सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर कल्याणकारी कामों और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ सरकार के दृष्टिकोण की सराहना की


जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव श्री अटल डुल्लू ने कल्याणकारी योजनाओं को पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई

प्रविष्टि तिथि: 22 OCT 2026 7:45PM by PIB Delhi

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय सचिव, सुधांश पंत ने आज जम्मू-कश्मीर में सामाजिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत ज़मीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचने और नशे की लत से निपटने के लिए सरकार के मिलकर किए गए पूरे देश के दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश के प्रयासों को एक सराहनीय मॉडल बताया जिसे पूरे देश में दोहराने की संभावना है।

श्री पंत ने जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने की समीक्षा के दौरान  ये बातें कहीं। इस समीक्षा की अध्यक्षता उन्होंने और मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मिलकर की।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह, आयुक्त-सह-सचिव, शिक्षा विभाग, सचिव, सामाजिक कल्याण विभाग, सचिव स्वास्थ्य, महानिदेशक, समाज कल्याण कश्मीर, निदेशक सामाजिक कल्याण, जम्मू, विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा विभाग, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, श्रीनगर, सचिव, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग बोर्ड्स, और दूसरे संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किए गए कल्याणकारी उपाय को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिशों की सराहना करते हुए  सचिव ने कहा कि गांवों और पंचायतों तक की गई पहुंच, सबको साथ लेकर कल्याणकारी कार्यों को पहुंचाने के लिए एक मज़बूत प्रतिबद्धता दिखाती है। उन्होंने विशेष तौर पर जम्मू और की कश्मीर के मादक पदार्थ के खतरे के विरुद्ध मिलकर चलाए गए अभियान की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि इस पहल को पूरे देश में तारीफ़ मिली है और यह दूसरे इलाकों के लिए एक सफल आदर्श बन सकता है।

हर लाभार्थी के लिए बनी योजनाओं की प्रगति पर खुशी जताते हुए,  सचिव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, बेसहारा महिलाओं और दूसरे कमज़ोर तबकों के लिए की जाने वाली कोशिशों से अच्छे नतीजे मिलें। उन्होंने प्रशासन को सलाह दी कि वे लाभार्थियों के  अनुभव का विवरण दर्ज़ करें और इन कोशिशों से निकली हज़ारों सफलता की कहानियों को दिखाएं, ताकि ज़्यादा जागरूकता पैदा हो और पूरे देश में इनका असर बढ़े।

भीख मांगने वाले लोगों के पुनर्वास की समीक्षा करते हुए, श्री पंत ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को अपने शहरी केंद्रों के लिए भीख मुक्त शहर' का दर्जा पाने की दिशा में काम करने के लिए बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की काफ़ी कम संख्या को लक्षित पुनर्वास, निरंतर सहायता तथा समर्पित गैर-सरकारी संगठनों के साथ सहयोग के माध्यम से इसका समाधान किया जा सकता है।।

केंद्र शासित प्रदेश के सचिव ने मंत्रालय के उद्देश्य को पूरा करने में मदद के लिए केंद्र शासित के लिए विशेष प्राथमिकता और लक्षित क्षेत्र भी बताए। उन्होंने जम्मू कश्मीर के सामाजिक कल्याण विभाग को लगातार मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान करने हेतु मुख्य सचिव अटल डुल्लू की सराहना की और कहा कि इसके अलग-अलग काम को अच्छे से लागू करने के लिए कई विभागों के बीच करीबी तालमेल की ज़रूरत है।

इस मौके पर  मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सबको साथ लेकर चलने वाले विकास, सामाजिक न्याय और सामुदायिकता को मज़बूत बनाने के लिए सरकार के  वादे को दोहराया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन सभी योग्य और पात्र लोगों, विशेषकर समाज के पिछड़े और ज़रूरतमंद लोगों तक कल्याणकरी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए पक्का इरादा रखता है।

इसके अलावा, मुख्य सचिव ने जम्मू कश्मीर में अलग-अलग लाभकारी समूहों की जनसांख्यिकीय रूपरेखा, उनके  कल्याण  के लिए मौजूद कल्याणकारी उपायों और उनके अधिकारों की रक्षा करने और अत्याचार, भेदभाव और परेशानी को रोकने के लिए बनाए गए कानूनी, संस्थागत और नियामक सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर कोशिश करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया कि इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुँचे। इस अवसर  पर, सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव, डोइफोडे सागर दत्तात्रेय ने अलग-अलग केन्द्र द्वारा प्रायोजित और केंद्र शासित-स्तर की योजनाओं  के तहत हुई प्रगति की पूरी जानकारी दी। इसमें मादक पदार्थों की मांग कम करना, शैक्षणिक छात्रवृत्ति , वरिष्ठ नागरिक कल्याण, पुनर्वास, सफाई क्रमिक की सुरक्षा सामुदायिक विकास  और कमज़ोर समूह  के लिए कानूनी सुरक्षा शामिल हैं।

नशा मुक्तजम्मू कश्मीर 100 दिन अभियान के तहत, विभाग ने कई विभागों की मिली-जुली कोशिशों से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचने की रिपोर्ट दी। यह पता चला कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 7.21 मिलियन से ज़्यादा लोगों तक पहुंच बनाने के लिए कई आयोजन किए गए, जिसमें नशा मुक्त करने के लिए इलाज की सुविधा  ने 66,594 मरीजों को संभाला, जबकि विभाग के नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ने 1,053 लोगों की देखभाल की।

प्रत्यर्पण के मामले में, यह बताया गया कि पुलिस ने 1,187 प्राथमिकी दर्ज की हैं और 1,349 लोगों को गिरफ्तार किया है। वित्तीय जांच के बारे में  बताया गया कि इसके नतीजे में मादक पदार्थ तस्करों की ₹9,828.17 लाख कीमत की 125 अचल संपत्ति और ₹703.83 लाख कीमत की 60 चल संपत्ति ज़ब्त   की गईं। बैठक में बताया गया कि नशा पीड़ित व्यक्ति के लिए प्रस्तावित पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक पुनःएकीकरण योजना, 2026 में एक सुनियोजित तीन-वर्षीय पुनर्वास रूपरेखा शामिल है।

इस मौके पर, जीएमसी  श्रीनगर के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. अरशद हुसैन ने नशे की लत से जुड़ी बीमारियों को ठीक करने के लिए जम्मू कश्मीर के 'सर्कल ऑफ़ केयर' तरीके के बारे में विस्तार से बताया। यह 3डी रणनीति, प्रवेश से लेकर नशा छुड़ाने की जगहों तक, इलाज, पुनर्वास, समाज के साथ फिर से जुड़ना और लंबे समय तक निगरानी के ज़रिए देखभाल जारी रखती है ताकि लगातार सुधार में मदद मिल सके।

इसके अलावा  प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत, यह बताया गया कि 419 गांवों को आदर्श गांव के तौर पर विकसित करने के लिए चुना गया है, जिनमें से 28 को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है। 2026-27 के दौरान अब तक कुल 81 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। बैठक में कार्यक्रम के बाद के चरण को पूरा करने के लिए कोष की ज़रूरत की भी समीक्षा की गई।

विभाग ने बताया कि पी एम – अजय  के ग्रांट इन-एड हिस्से के तहत ₹496.59 लाख का इस्तेमाल आधारभूत अवसंरचना, कौशल क्षमता और आय देने वाली चीज़ों के लिए किया गया। इसी तरह, अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत, पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 17 वरिष्ठ नागरिक आवास चल रहे थे, जिनमें जम्मू क्षेत्र में आठ और कश्मीर क्षेत्र में नौ वरिष्ठ नागरिक रह रहे थे।

समीक्षा में पीएम - यशस्वी  के तहत ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी  समुदायों के लिए शैक्षणिक छात्रवृति  और अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रवृति योजना भी शामिल थीं। 15 अक्टूबर, 2026 तक, शिक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएम यशस्वी के तहत 24,817 के लक्ष्य के मुकाबले कुल 20,611 आवेदन मिले थे।

अनुसूचित जाति छात्रवृति योजना के तहत, राष्ट्रीय छात्रवृति पोर्टल के ज़रिए 5,613 -मैट्रिक के बाद  और 2,866 प्री-मैट्रिक आवेदन जमा किए गए थे। लंबित मामलों को निपटाने और आधार  में तेज़ी लाने के लिए विशेष अभियान और व्यक्तिगत स्तर पर  कार्रवाई भी चल रहे थे।

नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) के तहत, 74 शहरी व्यक्तिगत बॉडीज़ में 741 सीवर और सेप्टिक टैंक कार्मिको की व्यक्तिगत जानकारी तैयार की गई थी, जिनमें से 734 को सही पाया  गया था। इसके अलावा, 5,862 शहरी कचरा बीनने वालों की व्यक्तिगत जानकारी गई थी, जिनमें से 4,508 को व्यक्तिगत किया गया था। विभाग ने सीवर और सेप्टिक टैंक कामगारों को 721 व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और कचरा बीनने वालों को 3,854 किट बांटी थीं।

नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत बैठक में सुरक्षा को लागू करने की समीक्षा की गई। इस दिशा में सम्भल 2.0 पोर्टल ने पंजीकृत 66 ऑनलाइन शिकायतों में से 63 का समाधान किया था। 2022 और 2026 के बीच अत्याचार के 50 पीड़ितों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के ज़रिए ₹58.60 लाख की राहत दी गई थी।

बातचीत के दौरान,बताया गया  कि कुछ ओ बी सी छात्रावास परियोजनाओं के लिए लंबित केंद्रीय वित्तीय  शेयर की वजह से उनके पूरा होने में रुकावट आई है। केंद्र शासित प्रशासन ने इन सुविधाओं को जल्दी पूरा करने के लिए ज़रूरी कोष जारी करने के लिए मंत्रालय से  मांग की है।

समीक्षा में लगातार अंतर विभागीय समन्वय, असरदार तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचने, लागू करने में आने वाली रुकावटों को समय पर हल करने और सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण करने और आम जनता को देने के लिए और ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया, ताकि यह पक्का हो सके कि कल्याण योजनाएं जम्मू-कश्मीर में लोगों की ज़िंदगी में ठोस सुधार ला सकें।

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पीके/केसी/आरटी/एनकेएस


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