नक-I पर प्रस्तुत है।     

 

संलग्‍नक-I

कार्यशील, अकार्यशील और परिसमापनाधीन समितियों का राज्‍य-वार ब्‍योरा

क्रम सं.

राज्‍य/संघ राज्‍यक्षेत्र का नाम

कार्यशील समितियां

अकार्यशील समितियां

            परिसमापनाधीन समितियां

1

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

1,208

884

147

2

आंध्र प्रदेश

12,457

5,457

269

3

अरुणाचल प्रदेश

960

477

24

4

असम

7,637

3,569

1,221

5

बिहार

22,344

4,881

162

6

चंडीगढ़

196

221

59

7

छत्तीसगढ़

10,245

1,027

573

8

दिल्‍ली

1,939

3,989

16

9

गोवा

3,142

2,341

110

10

गुजरात

79,018

6,217

1,284

11

हरियाणा

15,260

2,987

16,426

12

हिमाचल प्रदेश

4,984

541

266

13

जम्‍मू और कश्‍मीर

8,992

1,623

5

14

झारखंड

8,007

3,897

187

15

कर्नाटक

40,345

3,477

3,147

16

केरल

15,130

3,752

770

17

लद्दाख

165

110

-

18

लक्षद्वीप

31

12

-

19

मध्‍य प्रदेश

26,607

18,512

8,846

20

महाराष्‍ट्र

2,18,633

3,289

4,064

21

मणिपुर

5,335

6,007

285

22

मेघालय

2,958

470

24

23

मिजोरम

1,272

196

92

24

नागालैंड

2,194

5,737

24

25

ओडिशा

7,754

500

108

26

पुडुचेरी

401

62

1

27

पंजाब

11,888

2,670

5,104

28

राजस्‍थान

25,545

13,362

3,062

29

सिक्किम

1,601

1,916

251

30

तमिलनाडु

21,232

1,201

777

31

तेलंगाना

47,531

12,905

422

32

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

407

157

33

33

त्रिपुरा

2,184

984

102

34

उत्तर प्रदेश

22,727

17,048

934

35

उत्तराखंड

4,410

1,826

157

36

पश्चिम बंगाल

22,982

8,933

227

 

कुल

6,57,721

1,41,237

49,179

स्रोत: एनसीडी पोर्टल पर दिनांक 20.01.2026 के अनुसार

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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