प्रविष्टि तिथि:
03 NOV 2026 10:02PM by PIB Delhi
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के अंतर्गत 'इंडिया एआई मिशन' ने आज स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल 'ईकेए-1' और धीर (धीर 2बी व धीर 5बी) जारी किए हैं। इन्हें क्रमशः 'सॉकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड' और 'जेंटीक्यू एआईटेक इनोवेशन' द्वारा विकसित किया गया है।
आज नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कार्यक्रम में इन्हें पेश किया गया। इस मौके पर सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी), भारत सरकार श्री एस. कृष्णन, माइटी और इंडियाएआई के वरिष्ठ अधिकारी तथा सॉकेट और जेंटीक्यू की लीडरशिप टीम मौजूद थीं। ये स्वदेशी मॉडल 'इंडियाएआई मिशन' के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं, जिनसे घरेलू स्तर पर एआई तकनीक विकसित करने की दिशा में भारत की प्रगति का पता चलता है।
इस अवसर पर, सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) श्री एस. कृष्णन ने कहा, "इस तरह के स्वदेशी मॉडलों का विकास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है। इससे सरकार, उद्योग, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्रों में उत्पादकता और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के अवसर भी खुलते हैं। इन संसाधनों ने ईकेए-1 और 'धीर' जैसे मॉडलों के विकास में मदद की है, जो अलग-अलग और महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करते हैं। एआईकोष (AIKosh) जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से, इन मॉडलों को शोधकर्ताओं, छात्रों, नवप्रवर्तकों और आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे और अधिक प्रयोगों और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।"
स्वदेशी एआई क्षमताओं के विकास पर बात करते हुए, इंडियाएआई के सीओओ श्री सुदीप श्रीवास्तव ने कहा, "इंडियाएआई मिशन का व्यापक सपोर्ट इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अधिक सुलभ बनाने और इसे भारत केंद्रित परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए समर्पित है। धीर और 'ईकेए-1' जैसे बेहतरीन मॉडल, एआई के क्षेत्र में भारत की बहुआयामी प्रगति को दर्शाते हैं। इनमें रोजमर्रा के डिवाइस के लिए बनाए गए हल्के (लाइटवेट) समाधानों से लेकर, जटिल व्यावसायिक कार्यों के लिए तैयार किए गए शक्तिशाली सिस्टम तक शामिल हैं।"
इंडियाएआई मिशन के 'इंडियाएआई इनोवेशन सेंटर (फाउंडेशन मॉडल्स)' पिलर के तहत चुनी गई टीमों में 'सॉकेट एआई' और 'जेंटीक्यू' शामिल हैं, जो स्वदेशी फाउंडेशन एआई क्षमताओं और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) का निर्माण कर रही हैं। इस मिशन के अंतर्गत सब्सिडी वाले राष्ट्रीय एआई कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच और शोध से जुड़े खर्चों के लिए मिलने वाले सहयोग ने इन मॉडल्स के विकास को संभव बनाया है। इससे पता चलता है कि किस तरह सार्वजनिक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, देश के भीतर होने वाले नवाचार को गति दे सकता है।
सॉकेट का ईकेए-1: भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं के लिए एक ओपन, स्पार्स हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल
सॉकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड ने ईकेए-1 विकसित किया है। यह एक शक्तिशाली फाउंडेशन मॉडल है, जिसमें 26.3 बिलियन पैरामीटर हैं और इसे लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है।
ईकेए-1 में उन्नत क्षमताएं हैं, जो अंग्रेजी के साथ-साथ भारत की सभी 22 अधिसूचित भाषाओं तक फैली हुई हैं। एक ओपन, स्पार्स हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल के रूप में तैयार किया गया ईकेए-1, गणित, कोडिंग, तर्क (रीजनिंग) और एजेंटिक कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है।
इस लॉन्च के मौके पर, सॉकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अभिषेक उप्परवाल ने कहा, "इंडियाएआई मिशन के सहयोग से, हमने एक उन्नत एआई मॉडल विकसित किया है, जिसे विशेष रूप से भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा के अनूठे परिवेश के हिसाब से तैयार किया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह क्षेत्र-विशेष की जरूरतों को पूरा कर सके, भारत के बदलते डिजिटल इकोसिस्टम को समझ सके, और देश की आवश्यकताओं व प्राथमिकताओं के अनुरूप समाधान प्रदान कर सके।"
जेंटीक्यू द्वारा 'धीर 2बी' और 'धीर 5बी': महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए सुरक्षित, ऑन-प्रिमाइसेस और बहुभाषी असिस्टेंट
जेंटीक्यू एआईटेक इनोवेशन ने 'धीर 2बी' और 'धीर 5बी' नाम के ओपन-सोर्स मॉडल पेश किए हैं। इन मॉडल्स को सुरक्षित, ऑन-प्रिमाइसेस (स्थानीय स्तर पर स्थापित) और बहुभाषी असिस्टेंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो अंग्रेज़ी के साथ-साथ 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।
'धीर 2बी' और 'धीर 5बी' ऐसे ऑटोमेशन, जानकारी खोजने और नागरिकों या उद्यमों से जुड़ी सेवाओं को सक्षम बनाते हैं जो बिना इंटरनेट (ऑफलाइन) भी काम कर सकते हैं और दस्तावेज़ों पर आधारित होते हैं। इनका उपयोग रक्षा, सरकारी, औद्योगिक और शैक्षिक क्षेत्रों में किया जा सकता है-खासकर उन जगहों पर जहां कनेक्टिविटी कम है या जो संवेदनशील वातावरण वाले क्षेत्र हैं।
इस लॉन्च के मौके पर, जेंटीक्यू एआईटेक इनोवेशन के सीईओ प्रो. शशिकुमार ने कहा, “धीर 2बी और धीर 5बी जैसे मॉडल अलग-अलग कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म, जैसे कि जीपीयू और टीपीयू पर चलने की सुविधा देते हैं। इनका हल्का आर्किटेक्चर इन्हें क्लाउड कनेक्टिविटी पर निर्भर हुए बिना, सीधे मोबाइल फोन (ऑन-डिवाइस) पर चलाने लायक बनाता है। इससे यूजर अपने डिवाइस पर ही डेटा रखते हुए एआई सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे प्राइवेसी, सुरक्षा और पहुंच बेहतर होती है।”
इंडियाएआई मिशन के बारे में
तकनीक के इस्तेमाल को सबके लिए सुलभ बनाने के माननीय प्रधानमंत्री के विजन के आधार पर, भारत की एआई रणनीति का लक्ष्य भारत से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना, सभी भारतीयों के लिए आर्थिक और रोजगार के अवसर पैदा करना, और देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करना है। "भारत में एआई बनाना और भारत के लिए एआई को काम में लाने" के विजन से प्रेरित होकर, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 मार्च 2024 को 'इंडियाएआई मिशन' को मंजूरी दी। यह मिशन सात प्रमुख स्तंभों के माध्यम से काम करता है, जिसका उद्देश्य भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक मजबूत और समावेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करना है। ये स्तंभ हैं: इंडिया एआई कंप्यूट कैपेसिटी, इंडिया एआई, इनोवेशन सेंटर, इंडिया एआई डेटासेट प्लेटफॉर्म (एआईकोष), इंडिया एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट पहल, इंडिया एआई फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई।
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