प्रविष्टि तिथि:
28 OCT 2026 8:16PM by PIB Delhi
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय सचिव, श्री सुधांश पंत ने आज असम में मंत्रालय की अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। इसमें मादक पदार्थ की मांग में कमी, अनुसूचित जाति विकास, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और कमजोर समूहों का पुनर्वास शामिल हैं।
राज्य की राजधानी गुवाहाटी में हुई समीक्षा बैठक में विशेष प्रयासों की प्रगति का आकलन किया गया और यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर कोशिश करने की ज़रूरत पर बल दिया गया कि कल्याणकारी कार्यों से पात्र लाभार्थियों को फ़ायदा मिले।
बैठक में असम सरकार के गृह और राजनीतिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अजय तिवारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री पल्लव गोपाल झा और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा बैठक के दौरान श्री पंत ने सामाजिक कल्याणकारी कार्यक्रमों को अच्छे से लागू करने के लिए एक समन्वित सरकार की प्रतिबद्धता की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने ज़ोर दिया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को संबंधित विभाग और लागू करने वाली एजेंसियों को एक साथ लाने में एक असरदार समन्वयकारी भूमिका। निभानी चाहिए।
श्री पंत ने नशा मुक्त भारत अभियान (एन एम बी ए ), प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) और नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) के तहत समन्वय के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने असम द्वारा की गई प्रगति की प्रशंसा की और लागू करने में आने वाली कमियों को दूर करने के लिए लगातार कोशिशों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

नशीली दवाओं की मांग में कमी और पुनर्वास को मजबूत करना
सचिव को बताया गया कि नशा मुक्त भारत अभियान के तहत, असम के सभी जिलों में जागरूकता और जनसंपर्क गतिविधियाँ की गई हैं, और 10,614 शैक्षणिक संस्थान में 6,575 गतिविधियों के ज़रिए 27.71 लाख लोगों तक पहुँची हैं। राज्य ने 13,712 नशा मुक्ति मित्र स्वयंसेवकों को पंजीकृत किया है और 2,24,783 ई-प्रतिज्ञाएं दर्ज की गई जो नशे की लत को रोकने की कोशिशों में शैक्षणिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों और समुदायों की भागीदारी को दिखाता है।

राज्य के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि असम में नशे के आदी लोगों के लिए 16 एकीकृत पुनर्वास केंद्र और राज्य सरकार के कोष से चलने वाले छह नश मुक्ति और पुनर्वास केंद्र हैं। इसके अलावा इलाज और अन्य की दूसरी सुविधाएं भी हैं। ये सुविधाएं नशे के आदी लोगों में जागरूकता, इलाज, पुनर्वास और समाज में फिर से बसने की बड़ी कोशिशों में मदद करती हैं।

एकीकृत विकास और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना
राज्य के अधिकारियों ने आगे बताया कि पीएम-अजय के तहत, 721 अनुसूचित जाति के गांवों को एकीकृत विकास के लिए लिया गया है। आजीविका वाले हिस्से में 5,269 लाभार्थियों को मंज़ूरी दी गई है, जिसमें स्वयं सहायता समूह (एस एच जी) से जुड़ी महिलाएं और अनुसूचित जाति की अलग-अलग महिलाएं शामिल हैं, जिसमें कुल ₹26.34 करोड़ का वित्तीय निवेश शामिल है। इस योजना में अनुसूचित जाति के ज़्यादातर इलाकों में 28 छोटे स्टेडियम बनाने की भी योजना है, जो सामुदायिक अवसंरचना और खेल तथा शारीरिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करेंगी।

समीक्षा में असरदार तरीके से लागू करने और मिलकर काम करने की अहमियत पर ज़ोर दिया गया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विकास के कामों से आय के सतत अवसर मिलें और अनुसूचित जाति के समुदायों के लिए ज़रूरी सुविधाओं तक पहुँच बेहतर हो।

सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को बढ़ावा देना
समीक्षा में नमस्ते योजना को लागू करने की भी जांच की गई, जिसका उद्देश्य काम के बेहतर तरीकों और मशीनीकरण के ज़रिए सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और भलाई को बढ़ावा देना है। असम में, 96 शहरी स्थानीय निकायों (यू एल बी) में 483 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों और 6,365 कचरा बीनने वालों की विवरण तैयार किया है।

यह कार्यक्रम काम से जुड़ी सुरक्षा, यह व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों, स्वास्थ्य कवरेज तथा मशीनीकृत सफाई के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करता है। इन तरीकों का उद्देश्य काम करने के हालात को बेहतर बनाना, काम से जुड़े खतरों को कम करना और साफ-सफाई के सुरक्षित तरीकों को अपनाने को मज़बूत करना है।

वरिष्ठ नागरिक कल्याण और कमजोर समूहों के पुनर्वास को मजबूत करना
बैठक में अटल वयो अभ्युदय योजना (ए वी वाई ए वाई ) के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिक कल्याण, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सुरक्षा के उपायों, और स्माइल योजना के अंतर्गत भीख मांगने वाले लोगों के पुनर्वास की भी समीक्षा की गई।
बताया गया कि राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत, असम में 10,715 वरिष्ठ नागरिकों की मदद की गई है, और वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 27 अक्टूबर 2026 तक 48,756 सहायक उपकरण बांटे गए हैं। यह पहल उम्र से जुड़ी दिव्यांगता और चलने-फिरने में दिक्कतों का सामना कर रहे वरिष्ठ नागरिकों को सहायता उपकरण तक पहुंच आसान बनाती है, जिससे उनकी आज़ादी और जीवन की गुणवक्ता में सुधार होता है।
अंतर-विभागीय समन्वय और प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करना
श्री पंत ने मंत्रालय की कालाकांकर पहलों को लागू करने में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और राज्य सरकार की टीम की कोशिशों की प्रशंसा की। उन्होंने लगातार अंतर विभागीय समन्वय इंटर-डिपार्टमेंटल, योग्य लाभार्थियों तक असरदार तरीके से पहुंचने और लागू करने में आने वाली रुकावटों को समय पर हल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
सचिव ने कल्याणकारी योजनाओं के असर को दिखाने और पात्र लाभार्थियों के बीच ज़्यादा जागरूकता पैदा करने के लिए सफलता की कहानियों को व्यवस्थित रूप से दस्ताविजीकरण करने तथा उनका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया। समीक्षा में क्रियान्वयन तंत्र को मज़बूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ पूरे असम में लोगों तक पहुंचे, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगातार समन्वय की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।
इन कोशिशों से, मंत्रालय और राज्य सरकार ने अनुसूचित जातियों, वरिष्ठ नागरिकों , सफ़ाई कर्मचारियों और समाज के दूसरे कमज़ोर तबकों के लिए सामाजिक न्याय , समावेशिता और बेहतर गुणवत्ता वाले जीवन को बढ़ावा देने के अपने प्रतिबद्धता को फिर से पक्का किया।
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