रेल मंत्रालय
केंद्रीय बजट 2026-27 में यात्री-केंद्रित रेलवे के आधुनिकीकरण, बढ़ी हुई सुरक्षा और सर्वांगीण क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन दिया गया है
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से यात्रा का समय कम होगा; दिल्ली-वाराणसी की यात्रा 3 घंटे 50 मिनट में, वाराणसी-सिलीगुड़ी की यात्रा 2 घंटे 55 मिनट में, चेन्नई-बेंगलुरु की यात्रा 1 घंटे 13 मिनट में और मुंबई-पुणे की यात्रा 48 मिनट में पूरी होगी
हिमालयी रेल विस्तार से तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और हर मौसम में बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी; ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन और उडी लाइन के विस्तार से दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार होगा
40 किलोमीटर लंबे भूमिगत रेल कॉरिडोर की योजना से पूर्वोत्तर और शेष भारत के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी; चार लाइनों के विस्तार से यात्रियों और माल ढुलाई की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 7:31PM by PIB Delhi
केंद्रीय बजट 2026-27 के अंतर्गत देश भर में रेल विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिला है, जिसमें राज्यों को कनेक्टिविटी को मजबूत करने, यात्री सुरक्षा बढ़ाने, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करने और माल ढुलाई नेटवर्क का विस्तार करने के उद्देश्य से रिकॉर्ड आवंटन किया गया है। यह निरंतर निवेश सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो रेलवे को देश भर में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित करता है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में, रेल मंत्रालय ने रेल निवेश को क्षेत्रीय एकीकरण, यात्री सुविधा और राज्यों में आर्थिक अवसरों के चालक के रूप में मजबूती से स्थापित किया है, जो हाई स्पीड कनेक्टिविटी, मल्टी-मॉडल गतिशीलता, विद्युतीकरण और सुरक्षित लॉजिस्टिक्स जैसी प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के माध्यम से बडा परिवर्तन देखने को मिलेगा। इनका उद्देश्य प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों के बीच यात्रा के समय को काफी कम करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और मार्ग में पड़ने वाले द्वितीय श्रेणी के शहरों को जोड़ना है। प्रस्तावित वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण धार्मिक, शैक्षणिक और चिकित्सा केंद्रों को जोड़ेगा। दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर से लगभग 3 घंटे 50 मिनट में यात्रा संभव हो सकेगी। इसके अलावा, वाराणसी से पटना होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से वाराणसी और सिलीगुड़ी के बीच लगभग 2 घंटे 55 मिनट में यात्रा संभव हो सकेगी। इस कनेक्टिविटी से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच एक नया आर्थिक कॉरिडोर बनने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा।
पश्चिम बंगाल को भी पूर्वी भारत में सिलीगुड़ी से वाराणसी को जोड़ने वाली पहली हाई-स्पीड रेल सेवा से लाभ मिलने की संभावना है, जिससे अंतर-क्षेत्रीय आवागमन में सुधार होगा और व्यापार एवं सेवा के अवसर बढ़ेंगे। पूर्वोत्तर और आसपास के क्षेत्रों में रिकॉर्ड आवंटन से नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्निर्माण और सुरक्षा में सुधार हुआ है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और देश के बाकी हिस्सों से संपर्क मजबूत हुए हैं। इन कार्यों से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और औपचारिक बाजारों तक पहुंच बढ़ रही है, साथ ही स्थानीय उद्यमों को भी समर्थन मिल रहा है।
एक प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकता पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला 40 किलोमीटर लंबा भूमिगत रेल गलियारा है। भूमिगत रेल पटरियां बिछाने और मौजूदा पटरियों को चार-लाइन की बनाने की योजना चल रही है, जिससे अतिरिक्त क्षमता का सृजन होगा और यात्रियों तथा माल ढुलाई दोनों के लिए इस महत्वपूर्ण पारगमन क्षेत्र में निर्बाध और सुगम रेल आवागमन सुनिश्चित होगा।
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है और अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत स्टेशनों का उन्नयन कर रहे हैं, जिससे रेल सुरक्षा, स्थिरता और यात्री सुविधाओं में सुधार हो रहा है। खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों में, झारखंड में परियोजनाएं और छत्तीसगढ़ में रौघाट-जगदलपुर लाइन माल ढुलाई संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि को मजबूत कर रही हैं।
दक्षिण भारत में, राज्यवार रेलवे आवंटन स्पष्ट रूप से उच्च-प्रभाव वाली यात्री कनेक्टिविटी की ओर लक्षित हैं, जो हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और आसपास के शहरी केंद्रों को जोड़ने वाले उभरते हाई-स्पीड रेल "डायमंड" नेटवर्क पर आधारित है। यह नेटवर्क दक्षिण भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगा, जिससे आईटी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में निर्बाध आवागमन संभव होगा। भारत के प्रमुख प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में बेंगलुरु को सबसे अधिक लाभ होगा, क्योंकि यह व्यावसायिक यात्रा, प्रतिभा आवागमन और अंतर-राज्यीय आवागमन के लिए कहीं अधिक सुलभ हो जाएगा।
हाई-स्पीड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद, चेन्नई-बेंगलुरु की यात्रा में लगभग 1 घंटा 13 मिनट, बेंगलुरु-हैदराबाद की यात्रा में लगभग 2 घंटे और चेन्नई-हैदराबाद की यात्रा में लगभग 2 घंटे 55 मिनट का समय लगेगा। उम्मीद है कि यह नेटवर्क कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विकास में एक शक्तिशाली कारक साबित होगा और क्षेत्रीय विकास को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा देगा।
महाराष्ट्र में, आवंटित धनराशि का बड़ा हिस्सा उच्च प्रभाव वाली, क्षमता-बढ़ाने वाली परियोजनाओं पर केंद्रित है, विशेष रूप से मुंबई-पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों का विस्तार, प्रमुख स्टेशनों का आधुनिकीकरण और पुनर्विकास और राज्य की तेजी से बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की मांग को पूरा करने के लिए उपनगरीय और अंतर-शहरी रेल सेवाओं को मजबूत करना।
पश्चिमी और मध्य भारत में, आगामी मुंबई-पुणे हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा का समय घटकर लगभग 48 मिनट हो जाएगा, जिससे दो प्रमुख शहरी केंद्र प्रभावी रूप से जुड़ जाएंगे। पुणे से हैदराबाद तक लगभग 1 घंटे 55 मिनट में कनेक्टिविटी और आगे दक्षिणी केंद्रों तक कनेक्टिविटी से क्षेत्रों में एक निरंतर हाई-स्पीड नेटवर्क बनेगा, जिससे यात्रियों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं दोनों को लाभ होगा।
हिमालयी और उत्तरी क्षेत्रों में, बजट में आर्थिक पहुंच, पर्यटन और हर मौसम में सुगम आवागमन को बढ़ावा देने का प्रावधान है। उत्तराखंड की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन, जिसमें जटिल सुरंगें होंगी, दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार करेगी, यात्रा का समय कम करेगी और विद्युतीकरण तथा सुरक्षा उन्नयन में व्यापक निवेश के साथ-साथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के आवागमन को सुगम बनाएगी। हिमाचल प्रदेश में नेटवर्क विस्तार, आधुनिकीकरण और विद्युतीकरण के लिए विशेष सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी। जम्मू-कश्मीर में, उडी की ओर विस्तार सहित मजबूत रेल संपर्क, सर्दियों में होने वाली बाधाओं के बावजूद साल भर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्रियों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा।
झारखंड, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र से होकर गुजरने वाले डंकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक पूर्व-पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारे के माध्यम से माल ढुलाई क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। यह गलियारा माल की तेज और अधिक विश्वसनीय आवाजाही को सक्षम बनाएगा, यात्री लाइनों पर भीड़भाड़ कम करेगा, लॉजिस्टिक्स लागत को घटाएगा और इन प्रमुख आर्थिक राज्यों में औद्योगिक और व्यापारिक विकास को बढ़ावा देगा।
यात्रियों के लिए, इन पहलों का अर्थ है कम यात्रा समय, सुरक्षित और अधिक आरामदायक रेलगाडियां, आधुनिक स्टेशन, भीड़भाड़ में कमी और बेहतर अंतिम-मील कनेक्टिविटी। साथ ही, समर्पित माल ढुलाई गलियारों, आधुनिक इंजनों, उन्नत पटरियों और उन्नत सिग्नलिंग के माध्यम से भारतीय रेलवे के 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई के दीर्घकालिक लक्ष्य को पूरा किया जाएगा, जिससे यात्री सेवाओं को बाधित किए बिना माल की आवाजाही तेज हो सकेगी। राज्यों में अधिक पूंजी निवेश से रोजगार सृजित होंगे, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय से विकसित भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। नीति की घोषणा के बाद, इस परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने के लिए विस्तृत योजना और कार्यान्वयन शुरू किया जाएगा।
राज्यवार रेल बजट आवंटन विवरण
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। राज्य और तेलंगाना के लिए वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 886 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 10,134 करोड़ रुपये हो गया है, जो ग्यारह गुना वृद्धि दर्शाता है। इस महत्वपूर्ण निवेश से 92,649 करोड़ रुपये की चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र: असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेलवे का उल्लेखनीय विकास हुआ है। वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 2,122 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 11,486 करोड़ रुपये हो गया है, जो पांच गुना से अधिक वृद्धि दर्शाता है। इस निधि से 72,468 करोड़ रुपये की चल रही परियोजनाओं को सुगम बनाया गया है।
बिहार: बिहार में रेलवे अवसंरचना में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 1,132 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 10,379 करोड़ रुपये हो गया है, जो नौ गुना वृद्धि है। इस अभूतपूर्व निवेश से 1,09,158 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 311 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7,470 करोड़ रुपये हो गया है, जो 24 गुना वृद्धि है। इस महत्वपूर्ण निवेश से 51,080 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
दिल्ली: दिल्ली में रेलवे अवसंरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 96 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 2,711 करोड़ रुपये हो गया है, जो 28 गुना वृद्धि है। इस निवेश से 8,976 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चल रही परियोजनाओं को सुगम बनाने में सहायता मिली है।
गोआ: गोआ के रेलवे अवसंरचना को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है, 2026-27 में 515 करोड़ रुपये के आवंटन से 4,344 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
गुजरात: गुजरात के रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है, वार्षिक औसत बजट 2009-14 के दौरान 589 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 17,366 करोड़ रुपये हो गया है, जो 29 गुना वृद्धि है। इस ऐतिहासिक निवेश से 1,28,748 करोड़ रुपये के चल रहे कार्यों को संभव बनाया गया है।
हरियाणा: हरियाणा में रेलवे अवसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, वार्षिक औसत बजट 2009-14 के 315 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 3,566 करोड़ रुपये हो गया है, जो 11 गुना वृद्धि है। इस ऐतिहासिक निवेश से 12,091 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में रेलवे अवसंरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिला है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 108 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 2,911 करोड़ रुपये हो गया है, जो 27 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस निवेश से 17,711 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में रेलवे अवसंरचना में निरंतर विकास हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 1,044 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 1,086 करोड़ रुपये हो गया है। इस निवेश से 522 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
झारखंड: झारखंड में रेलवे अवसंरचना में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 457 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7,536 करोड़ रुपये हो गया है, जो 16 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस ऐतिहासिक निवेश से 63,470 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
कर्नाटक: कर्नाटक में रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 835 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7,748 करोड़ रुपये हो गया है, जो नौ गुना वृद्धि है। इस निवेश से 52,950 करोड़ रुपये की लागत वाली चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
केरल: केरल में रेलवे अवसंरचना में निवेश और विकास में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है, जहां राज्य के वार्षिक औसत रेलवे बजट आवंटन में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है, जो 2009-14 में 372 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 3,795 करोड़ रुपये हो गया है। इस ऐतिहासिक अनुदान वृद्धि से 18,041 करोड़ रुपये की लागत वाले चल रहे कार्यों को समर्थन मिला है।
मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में रेलवे निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 632 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 15,188 करोड़ रुपये हो गया है, जो 24 गुना वृद्धि है। इस ऐतिहासिक आवंटन से कुल 1,18,379 करोड़ रुपये की चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में रेलवे अवसंरचना में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 1,171 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 23,926 करोड़ रुपये हो गया है, जो 20 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस अभूतपूर्व निवेश से 1,70,058 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
ओडिशा: ओडिशा में रेलवे अवसंरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 838 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 10,928 करोड़ रुपये हो गया है, जो 13 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस ऐतिहासिक निवेश से 90,659 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
पंजाब: पंजाब में रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 225 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 5,673 करोड़ रुपये हो गया है, जो 25 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस ऐतिहासिक निवेश से कुल 26,382 करोड़ रुपये की लागत वाली चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
राजस्थान: राजस्थान में रेलवे अवसंरचना में एक बड़ा परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 682 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 10,228 करोड़ रुपये हो गया है, जो 15 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस ऐतिहासिक निवेश से 56,863 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
तमिलनाडु: तमिलनाडु में रेलवे अवसंरचना में एक बड़ा परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 879 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7,611 करोड़ रुपये हो गया है, जो नौ गुना वृद्धि दर्शाता है। इस महत्वपूर्ण निवेश से 35,701 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
तेलंगाना: तेलंगाना में रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 886 करोड़ रुपये (आंध्र प्रदेश + तेलंगाना) से बढ़कर 2026-27 में 5,454 करोड़ रुपये हो गया है, जो छह गुना वृद्धि दर्शाता है। इस बड़े निवेश से कुल 47,984 करोड़ रुपये की चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में रेलवे अवसंरचना में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 1,109 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 20,012 करोड़ रुपये हो गया है, जो 18 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस विशाल निवेश से 92,056 करोड़ रुपये की लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
उत्तराखंड: उत्तराखंड में रेलवे अवसंरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 187 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 4,769 करोड़ रुपये हो गया है, जो 26 गुना वृद्धि दर्शाता है। इस निवेश से 39,491 करोड़ रुपये की लागत वाली चालू परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में रेलवे अवसंरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जहां वार्षिक औसत बजट 2009-14 में 4,380 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 14,205 करोड़ रुपये हो गया है, जो तीन गुना वृद्धि दर्शाता है। इस ऐतिहासिक निवेश से कुल 92,974 करोड़ रुपये की चल रही परियोजनाओं को समर्थन मिला है।
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(रिलीज़ आईडी: 2222872)
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