कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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 डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डीएलसी अभियान 5.0 के पहले पांच दिनों में लगभग 40 लाख प्रमाणपत्र उत्पन्न होने से चेहरा प्रमाणीकरण अपनाने की संख्या 80% तक बढ़ गई है।


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पहले पांच दिनों में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र निर्माण में 60% की वृद्धि के साथ राष्ट्रव्यापी डीएलसी अभियान 5.0 की शुरुआत की

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले साल 1.92 करोड़ डीएलसी में से 1.17 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से उत्पन्न हुए, जो डिजिटल तकनीक में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

पेंशनभोगियों का अनुभव, विशेषज्ञता और क्षमता विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण। डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्र निर्माण के लिए पीढ़ियों के बीच तालमेल की वकालत की।

शिविरों में जाने में असमर्थ बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए घर तक  पहुंच सेवाओं के साथ लगभग 3,000 स्थानों को कवर करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान।

प्रविष्टि तिथि: 06 NOV 2026 4:47PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधान मंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) अभियान 5.0 लॉन्च किया, जिसके पहले पांच दिनों में लगभग 40 लाख डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाए गए। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान लगभग 25 लाख थे, जिसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इसी अवधि के दौरान चेहरा प्रमाणीकरण अपनाने की दर 61 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गई है, जो प्रौद्योगिकी-सक्षम पेंशन सेवाओं में पेंशनभोगियों के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया दर्शाती है कि कैसे डिजिटल नवाचार पेंशनभोगियों के जीवन को आसान बना रहा है और साथ ही बुजुर्ग नागरिकों के लिए शासन को अधिक सुलभ, सुविधाजनक और सम्मानजनक बना रहा है।

राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अभियान धीरे-धीरे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जो सरकारी विभागों, पेंशन वितरण बैंकों, पेंशनभोगी संघों और परिवारों को निर्बाध पेंशन-संबंधी सेवाओं की सुविधा के लिए एक साथ लाता है।

इस कार्यक्रम में पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा ने भाग लिया। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ, श्री सतीश कुमार, सचिव, डाक विभाग, श्री सुब्रत दास, रक्षा लेखा महानियंत्रक, सुश्री अलका नांगिया अरोड़ा, संचार लेखा महानियंत्रक, सुश्री वंदना गुप्ता, सीईओ, यूआईडीएआई, श्री सौरभ विजय और अतिरिक्त महानिदेशक, पीआईबी, श्री नंद किशोर रेड्डी, अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अभियान का मूल उद्देश्य वृद्ध नागरिकों के लिए जीवनयापन में आसानी सुनिश्चित करना है, उन्होंने कहा कि भारत का बदलता जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पेंशनभोगियों को समाज का एक महत्वपूर्ण वर्ग बनाता है। लगभग 50 लाख कार्यरत कर्मचारियों के मुकाबले केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों की संख्या अब लगभग 70 लाख तक पहुंच गई है जो पहले की स्थिति से विपरीत हो है,जब कार्यरत कर्मचारियों की संख्या लगभग 55-60 लाख और पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 50 लाख थी।

उन्होंने कहा कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बेहतर स्वास्थ्य स्थितियों ने राष्ट्र निर्माण के लिए वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, विशेषज्ञता और क्षमता का उपयोग करने का एक नया अवसर पैदा किया है। कई कर्मचारी 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं जब वे अभी भी अपने स्वास्थ्य, अनुभव और पेशेवर क्षमताओं के चरम पर होते हैं।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण के संदर्भ में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बुजुर्ग नागरिकों को अपने आराम, स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करके राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए, जिससे वे रचनात्मक राष्ट्रीय प्रयासों में अपनी क्षमता का योगदान कर सकें। उन्होंने भारत की विकास यात्रा में भागीदार के रूप में युवा और पुरानी पीढ़ी के बीच स्वस्थ तालमेल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र के विकास का पता लगाते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बुजुर्ग पेंशनभोगियों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक शुरू करने से पहले सरकार ने शुरुआत में पारंपरिक जीवन प्रमाणपत्र पर भरोसा किया, उसके बाद उंगलियों के निशान के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया। उन्होंने कहा कि चेहरा पहचान तकनीक एक सुविधाजनक और सुलभ समाधान के रूप में उभरी है जो पेंशनभोगियों को बैंकों या कार्यालयों में जाने की आवश्यकता के बिना मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाने में सक्षम बनाती है। डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पिछले साल बनाए गए 1.92 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाणपत्रों में से लगभग 1.17 करोड़ चेहरे के प्रमाणीकरण के माध्यम से थे जो पेंशनभोगियों के बीच इस तकनीक के लिए बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अभियान तेजी से "संपूर्ण सरकार" और "संपूर्ण समाज" का आंदोलन बन गया है जिसमें पेंशनभोगी कल्याण संघ और परिवार के सदस्य डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, डीएलसी तैयार करने में दादा-दादी की सहायता करने वाले पोते-पोतियों ने प्रौद्योगिकी को अपनाने को एक आकर्षक पारिवारिक अनुभव बना दिया है जबकि वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल उपकरणों और सेवाओं से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि अभियान की बढ़ती स्वीकार्यता नागरिक-केंद्रित शासन को आगे बढ़ाने में सरकारी संस्थानों, पेंशनभोगियों और समाज की सामूहिक भागीदारी को दर्शाती है।

उन्होंने  पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा किए गए कई पेंशन-संबंधी सुधारों का भी उल्लेख किया, जिसमें लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान के लिए पेंशन अदालतें, सीपीईएनजीआरएएमएस के माध्यम से एक समर्पित शिकायत निवारण तंत्र और अप्रचलित नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण शामिल है।

उन्होंने कहा कि सुधारों ने अतिरिक्त नियमन शुरू करने के बजाय अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे पेंशन प्रशासन नागरिकों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि सरकार पेंशनभोगियों के सुझावों के लिए खुली है जहां भी उन्हें कठिनाइयों, बाधाओं या प्रक्रियात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उनके कल्याण में सुधार के लिए अप्रचलित नियमों और शर्तों को खत्म करना जारी रहेगा।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान पेंशनभोगियों के कल्याण, जीवनयापन में आसानी, डिजिटल सशक्तिकरण और पेंशनभोगियों की गरिमा के उद्देश्यों के साथ चलाया जा रहा है और साथ ही सरकार के न्यूनतम सरकार तथा अधिकतम शासन के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अभियान पेंशनभोगियों को त्वरित, सुविधाजनक और सुलभ इंटरफ़ेस प्रदान करता है, जिससे बार-बार आने की आवश्यकता और प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को कम किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रिंट और सोशल मीडिया, व्हाट्सएप नेटवर्क, लघु व्याख्यात्मक वीडियो और पेंशनभोगी संघों के माध्यम से व्यापक पहुंच ने जागरूकता फैलाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने में मदद की है।

सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि यह अभियान एक व्यापक संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें पेंशन वितरण करने वाले बैंक, रेलवे और रक्षा मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, डाक विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, यूआईडीएआई, राज्य सरकारें और पेंशनभोगी संघ एक साथ काम कर रहे हैं। दूरदराज के इलाकों में पेंशनभोगियों तक पहुंचने के विशेष प्रयासों के साथ, लगभग 3,000 स्थानों को शिविरों के माध्यम से कवर किया जा रहा है।

शिविरों में जाने में असमर्थ पेंशनभोगियों के लिए घर तक सेवाओं की भी व्यवस्था की गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभियान गतिशीलता या भौगोलिक बाधाओं के बावजूद बुजुर्ग नागरिकों तक पहुंचे। सचिव ने पेंशनभोगियों से अभियान का पूरा लाभ उठाने और साथी पेंशनभोगियों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील करते हुए कहा कि सकारात्मक अनुभव और मौखिक संचार इसकी पहुंच और प्रभाव को और मजबूत करेगा।

कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रव्यापी डीएलसी अभियान 4.0 का दस्तावेजीकरण करने वाली एक कॉफी टेबल ई-बुक के साथ एक सार-संग्रह पुस्तिका जारी की गई।


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