संस्कृति मंत्रालय
क्षेत्रीय पहचान से लेकर साझा राष्ट्रीय विरासत तक
पीएम स्मृति-चिह्न मध्य प्रदेश की स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को व्यापक राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं
प्रविष्टि तिथि:
08 OCT 2026 6:25PM by PIB Delhi
मध्य प्रदेश के 22 स्मृति-चिन्ह, जिन्हें पीएम स्मृति-चिन्हों की 8वीं ई-नीलामी में प्रदर्शित किया गया है, केवल कलाकृतियों, तस्वीरों और स्मरणीय वस्तुओं का संग्रह नहीं हैं। सामूहिक रूप से ये राज्य की जीवंत विरासत का एक दृश्य मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जो परंपराओं और ऐतिहासिक स्थलों को स्वदेशी कलात्मक अभिव्यक्ति, पारिस्थितिक विरासत, सार्वजनिक संस्थानों और भारत की राष्ट्रीय पहचान के प्रतीकों से जोड़ता है।
मध्य प्रदेश के ये 22 स्मृति-चिन्ह पीएम स्मृति-चिन्हों के पीछे निहित एक केंद्रीय विचार को दर्शाते हैं: कोई उपहार किसी विशेष स्थान, समुदाय या परंपरा से जुड़ा हो सकता है, लेकिन उसकी कहानी व्यापक राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा बन सकती है।
स्थलों, लोगों और परंपराओं के माध्यम से मध्य प्रदेश की कहानी
यह संग्रह मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक परिदृश्य के विभिन्न आयामों को समेटे हुए है। उज्जैन और खजुराहो से लेकर उदयगिरि, महेश्वर, शाजापुर, नीमच, खंडवा और संजय टाइगर रिजर्व के वनों तक यह संग्रह राज्य की पहचान के कई पहलुओं को दर्शाता है।
उल्लेखनीय स्मृति चिन्हों में खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर का लघु धातु मॉडल शामिल है, जो मध्य प्रदेश के सर्वाधिक प्रसिद्ध विरासत स्थलों में से एक की स्थापत्य और मूर्तिकला विरासत को समकालीन रूप में प्रस्तुत करता है। एक अन्य स्मृति-चिन्ह उदयगिरि की गुफाओं में भगवान विष्णु के वराह रूप को दर्शाता है, जो वर्तमान को राज्य की प्राचीन मूर्तिकला विरासत से जोड़ता है।
इस संग्रह में उन लोगों की स्मृति भी समाहित है, जिन्होंने भारत के बौद्धिक और सामाजिक विकास में योगदान दिया। डॉ. हरि सिंह गौर, जो शिक्षाविद, विधिवेत्ता और समाज सुधारक थे, की प्रतिमा राज्य के सार्वजनिक जीवन में शिक्षा और संस्था-निर्माण के योगदान का प्रतिनिधित्व करती है।
महेश्वर किले और उसके घाटों का एक फ्रेमयुक्त छायाचित्र राज्य की स्थापत्य विरासत को रेखांकित करता है।
जीवंत बनी हुई विरासत
यह संग्रह यह भी दर्शाता है कि विरासत केवल अतीत से प्राप्त स्मारकों तक सीमित नहीं है। यह समकालीन समुदायों की मान्यताओं, कलात्मक पररंपराओं और प्राकृतिक परिदृश्यों के माध्यम से निरंतर अभिव्यक्त होती रहती है।
गोंड ट्री ऑफ लाइफ चित्रकला इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। पारंपरिक गोंड कला-शैली में निहित ये कृतियां स्वदेशी दृश्यात्मक अभिव्यक्ति को राष्ट्रीय संग्रह का हिस्सा बनाती हैं और यह दर्शाती हैं कि समुदाय-आधारित कलात्मक परंपराएं समकालीन रूपों में निरंतर अभिव्यक्ति प्राप्त कर रही हैं।
उज्जैन के महाकालेश्वर के अनेक चित्रों के साथ-साथ शाजापुर की मां राजराजेश्वरी, नीमच की महामाया भदवा माताजी और खंडवा के श्री दादाजी धूनीवाले मंदिर के चित्रण भी राज्य के सांस्कृतिक जीवन में पवित्र परंपराओं की निरंतर भूमिका को दर्शाते हैं।
क्षेत्रीय पहचान से साझा राष्ट्रीय कथा तक
यह संग्रह क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़ते हुए व्यापक भारतीय चेतना के प्रतीकों की भी समाहित करता है।
अशोक की सिंह लाट (लॉयन कैपिटल) एक लकड़ी का मॉडल, जिसमें अशोक चक्र और राष्ट्रीय प्रतीक के अन्य तत्व शामिल हैं, मध्य प्रदेश की स्थानीय शिल्पकला की अभिव्यक्तियों को भारत की राष्ट्रीय पहचान के सर्वाधिक पहचाने जाने वाले प्रतीकों में से एक से जोड़ती है। वहीं, आत्मनिर्भर भारत जन संपर्क महा अभियान का एक स्मरणीय पोस्टर सार्वजनिक जीवन के एक अधिक समकालीन पहलू को दर्शाता है।
पीएम स्मृति-चिन्ह पहल इस यात्रा को सार्वजनिक आयाम प्रदान है। सार्वजनिक संवाद के दौरान प्रस्तुत किया गया कोई स्मृति-चिन्ह व्यक्तिगत सराहना या स्थानीय पहचान की अभिव्यक्ति के रूप में अपनी यात्रा शुरू करता है। ई-नीलामी के माध्यम से वह व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश करता है, जहां नागरिक उस वस्तु और उससे जुड़ी कहानी से जुड़ सकते हैं। प्रत्येक वस्तु अपनी स्थानीय विशिष्टा को बनाए रखते हुए सामूहिक रूप से भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की एक व्यापक कहानी में योगदान देती है।
पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी की शुरुआत से अब तक प्रधानमंत्री को भेंट किए गए हजारों उपहारों को जनता के लिए उपलब्ध कराया गया है। इससे प्राप्त राशी नमामि गंगा कार्यक्रम के लिए समर्पित की जाती है।
नीलामी वर्तमान में जारी है और इसकी अवधि बढ़ाकर 31 अक्टूबर, 2026 तक कर दी गई है। इच्छुक बोलीदाता आधिकारिक पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी पोर्टल https://pmmementos.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं
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पीके/केसी/आरटी/आईएम/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2320959)
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