प्रविष्टि तिथि:
31 OCT 2026 3:21PM by PIB Delhi
भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के तहत पुणे जिले के खेड़ के गांवों में जलागम विकास कार्यों की समीक्षा की
श्री दिलीप कुमार, सचिव, भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने 30 अक्टूबर, 2026 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के वरुडे, गुलानी और वाफगांव गांवों में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के जलागम विकास घटक के तहत किए जा रहे जलागम विकास कार्यों की समीक्षा की। इस योजना के तहत जलागम विकास के प्रमुख उद्देश्यों में मृदा एवं जल संरक्षण संबंधी उपाय करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना शामिल है।
कार्यों का निरीक्षण करने के बाद ग्रामीणों से बातचीत करते हुए श्री दिलीप कुमार ने कहा, “जल हमारे भविष्य का आधार है। गाँवों की जल-सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्षा की हर बूँद का संरक्षण किया जाना चाहिए।”
उन्होंने ग्रामीणों से जलागम विकास योजना के तहत निर्मित जल संचयन संरचनाओं के नियमित रखरखाव और मरम्मत की सामूहिक जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया, जिससे ये परिसंपत्तियाँ अगले 20 वर्षों तक कार्यशील बनी रहें। उन्होंने हिवरे बाजार की तर्ज पर खेड़ परियोजना के अंतर्गत आने वाले गांवों को जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर समुदायों में बदलने के लिए निरंतर प्रयास करने का भी आह्वान किया।
इस दौरे में भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएम) श्री नितिन खड़े; महाराष्ट्र सरकार के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के सचिव डॉ. जितेंद्र पापळकर और वसुंधरा जलागम विकास एजेंसी की उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती अश्विनी जगताप ने भाग लिया।
सचिव महोदय ने ऊँचाई वाले क्षेत्रों से घाटी की ओर (रिज-टू-वैली) दृष्टिकोण अपनाकर विकसित जलागम संरचनाओं का निरीक्षण किया। इनमें सतत समोच्च खाइयाँ (सीसीटी), मिट्टी के नाला बाँध, सीमेंट नाला बाँध, कोल्हापुरी प्रकार के बंधारे और जल भंडारण के लिए तालाब शामिल थे। उन्होंने वर्षा जल के अपवाह को कम करने, भूजल पुनर्भरण बढ़ाने और कृषि के लिए जल की उपलब्धता में सुधार करने में इन संरचनाओं की प्रभावशीलता, भूजल स्तर में हुए बदलावों और लाभार्थियों को प्राप्त लाभों की समीक्षा की।
सचिव महोदय ने योजना के तहत लाभार्थियों को उपलब्ध कराए गए खेत तालाबों, बागवानी पौधरोपण और कृषि उपकरणों के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए गए लाभों की भी समीक्षा की।
ग्रामीणों ने बताया कि खेड़ परियोजना के अंतर्गत 11 गांवों में किए गए जलागम विकास कार्यों से भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इससे किसानों को प्रतिवर्ष दो से तीन फसलें उगाने में मदद मिली है, जिससे कृषि आय और ग्रामीण आजीविका में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद, खेत तालाबों में संचित जल और सीमेंट नाला बाँधों तथा सीसीटी संरचनाओं से जुड़े कुओं के जल स्तर में सुधार से खड़ी फसलों की सिंचाई में मदद मिली है।
29 अक्टूबर, 2026 को भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने पुणे स्थित यशदा में महाराष्ट्र सरकार के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के सचिव के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई योजना की स्थिति तथा इसकी वित्तीय और भौतिक प्रगति की भी समीक्षा की।
श्री दिलीप कुमार ने अधिकारियों को महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल संरक्षण कार्यों को समय पर पूरा करने को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। अल नीनो की परिस्थितियों को देखते हुए, उन्होंने राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकों में से योजना के अंतर्गत शामिल 76 तालुकों में कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। सूखे के प्रभाव को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए जलागम विकास कार्य महत्त्वपूर्ण हैं। प्राथमिकता वाले कार्यों में अंतःस्रवण टैंक, भंडारण तालाब, भंडारण बाँध और कोल्हापुरी प्रकार के बंधारे शामिल हैं, जिनसे वर्षा जल का भंडारण बढ़ने, गांवों में जल की उपलब्धता सुदृढ़ होने, फसलों को सुरक्षात्मक सिंचाई उपलब्ध कराने और सूखे जैसी परिस्थितियों के प्रति कृषि की संवेदनशीलता कम होने की अपेक्षा है।
बैठक में निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने, गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने, केंद्र-राज्य समन्वय को सुदृढ़ करने और उपलब्ध निधियों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
इस दौरे से यह बात रेखांकित हुई कि सूखे के प्रभाव को प्रभावी ढंग से कम करने में जलागम विकास कार्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही, विकसित भारत के निर्माण के लिए जल-सुरक्षित गांवों के निर्माण में जल संरक्षण संरचनाओं के दीर्घकालिक रखरखाव और सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व को भी बल मिला।
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