औषधि विभाग
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दवा विपणन की समीक्षा के लिए औषध विभाग ने समिति का गठन किया


यूसीपीएमपी ढांचे की समीक्षा करने और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उपायों की सिफारिश करने के लिए समिति गठित;

समिति अपनी पहली बैठक की तारीख से 2 महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी

प्रविष्टि तिथि: 23 OCT 2026 6:42PM by PIB Delhi

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग ने दवा विपणन को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियामक ढांचे की व्यापक समीक्षा करने तथा औषध क्षेत्र में अनैतिक प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी, पर्यवेक्षण और प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उपायों की सिफारिश करने हेतु एक समिति का गठन किया है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती प्रीति सूदन और मेदांता के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक(सीएमडी) डॉ. नरेश त्रेहन को इसका सदस्य बनाया गया है। समिति आवश्यक परामर्श प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी पहली बैठक की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।

दवा विपणन प्रथाओं के लिए समान आचार संहिता(यूसीपीएमपी) को वर्ष 2015 में एक स्वैच्छिक, उद्योग-संचालित स्व-नियामक तंत्र के रूप में पेश किया गया था, इसका उद्देश्य नैतिक दवा विपणन को बढ़ावा देना और दवा कंपनियों एवं स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के बीच बातचीत को विनियमित करना था। इसके बाद, विभाग ने यूसीपीएमपी 2024 पेश किया, जिसने वर्ष 2015 के संस्करण की जगह ली और इसके लागू करने के ढांचे को मजबूत बनाया। वर्तमान में वर्ष 2024 की यह आचार संहिता लागू है।

समिति अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं से संबंधित मुद्दों की व्यापक जांच करेगी और निम्नलिखित संदर्भ की शर्तों (टीओआर) पर अपनी सिफारिशें प्रदान करेगी:

ए) अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं(फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस) से संबंधित सभी मुद्दों की समग्र और व्यापक जांच करना।

बी) दवा विपणन की अनैतिक प्रथाओं की निगरानी, ​​देखरेख और प्रवर्तन के लिए मौजूदा तंत्रों की प्रभावशीलता की जांच करना, और अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों की पहचान करना।

सी) मौजूदा निगरानी और नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक उपायों की आवश्यकता की जांच करना, तथा ऐसे उपायों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक उपयुक्त नियामक/वैधानिक या किसी अन्य उपाय एवं कानूनी ढांचे का सुझाव देना।

डी) आवश्यकतानुसार संबंधित हितधारकों, तकनीकी, पेशेवर और विषय विशेषज्ञों, संस्थानों या निकायों के साथ चर्चा करना और इस विषय की व्यापक जांच के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करते समय उनके सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार करना।

ई) अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं पर अंकुश लगाने से संबंधित किसी भी अन्य प्रासंगिक मुद्दे पर विचार-विमर्श करना और सिफारिशें प्रस्तुत करना।

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पीके/केसी/आरटी/पीकेपी


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