वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय वर्षान्त 2025 आर्थिक कार्य विभाग
प्रविष्टि तिथि:
16 JAN 2026 7:22PM by PIB Delhi
2025 में, वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) ने भारत के आर्थिक प्रबंधन, राजकोषीय रणनीति और वित्तीय क्षेत्र के समन्वय का मार्गदर्शन किया, साथ ही विकास, स्थिरता, निवेश और वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहन देने के लिए सुधारों को लागू किया। व्यापक अर्थशास्त्र, पूंजी बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल वित्त और निवेशक संरक्षण एवं सशक्तिकरण संबंधी नीतियों के माध्यम से, डीईए ने आर्थिक आधार को सुदृढ़ किया और भारत को संपोषित भविष्य के विकास के लिए तैयार किया।
- सोलहवां वित्त आयोग
सोलहवें वित्त आयोग ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट 17 नवंबर 2025 को भारत की माननीय राष्ट्रपति को सौंपी। अपने कार्यकाल के दौरान, सोलहवें वित्त आयोग ने केंद्र और राज्यों के वित्त का विस्तृत विश्लेषण किया और केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, विभिन्न स्तरों पर स्थानीय सरकारों, पूर्व वित्त आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, बहुपक्षीय संस्थानों, आयोग की सलाहकार परिषद और अन्य संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श के बाद एक रिपोर्ट तैयार की है।
केंद्रीय वित्त मंत्री की ओर से अनुच्छेद 281 के अंतर्गत संसद में रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाएगी।
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ावा देने की पहल
इंफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्रों की सामंजस्यपूर्ण मास्टर सूची पर विशेषज्ञ समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर वर्गीकरण के लिए नए सिद्धांतों की सिफारिश की गई और निजी पूंजी आकर्षित करने तथा परियोजनाओं की बैंक योग्यता में सुधार के लिए एक व्यापक वित्तपोषण ढांचा प्रस्तावित किया गया।
वर्ष के दौरान, सामंजस्यपूर्ण मास्टर सूची की परिवहन और रसद श्रेणी के अंतर्गत एक नया उप-क्षेत्र, "बड़े जहाज," जोड़ा गया।
वित्त वर्ष 2024-25 में संप्रभु हरित बॉन्डों के माध्यम से ₹21,697.40 करोड़ की धनराशि जुटाई गई, जिसका आवंटन विभिन्न मंत्रालयों में पात्र हरित परियोजनाओं के लिए किया गया। डीईए की ओर से पूंजीगत व्यय की निगरानी से इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालयों को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ₹10.46 लाख करोड़ का व्यय प्राप्त करने में मदद मिली, जो संशोधित अनुमानों से अधिक था, जबकि आईईबीआर का व्यय भी लक्ष्यों से अधिक रहा।
- नियामक को सुदृढ़ करना
2025-26 के बजट घोषणा के कार्यान्वयन के लिए, वित्तीय क्षेत्र विकास परिषद (एफएसडीसी) के तत्वावधान में डीईए ने वित्तीय क्षेत्र विकास के लिए वर्तमान वित्तीय विनियमों और सहायक निर्देशों के प्रभाव का मूल्यांकन करने और वित्तीय क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक तंत्र स्थापित किया।
बाजार को मजबूत करने और नियामक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए कई तरीके लागू किए गए। लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए सार्वजनिक निर्गम ढांचे को पात्रता मानदंडों, बिक्री प्रस्ताव और सामान्य कॉरपोरेट प्रयोजन निधियों पर सीमा, और लोन रीपेमेंट के लिए आईपीओ आय के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के साथ सख्त किया गया। इक्विटी डेरिवेटिव्स में व्यापार और जोखिम निगरानी में सुधार किया गया। समाप्ति-दिवस अस्थिरता को कम करने के लिए उपाय प्रस्तुत किए गए।
स्टॉक ब्रोकर की ओर से प्रतिभूतियों के दुरुपयोग के जोखिम को कम करने के लिए, भुगतान के लिए प्रतिभूतियां अब क्लियरिंग कॉरपोरेशन की ओर से सीधे ग्राहक डीमैट खातों में जमा की जाती हैं। एल्गोरिथम ट्रेडिंग में खुदरा निवेशकों की सुरक्षित भागीदारी के लिए एक ढांचा पेश किया गया है।
- बाजार विकास को प्रोत्साहन देना
भारत के प्रतिभूति बाजारों को गहन और विविध बनाने के लिए, दक्षता और सहभागिता में सुधार हेतु लक्षित उपाय किए गए। निष्क्रिय म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए सरलीकृत नियामक व्यवस्था प्रदान करने हेतु एमएफ लाइट फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया, जबकि सार्वजनिक डेट प्रतिभूतियों की लिस्टिंग की समयसीमा को टी+6 से घटाकर टी+3 कर दिया गया। एफपीआई को प्रत्यावर्तन या पुनर्निवेश के लिए टी+1 आधार पर बिक्री आय प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई।
जून 2025 से अनिवार्य एकल वीडब्ल्यूएपी के साथ सामान्य कॉन्ट्रैक्ट नोट (सीसीएन) की शुरुआत के माध्यम से बाजार प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया, जिससे संस्थागत निवेशकों के लिए व्यापार-पश्चात प्रक्रियाएं आसान हो गईं।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना
अनुपालन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, नियमों में सामंजस्य स्थापित करने और अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए कई उपाय किए गए। सूचीबद्ध संस्थाओं के पास अब एक एकल फाइलिंग प्रणाली और एकीकृत फाइलिंग रिपोर्ट है, जिससे आवधिक फाइलिंग कम हो जाती है। अनिवासी भारतीयों के लिए निवेश में सुगमता सुनिश्चित करने के लिए, यह निर्दिष्ट किया गया कि पैन का उपयोग एक्सचेंज/ क्लियरिंग निगमों की ओर से अनिवासी भारतीयों की पोजीशन लिमिट की निगरानी के लिए एक विशिष्ट पहचानकर्ता के रूप में भी किया जा सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के साथ सीधे जुड़ने और उन्हें भारतीय प्रतिभूति बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए समर्पित विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक आउटरीच सेल शुरू किया गया। साथ ही, कुछ श्रेणियों के अनिवासी भारतीयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया। पंजीकृत स्टॉक ब्रोकरों को अब गुजरात अंतर्राष्ट्रीय वित्त प्रौद्योगिकी शहर - अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (जीआईएफटी-आईएफएससी) में प्रतिभूति बाजार संबंधी गतिविधियों को करने के लिए नियामक से स्पष्ट अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। मध्यस्थों को विकलांग व्यक्तियों सहित ग्राहकों के लिए डिजिटल पहुंच को सक्षम करने वाली अपनी सेवाएं विस्तारित करने के लिए अनिवार्य किया गया है।
- निवेशकों का सशक्तिकरण और संरक्षण
वर्ष के दौरान बाजार सुधारों में निवेशकों का सशक्तिकरण और संरक्षण केंद्रीय महत्व रखता रहा। एक एकीकृत निवेशक मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया, जो विभिन्न मध्यस्थों के बीच प्रतिभूतियों की होल्डिंग्स का समेकित दृश्य प्रदान करता है। निवेश प्रदर्शन पर भ्रामक दावों से निपटने के लिए, पूर्व जोखिम और प्रतिफल सत्यापन एजेंसियों (पीएआरआरवीए) को मान्यता देने के लिए एक ढांचा स्थापित किया गया, जबकि विनियमित संस्थाओं को अनियमित वित्तीय प्रभावकर्ताओं के साथ जुड़ने से प्रतिबंधित किया गया।
वित्तीय समावेशन पहलों में "छोटी एसआईपी" यानी ₹250 की एसआईपी की शुरुआत शामिल थी, जिसका उद्देश्य पहली बार निवेश करने वालों को प्रोत्साहित करना था। डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल डिजीलॉकर के माध्यम से म्यूचुअल फंड और डीमैट स्टेटमेंट प्राप्त करने और संग्रहीत करने के लिए किया गया। लावारिस संपत्तियों के संचय को रोकने के लिए, डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नामांकन मानदंडों में संशोधन किया गया।
पहचान की धोखाधड़ी की इस बढ़ती समस्या से निपटने और निवेशकों के विश्वास और निवेश में आसानी बढ़ाने के लिए, 1 अक्टूबर, 2025 से निवेशकों से धनराशि एकत्र करने वाले सभी एसईबीआई पंजीकृत मध्यस्थों के लिए एक नई यूपीआई पता संरचना अनिवार्य कर दी गई है। निवेशकों को सशक्त बनाने के लिए, 1 अक्टूबर, 2025 से एक नया टूल "एसईबीआई चेक" शुरू किया गया है, जो निवेशकों को यूपीआई आईडी की प्रामाणिकता सत्यापित करने और पंजीकृत मध्यस्थ के बैंक खाता संख्या और आईएफएस जैसे बैंक विवरणों की पुष्टि करने की अनुमति देगा।
सेबी ने पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) के सहयोग से ब्लॉक स्तर के पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर वित्तीय साक्षरता और निवेशक शिक्षा को प्रोत्साहन देना है। इससे प्रतिनिधियों को पूरे भारत में ग्रामीण समुदायों को शिक्षित करने के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त होगी।
निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने और प्रतिभूति बाजार में वित्तीय धोखाधड़ी और घोटालों से निपटने के लिए संयुक्त मीडिया अभियान "एसईबीआई बनाम घोटाला" शुरू किया गया है।
- व्यापार सुगमता और पूंजी बाजार को मजबूत करने के संबंध में एसईबीआई के प्रमुख प्रस्ताव
आईपीओ में भागीदारी: एसईबीआई (आईसीडीआर) विनियम, 2018 में संशोधन के अंतर्गत अब घरेलू म्यूचुअल फंड के साथ-साथ जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को भी आरक्षित एंकर हिस्से में शामिल किया गया है, जिससे संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है।
संबंधित पक्ष लेन-देन: एसईबीआई (एलओडीआर) विनियम, 2015 में संशोधन के अंतर्गत एकसमान "महत्व सीमा" को "पैमाने पर आधारित सीमा" से प्रतिस्थापित किया गया है, जिससे कंपनी के आकार के आधार पर आनुपातिक आरपीटी विनियमन सुनिश्चित होता है।
स्वागत-एफआई फ्रेमवर्क: विश्वसनीय और सत्यापित एफपीआई और एफवीसीआई के लिए एकल-खिड़की पहुंच से आसान ऑनबोर्डिंग होगी, दोहराव कम होगा, लागत कम होगी और अनुपालन का बोझ कम होगा।
आईएनवीआईटी/ आरईआईटी में रणनीतिक निवेशक: क्यूआईबी, पारिवारिक ट्रस्ट, एफपीआई और एनबीएफसी को शामिल करने के लिए दायरा बढ़ाया गया; म्यूचुअल फंड की भागीदारी और निवेश सीमा को बढ़ावा देने के लिए आरईआईटी को इक्विटी के रूप में पुनः वर्गीकृत किया गया।
मान्यता प्राप्त निवेशक: "केवल एआई योजनाओं" की शुरुआत और बड़े मूल्य वाले फंडों के लिए अतिरिक्त कार्यान्वयन संबंधी लचीलापन।
आईएफएससी खुदरा योजनाएं: निवासी भारतीय गैर-व्यक्तिगत प्रायोजकों/ प्रबंधकों को एफपीआई के रूप में 10% तक योगदान की अनुमति दी गई है, जिससे नियमों में सामंजस्य स्थापित होता है और अनुपालन आसान होता है।
इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को मंजूरी: सूचीबद्ध कंपनियों को अब लाभांश, ब्याज, मोचन या पुनर्भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप से करने होंगे, जिससे डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन मिलेगा।
आईएफएफसी में विदेशी पूंजी निवेश (एफपीआई): एसईबीआई (एफपीआई) विनियम, 2019 में भारतीय निवासियों की भागीदारी को आसान बनाने के लिए संशोधन किया गया है, जिससे आईएफएस के माध्यम से अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित होगी।
विशेष रुपी वोस्त्रो खाते (एसआरवीए): आरबीआई ने भारत सरकार के परामर्श से एसआरवीए में सरप्लस रुपये की राशि को कॉरपोरेट ऋण में निवेश करने की अनुमति दी है, जिससे वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी और रुपये में द्विपक्षीय व्यापार निपटान को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्राहक को जानें (केवाईसी) प्रक्रिया का सरलीकरण
भारत में ग्राहक को जानें (केवाईसी) प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की दिशा में किए गए प्रयास कई बजट घोषणाओं में सामने आए हैं और हाल ही में वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने और इसके आवधिक अपडेशन (पुनः केवाईसी) को सुव्यवस्थित करने की घोषणा की है। इस संबंध में वित्तीय क्षेत्र के सभी विनियमित संस्थाओं (आरई) के लिए एक सामान्य केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआरआर) टेंप्लेट स्थापित किया गया है, प्रत्येक वित्तीय क्षेत्र नियामक ने केवाईसी मास्टर सर्कुलर या दिशानिर्देश जारी किए हैं और एसईबीआई के अंतर्गत केवाईसी पंजीकरण प्राधिकरणों (केआरए) को भी सीकेवाईसीआरआर के साथ अंतर-संचालनीयता के लिए अधिसूचित किया गया है। जुलाई 2024 के पीएमएल रिकॉर्ड रखरखाव नियमों में संशोधन के बाद, आरबीआई ने जून 2025 में विनियमित संस्थाओं (आरई) को केवाईसी और पुनः केवाईसी के लिए ग्राहक की पहचान स्थापित करने हेतु जहां भी उपलब्ध हो, सीकेवाईसीआरआर का इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया है।
- खाता एग्रीगेटर का विस्तार
खाता एग्रीगेटर (एए) ढांचा भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) का एक मूलभूत स्तंभ है, जो विनियमित संस्थाओं के बीच वित्तीय डेटा के सुरक्षित, सहमति-आधारित और अंतरसंचालनीय साझाकरण को सक्षम बनाता है। खाता एग्रीगेटर (एए) ढांचे में वित्तीय सूचना प्रदाताओं और उपयोगकर्ताओं (एफआईपी और एफआईयू) की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, और डिजिटल ऋण और व्यक्तिगत वित्त उपयोग के मामलों के लिए वित्तीय डेटा प्राप्त करने हेतु लाखों उपयोगकर्ता सहमति प्राप्त हुई हैं। इसलिए, नियामक निरीक्षण के पूरक के रूप में कार्य करने वाला संस्थागत स्व-नियमन, जिम्मेदार आचरण, परिचालन स्थिरता और उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस संबंध में, एए पारिस्थितिकी तंत्र के लिए स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) को ढांचे पर शासन, मानकीकरण और विश्वास बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी गई है।
- एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) का अंतर्राष्ट्रीयकरण
भारत सीमा पार पीयर-टू-पीयर (पी2पी) और पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) भुगतानों के लिए अन्य देशों के साथ अपनी त्वरित भुगतान प्रणाली (एफपीएस) यानी एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (यूपीआई) की अंतरसंचालनीयता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। कैलेंडर वर्ष 2025 में इस संबंध में तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं, जिनमें सिंगापुर की दो नई संस्थाओं के साथ ई-कॉमर्स और क्यूआर भुगतानों के लिए यूपीआई की स्वीकृति और कतर राष्ट्रीय बैंक के साथ व्यापारी स्थानों पर क्यूआर-आधारित यूपीआई की स्वीकृति को सक्षम करना शामिल है। इस रणनीतिक विस्तार के साथ कतर यूपीआई इकोसिस्टम के साथ लाइव रूप से एकीकृत होने वाला आठवां देश बन गया है। भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात में विदेशी व्यापारी स्थानों पर यूपीआई ऐप्स की स्वीकृति पहले से ही लाइव है।
- राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ)
राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) अवसंरचना और प्रमुख राष्ट्रीय क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पूंजी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 2024 में, एनआईआईएफ ने 1 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य कोष के साथ अपना दूसरा निजी बाजार कोष (पीएमएफ II) लॉन्च किया। 2025 तक, कोष ने पहले ही 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धताएं हासिल कर ली हैं, जिनमें से 490 मिलियन अमेरिकी डॉलर भारत सरकार से, 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर न्यू डेवलपमेंट बैंक से और 160 मिलियन अमेरिकी डॉलर 4 निवेशकों (1 मौजूदा निवेशक, 2 घरेलू बीमा कंपनियां और 1 जापानी निवेशक यानी डेवलपमेंट बैंक ऑफ जापान) से प्राप्त हुए हैं। कोष इस वर्ष पूरी तरह से कार्यान्वयन में आ जाएगा, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करना और मजबूत वित्तीय रिटर्न प्राप्त करना है।
एनआईआईएफ मास्टर फंड ने वर्ष के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के सबसे बड़े अवसंरचना लेन-देन में से एक, अयाना पावर से अपना पहला पूर्ण निकास पूरा करना शामिल है। कोष ने पांच में से तीन सड़क संपत्तियों की बिक्री भी पूरी कर ली, जिससे भारत सरकार और अन्य निवेशकों दोनों के लिए सकारात्मक वित्तीय प्रतिफल सुनिश्चित हुआ।
- स्वामी इन्वेस्टमेंट फंड
स्वामी इन्वेस्टमेंट फंड I संकटग्रस्त आवास परियोजनाओं के समाधान और रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों का विश्वास बहाल करने में एक प्रमुख पहल के तौर पर उभरा है। बीते 5 वर्ष में स्वामी फंड ने भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य में उत्प्रेरक भूमिका निभाई है और यह इस बात का प्रमाण है कि उद्देश्य-संचालित पूंजी क्या हासिल कर सकती है। 15 सितंबर, 2025 तक, स्वामी फंड ने 12 राज्यों के 20 शहरों में फैले 139 निवेशों को वित्तपोषित किया है, जिनकी कुल पोर्टफोलियो प्रतिबद्धता 13,799 करोड़ रुपये है, जिससे 44,654 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना लागत को अनलॉक किया गया है। स्वामी फंड के पोर्टफोलियो में 94,208 से अधिक घरों के कुल लक्ष्य में से 58,596 घरों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। स्वामी फंड ने 50 निवेशों से पूरी तरह से और 41 निवेशों से आंशिक रूप से बाहर निकल चुका है, जो इसकी समाधान रणनीति में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। गौरतलब है कि स्वामी फंड ने अपने निवेशकों से प्राप्त पूंजी का लगभग 50% पहले ही लौटा दिया है, जो इसकी दक्षता और वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है।
स्वामी फंड की इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए, भारत भर में अतिरिक्त 1 लाख संकटग्रस्त आवास इकाइयों को पूरा करने के उद्देश्य से 15,000 करोड़ रुपये तक के लक्ष्य के साथ स्वामी फंड 2 की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई है।
- वित्तीय स्थिरता
आर्थिक कार्य विभाग ने नियामकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समन्वय के माध्यम से वित्तीय स्थिरता की रक्षा करना जारी रखा। यह वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) और इसकी उप-समिति (एफएसडीसी-एससी) के माध्यम से किया जाता है, जो अर्थव्यवस्था के व्यापक विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण की निगरानी करती है और वित्तीय स्थिरता, वित्तीय क्षेत्र के विकास, अंतर-नियामक समन्वय, वित्तीय साक्षरता और वित्तीय समावेशन से संबंधित प्रासंगिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करती है। वित्त वर्ष 2025-26 में, एफएसडीसी ने 10 जून, 2025 को अपनी 29वीं बैठक और एफएसडीसी-एससी ने 4 सितंबर, 2025 को अपनी 32वीं बैठक आयोजित की, जिसमें प्रमुख वैश्विक और घरेलू व्यापक आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र के घटनाक्रमों की समीक्षा की गई।
डीईए ने वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी) और इसकी समितियों की विभिन्न बैठकों में भी भाग लिया। अन्य मुद्दों के साथ, क्रिप्टो परिसंपत्तियों और सीमा पार भुगतान पर भारत की जी20 प्राथमिकताओं से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श किया गया।
भारत ने अपना तीसरा वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन कार्यक्रम (एफएसएपी) पूरा किया, जो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की ओर से हर 5 वर्ष में संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है, और यह 2024-25 के दौरान पूरा हुआ। इसके बाद, आईएमएफ और विश्व बैंक ने क्रमशः अपनी वित्तीय प्रणाली स्थिरता मूल्यांकन (एफएसएसए) रिपोर्ट और वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन (एफएसए) रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें भारतीय अधिकारियों के विचारों को शामिल किया गया था।
- वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा
वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) ढांचे के अंतर्गत, डीईए ने संस्थागत तंत्र स्थापित किए हैं और अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत किया है।
डीईए के अंतर्गत स्थापित वित्तीय क्षेत्र के लिए कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (सीएसआईआरटी-एफआईएन) ने रैंसमवेयर, भुगतान धोखाधड़ी और आपूर्ति श्रृंखला हमलों से निपटने के लिए क्षेत्रव्यापी साइबर सुरक्षा अभ्यास आयोजित किए और समय-समय पर साइबर सुरक्षा परिदृश्य रिपोर्ट जारी कीं।
बैंकिंग, भुगतान, प्रतिभूति और बीमा सहित 100 से अधिक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रणालियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत संरक्षित प्रणालियों के रूप में अधिसूचित किया गया। ये प्रणालियां अब एडवांस सुरक्षा नियंत्रणों, निरंतर निगरानी और समय-समय पर ऑडिट के अंतर्गत संचालित होती हैं, जिससे आरटीजीएस, एनईएफटी, यूपीआई और प्रतिभूति भंडारों जैसे प्लेटफार्मों की परिचालन क्षमता मजबूत होती है।
तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और अत्यधिक परस्पर जुड़े वित्तीय प्रणालियों से उत्पन्न वित्तीय स्थिरता के लिए बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए, वित्तीय क्षेत्र विकास आयोग (एफएसडीसी) ने अगस्त 2025 में डीईए, एमईआईटीवाई और अन्य विभागों/ संस्थानों के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया, जिससे एक व्यापक वित्तीय क्षेत्र साइबर सुरक्षा रणनीति तैयार की जा सके। इस रणनीति का उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र के प्राधिकरणों के बीच एक एकीकृत शासन ढांचा स्थापित करना है, ताकि पूरे क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी)
भारत वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा जिन्होंने बड़े पैमाने पर केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चलाया। खुदरा डिजिटल रुपी पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार पूरे देश में हुआ और नवंबर 2025 तक 82 लाख उपयोगकर्ता और 11 लाख व्यापारी इससे जुड़ गए। सीबीडीसी को यूपीआई के साथ इंटरऑपरेबल बनाया गया, जिससे उपयोगकर्ता देश भर में किसी भी यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन कर सकते हैं।
चुनिंदा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीएल) योजनाओं के लिए प्रोग्रामेबल सीबीडीसी पायलट प्रोजेक्ट लागू किए गए, जबकि इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना लेन-देन करने में सक्षम ऑफलाइन सीबीडीसी पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण अभी जारी है।
थोक सीबीडीसी पायलट प्रोजेक्ट ने सरकारी प्रतिभूतियों और कॉल मनी मार्केट लेन-देन के निपटान को सुगम बनाया, जिसमें बैंक और गैर-बैंक प्राथमिक डीलर भाग ले रहे थे। सीमा पार भुगतान के लिए, आरबीआई अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में लागत, गति और पारदर्शिता की चुनौतियों का समाधान करने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सीबीडीसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। भारत वर्तमान में साझेदार देशों के साथ एडवांस द्विपक्षीय चर्चा में लगा हुआ है और बीआईएस इनोवेशन हब के नेतृत्व में बहुपक्षीय सीबीडीसी परियोजनाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।
- बहुपक्षीय और द्विपक्षीय विकास सहायता
भारत ने वर्ष के दौरान बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना जारी रखा। दिसंबर 2024 में दक्षिण कोरिया में आयोजित आईडीए-21 प्रतिज्ञा सत्र में, भारत ने विश्व बैंक की सॉफ्ट लेंडिंग शाखा को 23.21 बिलियन रुपये देने का वादा किया। जून 2024 और मार्च 2025 के बीच, विकास सहायता एजेंसी (डीईए) ने 27 अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनकी कुल राशि 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। मार्च 2025 तक भारत में आईएफसी का वर्तमान निवेश 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारत ने सोलहवीं सामान्य कोटा समीक्षा के तहत अपने आईएमएफ कोटा को बढ़ाकर 19,671.6 मिलियन एसडीआर करने पर सहमति जताई। अप्रैल 2014 से अगस्त 2025 तक, विश्व बैंक के साथ 35.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 158 लोन पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि 2003-2014 के दौरान 29.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 117 लोन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) के साथ अपना जुड़ाव जारी रखा है, जिसने भारत में ग्रामीण विकास, जनजातीय कल्याण, महिला सशक्तिकरण और सूक्ष्म वित्त पर केंद्रित 36 परियोजनाओं को लगभग 1462.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल मदद प्रदान की है। बीते ग्यारह वर्ष में, नौ राज्यों में लगभग 547 मिलियन अमेरिकी डॉलर की 10 परियोजनाएं कार्यान्वित की गई हैं। वर्तमान में, लगभग 132 मिलियन अमेरिकी डॉलर की दो सरकारी परियोजनाएं आईएफएडी वित्तपोषण के लिए विचाराधीन हैं।
- जी20 में भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग
2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के बाद, देश ने 2024 में ब्राजील की अध्यक्षता में जी20 ट्रोइका के हिस्से के रूप में और 2025 में दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में जी20 सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाना जारी रखा। भारत ने जी20 नई दिल्ली नेताओं की घोषणा और अक्टूबर 2023 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के विज्ञप्ति में व्यक्त प्राथमिकताओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षताओं के साथ मिलकर काम किया।
वित्त ट्रैक एजेंडा में बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) के सुधारों, ऋण संबंधी कमजोरियों को दूर करने, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय संस्थानों में निर्णय लेने में उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने और जलवायु वित्त जुटाने पर जोर दिया गया। भारत की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, बेहतर, बड़े और अधिक प्रभावी एमडीबी के लिए जी20 रोडमैप को 2024 में नेताओं की ओर से मंजूर किया गया था, और 2025 में एक निगरानी और रिपोर्टिंग ढांचा विकसित करने और रोडमैप के कार्यान्वयन पर नज़र रखने के लिए पहली प्रगति रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम जारी रहा।
- बीते 11 वर्षों की तुलनात्मक उपलब्धियां
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क्रम संख्या
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परिवर्तनशील
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इकाई
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स्रोत
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तब
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अब
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टिप्पणी
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मैक्रोइकोनॉमी
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1
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मुद्रास्फीति
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प्रतिशत
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आईएमएफ
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5.8
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2.8
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तब: वित्त वर्ष 14 के लिए
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अब: वित्त वर्ष 25 के लिए
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2
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प्रति व्यक्ति जीडीपी (पीपीपी)
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पीपीपी डॉलर, महंगाई समायोजित
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विश्व बैंक
|
3,889
|
7,563
|
तब – वित्त वर्ष 05-वित्त वर्ष 14 के मध्य प्रति व्यक्ति औसतन जीडीपी
|
|
तब – वित्त वर्ष 15-वित्त वर्ष 24 के मध्य प्रति व्यक्ति औसतन जीडीपी
|
|
3
|
पूंजीगत व्यय
|
जीडीपी का प्रतिशत
|
वित्त मंत्रालय
|
1.7
|
3.1
|
तब- वित्त वर्ष 14 के लिए जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर कैपेक्स
|
|
अब- वित्त वर्ष 26 (बीई) के लिए जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर कैपेक्स
|
|
4
|
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात
|
अमेरिकी डॉलर, बिलियन
|
वाणिज्य मंत्रालय
|
7.6
|
38.6
|
तब- वित्त वर्ष 14 के लिए निर्यात
|
|
अब - वित्त वर्ष 25 के लिए निर्यात
|
|
5
|
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
|
अमेरिकी डॉलर, बिलियन
|
आरबीआई
|
305
|
748.8
|
तब - वित्त वर्ष 05 - वित्त वर्ष 14 के बीच ग्रॉस एफडीआई का जोड़; अब - वित्त वर्ष 15 - वित्त वर्ष 25 के बीच ग्रॉस एफडीआई का जोड़
|
|
6
|
बहुआयामी गरीबी
|
आबादी का प्रतिशत
|
यूएनडीपी, नीति आयोग
|
29.2
|
11.3
|
तब- 2013-14 के अंत तक
|
|
अब - 2023 (अनुमानित) के अंत तक
|
|
7
|
अप्रत्यक्ष कर दर
|
प्रतिशत
|
राजस्व विभाग
|
15
|
11.6
|
तब- जीएसटी से पहले औसतन अप्रत्यक्ष टैक्स दर, अब-वित्त वर्ष 24 के लिए औसतन जीएसटी दर
|
|
8
|
स्टार्टअप्स की संख्या
|
कंपनियों की संख्या
|
डीपीआईआईटी
|
350
|
1,57,706
|
तब- 2014 के समय
|
|
अब- 31 दिसंबर 2024 के समय
|
|
9
|
हार्वर्ड आर्थिक जटिलता सूचकांक
|
रैंकिंग
|
हार्वर्ड विश्वविद्यालय
|
52
|
44
|
तब- 2011 में रैंकिंग
|
|
अब- 2023 में रैंकिंग
|
|
(पिछले दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक परिष्कृत हो गई है। कम संख्याएँ उच्च रैंकिंग दर्शाती हैं।)
|
|
भौतिक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
|
|
10
|
मेट्रो रेल वाले शहर
|
शहरों की संख्या
|
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय
|
5
|
23
|
तब- 2014 के अंत के समय
|
|
अब - 05 जनवरी 2025 को
|
|
11
|
राष्ट्रीय राजमार्गों की निर्माण की गई लंबाई
|
हजार किलोमीटर
|
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
|
25.7
|
54.9
|
तब-वित्त वर्ष 05 और वित्त वर्ष 14 के दौरान बने राजमार्ग;
|
|
अब - वित्त वर्ष 15-वित्त वर्ष 24 (दिसंबर 2024 तक) बने राजमार्ग
|
|
12
|
राजमार्ग निर्माण की गति
|
किलोमीटर/ दिन
|
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
|
12
|
21.3
|
तब - 2013-14 में गति;
|
|
अब - 2024-25 ( दिसंबर 24 तक) में गति
|
|
13
|
विद्युतीकृत रेल नेटवर्क
|
हजार किलोमीटर
|
रेल मंत्रालय
|
21.8
|
67.7
|
तब - 2014 तक विद्युतीकृत ब्रॉड-गेज नेटवर्क;
|
|
अब - फरवरी 2025 तक विद्युतीकृत ब्रॉड-गेज नेटवर्क
|
|
14
|
हवाई अड्डों की संख्या
|
संख्या
|
नागरिक उड्डयन मंत्रालय
|
74
|
157
|
तब - 2014 के अंत तक;
अब - सितंबर 2024 तक
|
|
|
|
15
|
टोल प्लाजा पर औसत प्रतीक्षा का समय
|
समय
|
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
|
12.2 मिनट
|
47 सेकेंड
|
तब - 2014 में;
|
|
अभी - 2023 में
|
|
16
|
कुल इंस्टॉल विद्युत क्षमता
|
गीगा वॉट
|
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण
|
249
|
475.2
|
तब – मार्च 2014 तक
|
|
अब – मार्च 2025 तक
|
|
17
|
इंस्टॉल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
|
गीगा वॉट
|
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण
|
76
|
220.1
|
तब – मार्च 2014 तक; अब – मार्च 2025 तक
|
|
18
|
लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक
|
रैंकिंग
|
विश्व बैंक
|
54
|
38
|
तब - वर्ष 2012 में सूचकांक में भारत की रैंकिंग, अब - वर्ष 2023 में सूचकांक में भारत की रैंकिंग। कम संख्याएँ उच्च रैंकिंग को दर्शाती हैं।
|
|
19
|
मोबाइल ब्रॉडबैंड ग्राहक
|
लोगों की संख्या, करोड़
|
ट्राई
|
6
|
94.3
|
तब- 2013-14 के अंत तक;
|
|
अब - 30 अप्रैल 2025 के अंत तक
|
|
20
|
मासिक डेटा उपयोग
|
जीबी
|
ट्राई
|
0.06
|
21.3
|
तब- मार्च 2014 के अंत तक;
|
|
अब - जून 2024 के अंत तक
|
|
21
|
वायरलेस डेटा शुल्क
|
रुपये प्रति जीबी
|
संचार मंत्रालय
|
269
|
8.31
|
तब - 2014 में प्रति जीबी डेटा की रुपये में लागत;
|
|
अब- जून 2024 में प्रति जीबी डेटा की रुपये में लागत
|
|
सुरक्षित भविष्य और सुगम जीवन
|
|
22
|
मेडिकल कॉलेज
|
कॉलेजों की संख्या
|
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
|
387
|
780
|
तब - 2014 में;
|
|
अब - 1 अप्रैल 2025 से
|
|
23
|
मेडिकल शिक्षा में सीटें
|
सीटों की संख्या
|
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
|
51,348
|
1,18,190
|
तब - 2014 में;
|
|
अब - 1 अप्रैल 2025 से
|
|
24
|
विश्वविद्यालयों की संख्या
|
संख्या
|
शिक्षा मंत्रालय
|
676
|
1334
|
तब- वर्ष 2013-14 तक
|
|
अब: 30 मई 2025 तक
|
|
25
|
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स
|
रैंकिंग
|
डब्ल्यूआईपीओ
|
81
|
39
|
तब – 2015 में भारत की रैंकिंग
|
|
अब – 2024 में भारत की रैंकिंग
((कम संख्याएं उच्च रैंकिंग दर्शाती हैं।)
|
|
|
|
26
|
एलपीजी कनेक्शनों की संख्या
|
करोड़
|
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय व पीपीएसी
|
14.5
|
32.9
|
तब – अप्रैल 2014 तक
|
|
अब – 1 अप्रैल, 2025 तक
|
|
27
|
पीएनजी कनेक्शनों की संख्या
|
लाख
|
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
|
22.3
|
129.8
|
तब – अप्रैल 2014 तक
|
|
अब – 31 मार्च, 2024 तक
|
|
28
|
विद्युतीकरण की स्थिति
|
प्रतिशत
|
विश्व बैंक
|
85.1
|
100
|
तब – वर्ष 2014 तक
|
|
अब – दिसंबर 2024 तक
|
|
29
|
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता
|
घंटे
|
विद्युत मंत्रालय
|
12
|
22.6
|
तब - वर्ष 2014 में उपलब्ध बिजली के घंटों की औसत संख्या;
|
|
अब - वित्त वर्ष 2025 में उपलब्ध बिजली के घंटों की औसत संख्या
|
|
30
|
नल के पानी के कनेक्शनों की संख्या (ग्रामीण)
|
करोड़
|
जलशक्ति मंत्रालय
|
3.2
|
19.4
|
तब – अगस्त 2019 तक
|
|
अब – 30 मई, 2025 तक
|
|
31
|
डीबीटी लाभार्थियों की कुल संख्या
|
करोड़
|
डीबीटी वेबसाइट
|
10.8
|
201.9
|
तब- वित्त वर्ष 2014 के अनुसार
|
|
अब - वित्त वर्ष 2025 के अनुसार
|
|
32
|
विभिन्न योजनाओं के तहत वंचित परिवारों को हस्तांतरित धनराशि (नकद और वस्तु सहित कुल राशि)
|
करोड़ रुपये
|
डीबीटी वेबसाइट
|
7,367
|
6,83,679
|
तब - वित्त वर्ष 2014 में स्थानांतरण
|
***
पीके/केसी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2215528)
आगंतुक पटल : 66
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