प्रविष्टि तिथि:
28 OCT 2026 7:22PM by PIB Delhi
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज नई दिल्ली में 'विकसित भारत बिल्डाथॉन (वीबीबी) 2025' की राष्ट्रीय स्तर की 10 विजेता टीमों और नवोन्मेषकों को सम्मानित किया। वीबीबी 2025 को "सबसे बड़ी नवाचार समाधान प्रतियोगिता" के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया, जो भारत में स्कूली शिक्षा और जमीनी स्तर के नवाचार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। कार्यक्रम के दौरान, मंत्री ने 'उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' के अंतर्गत 'शिक्षक शिक्षा संस्थानों (टीईआई) के लिए दिशानिर्देश' भी जारी किए। उन्होंने ई-कचरे पर आधारित क्विज़ प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को पुरस्कार भी वितरित किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, श्री जयंत चौधरी ने बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, नवाचार और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया, ताकि उन्हें भविष्य के अग्रणी व्यक्तियों के रूप में तैयार किया जा सके। 'बिल्डाथॉन' पहल का जिक्र करते हुए, उन्होंने बताया कि इसमें छात्रों को बिना किसी पहले से तय समस्या या समाधान के, खुद से समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्होंने पूरे देश से लाखों छात्रों की भागीदारी की सराहना की और उन्हें मार्गदर्शन देने में शिक्षकों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
ई-कचरे की बढ़ती चुनौती पर चिंता जताते हुए, श्री चौधरी ने कहा कि इस समस्या से निपटने में स्कूली छात्रों को शामिल करना जरूरी है, जिससे इसके व्यवस्थित प्रबंधन का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हल करना संस्थानों, समुदायों और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वयस्क साक्षरता को बढ़ावा देने और सीखने वालों का सम्मान व आत्मविश्वास बहाल करने में 'उल्लास' की भूमिका को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि नए दिशानिर्देश छात्र-शिक्षकों को देश को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएंगे।
इस कार्यक्रम में डीएआरपीजी की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा, डीओएसईएल के सचिव श्री टी. के. अनिल कुमार, शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्वायत्त निकायों के प्रतिनिधि और प्रमुख, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के अधिकारी तथा सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) द्वारा अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के सहयोग से आयोजित 'विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025' (वीबीबी 2025) का उद्देश्य स्कूली छात्रों के बीच रचनात्मक समस्या-समाधान, उद्यमिता और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देना था। 'आत्मनिर्भर भारत', 'स्वदेशी', 'वोकल फॉर लोकल' और 'समृद्ध भारत' जैसे चार मुख्य स्तंभों पर आधारित इस पहल को जमीनी स्तर पर अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली। इसमें 'आइडिया' और 'प्रोटोटाइप' दोनों श्रेणियों में कुल 2,87,967 परियोजना प्रविशितियाँ जमा की गयीं।
समाधानों का मूल्यांकन करने के लिए, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक कठोर तीन-स्तरीय मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था, जिसका संचालन विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के पैनल द्वारा किया गया। व्यापक मूल्यांकन के बाद, 10 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं, 100 राज्य पुरस्कार विजेताओं और 1,000 जिला पुरस्कार विजेताओं का चयन किया गया।
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर ₹1 करोड़ से अधिक की पुरस्कार राशि रखी गई थी। राष्ट्रीय स्तर पर जीतने वाली 10 टीमों को कुल ₹17.50 लाख का नकद पुरस्कार दिया गया। प्रोटोटाइप श्रेणी के अंतर्गत, शीर्ष 5 विजेता टीमों में से प्रत्येक को उनके कार्यात्मक मॉडल के लिए ₹2,50,000 का पुरस्कार दिया गया। आइडिया श्रेणी के अंतर्गत जीतने वाली 5 टीमों में से प्रत्येक को ₹1,00,000 दिए गए, ताकि वे अपने रचनात्मक विचारों को आगे बढ़ा सकें और उन्हें बड़े स्तर पर लागू कर सकें। आज सम्मानित किए गए विजेता असम, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, जम्मू और कश्मीर, केरलम, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से थे।
विशेष अभियान 6.0
इस कार्यक्रम में 'विशेष अभियान 6.0' के तहत मंत्रालय के दोनों विभागों (डीओएसईएल और उच्च शिक्षा विभाग) द्वारा की गयी पहलों का उद्देश्य ई-कचरे के बारे में जागरूकता फैलाना और इसके संग्रहण को बढ़ावा देना था। इन पहलों को कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया। डीओएसईएल के सचिव, श्री अनिल कुमार ने इस अभियान के दौरान एकत्र किए गए ई-कचरे को अधिकृत पुनर्चक्रण-कर्ता/पुनर्निर्माण-कर्ता को सौंप दिया।
इस अभियान के तहत, डीओएसईएल ने देश भर के स्कूलों में ई-कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए। आज स्कूलों में कई गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें एकत्र किए गए ई-कचरे को अधिकृत पुनर्चक्रण-कर्ता/पुनर्निर्माण-कर्ता को सौंपना, ई-कचरे पर आधारित प्रातःकालीन सभाएं और ई-कचरे से जुड़े क्विज़ शामिल थे।
उल्लास के अंतर्गत टीईआई के लिए दिशानिर्देश
इस कार्यक्रम में ' उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' के अंतर्गत 'शिक्षक शिक्षा संस्थानों (टीईआई) के लिए दिशानिर्देश' जारी किए गए। इन दिशानिर्देशों में एनसीटीई -मान्यता प्राप्त शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों (जैसे बी.एड., बी.पी.एड., एम.एड., एम.पी.एड. और अन्य मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम) में नामांकित छात्र-शिक्षकों की 'स्वयंसेवक शिक्षक' के रूप में भागीदारी की परिकल्पना की गई है।
इन दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक छात्र-शिक्षक को 5 से 8 ऐसे लोगों को साक्षर बनाने और उनका प्रमाणन प्राप्त करने में मदद करनी होगी, जो साक्षर नहीं हैं। साथ ही, यदि वे सफलतापूर्वक इन लोगों को साक्षर बनाकर उनका प्रमाणन करवा लेते हैं, तो उन्हें इसके बदले शैक्षणिक क्रेडिट भी दिए जाएंगे। संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद डीओएसईएल द्वारा तैयार किये गये इन दिशानिर्देशों में, इनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एनसीटीई, एनसीईआरटी, सीएनसीएल, एससीईआरटी, डीआईईटी, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरणों (एसएलएमए), जिला प्राधिकरणों, टीईआई और छात्र-शिक्षकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
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